मच्छर काटे तो भूलकर भी न खुजलाएं, वरना बीमारी हो जाएगी खतरनाक! वैज्ञानिकों ने खोजा इसका कारण

Last Updated:July 07, 2026, 17:20 IST
Mosquito itching never: आमतौर पर जब मच्छर या कुछ काटता है तो स्किन में खुजली होने लगती है. इस खुजली को हम खुजला देते है. इससे हमें राहत मिलती है. लेकिन एक नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इस खुजली को न ही खुजलाएं तो बेहतर होगा क्योंकि इससे बीमारी के आगे बढ़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा. वैज्ञानिकों ने अपने शोध में इसका कारण पता लगाया है.
खुजली का विज्ञान.
जब मच्छर काटता है तो खुजलाने में बहुत मजा आता है. इतना कि लोग इसे बार-बार करने लगते हैं. यदि आप भी ऐसा खूब कर रहे हैं तो तुरंत इसे बंद कर दीजिए, वरना लेने के देने पड़ जाएंगे. यह बात हम नहीं बल्कि एक नई रिसर्च के आधार पर कही गई है. वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च के बाद बताया है कि जब हम स्किन में खुजली करते हैं तो इससे मजा आता है, यह स्वाभाविक है. लेकिन अगर हम इसे ज्यादा करने लगते हैं तो इसका बहुत बुरा परिणाम सामने आ सकता है. इससे सूजन बढ़ जाती है और उससे तरह-तरह की बीमारियां भी हो सकती हैं. नई रिसर्च से पता चला है कि खुजलाने की क्रिया से शरीर में कोशिकाओं के स्तर पर एक ऐसा चक्र शुरू हो जाता है जिसमें खुद ही बार-बार खुजली करने का मन करता है. यानी जितना अधिक व्यक्ति खुजलाता है उतनी ही अधिक खुजली होने की आशंका बढ़ जाती है. इससे यह दुष्चक्र लगातार चलता रहता है.
वैज्ञानिकों ने कारण समझ लियाखुजली कई कारणों से हो सकती है. कभी यह सामान्य एलर्जी, कीड़े के काटने या स्किन की जलन के कारण होती है, तो कभी इसके पीछे कुछ गंभीर बीमारियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं. कारण चाहे जो भी हो, डॉक्टर लंबे समय से चेतावनी देते आए हैं कि बार-बार या जरूरत से ज्यादा खुजलाने से त्वचा को नुकसान पहुंचता है. अब वैज्ञानिकों ने इसे बेहतर ढंग से समझ लिया है. इसका जवाब उन्हें एक दिलचस्प प्रयोग से मिला. वैज्ञानिकों ने चूहों पर प्रयोग करते हुए यह समझने की कोशिश की कि खुजलाने के दौरान शरीर में कौन-कौन सी प्रतिक्रियाएं होती है और क्यों होती है. इसके लिए उन्होंने कुछ चूहों के उपर खुजली पैदा करने वाली चीजों को लगाया. यानी इन चूहों में खुजली पैदा करने वाली प्वाइजन आईवी या इस तरह के पौधें के कण या जेवरों में मौजूद निकेल के कण. अब इन चूहों को दो समूहों में बांट दिया. एक समूह के चूहे को कोन ऑफ शेम पहना दिया. कोन ऑफ शेम एक प्लास्टिक कॉलर होता है. अगर इसे पहना दिया जाए तो चूहे खुजली वाली जगह को खुजला नहीं सकता. दूसरे समूह वाले चूहे को खुला छोड़ दिया.
चूहों पर किया प्रयोगयूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग में डेनियल कप्लान की टीम ने यह शोध किया. कपलान और उनकी टीम ने चूहों के कानों पर एक ऐसा रसायन लगाया, जिससे चूहे की स्किन पर चकत्ते निकल आए. अब सामान्य चूहों ने उस जगह को खुजलाना शुरू कर दिया. इसके बाद वहां सूजन पैदा करने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाएं तेजी से पहुंचीं. इससे वहां सूजन और बढ़ गई. दूसरी ओर जिन चूहों में खुजली महसूस करने वाली तंत्रिका कोशिकाएं जन्म से ही ठीक तरह से काम नहीं करती थीं, उनमें रैश और सूजन काफी हल्की रही. जिन चूहों को कोन ऑफ शेम पहनाया गया था उन्हें खुजली तो महसूस हुई लेकिन वे उस जगह को खुजला न सकें. परिणाम बेहद स्पष्ट थे. जिन चूहों ने खुजली के बावजूद खुद को नहीं खुजलाया, उनमें भी सूजन काफी कम रही और सूजन पैदा करने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाओं की संख्या भी काफी कम पाई गई.
डेनियल कप्लान ने कहा कि यह निष्कर्ष लोगों के रोजमर्रा के अनुभवों से भी मेल खाता है कि खुजलाने से वास्तव में समस्या और बढ़ जाती है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, अगर आप मच्छर के काटे हुए स्थान को नजरअंदाज कर दें और उसे न खुजलाएं तो ज्यादातर लोगों में खुजली 5 से 10 मिनट के भीतर अपने आप खत्म हो जाती है. लेकिन अगर आप उसे खुजलाना शुरू कर दें, तो वह पूरे एक हफ्ते तक आपका साथी बन सकती है. यानी बार-बार खुजलाने से न केवल खुजली बढ़ जाती है बल्कि उस जगह पर सूजन और जलन भी अधिक हो जाती है, जिससे समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है.
सभी जीवों में खुजलाने की आदतइस प्रयोग के जरिए वैज्ञानिकों ने इसे सेलुलर लेवल पर यह समझने की कोशिश की कि जब खुजली वाली जगह को खुजलाया जाता है और जब उसे बिना खुजलाए छोड़ दिया जाता है, तब शरीर के भीतर क्या-क्या बदलाव होते हैं. इससे उन्हें यह जानने में मदद मिली कि खुजलाने से कोशिकाओं में कौन-सी प्रक्रियाएं सक्रिय होती हैं जो आगे चलकर खुजली को और बढ़ा सकती हैं. शोधकर्ताओं को यह भी समझने में मदद मिली कि खुजलाने पर शुरुआत में इतनी राहत और सुकून क्यों महसूस होता है. सिर्फ इंसान या अन्य स्तनधारी जीव ही नहीं, बल्कि मछलियां भी खुजली होने पर अपने शरीर को रगड़कर खुजलाने जैसी हरकत करती हैं. लगभग सभी जीवों में यह व्यवहार पाए जाने से संकेत मिलता है कि विकासक्रम के दौरान इसके पीछे कोई जैविक या प्राकृतिक कारण जरूर रहा होगा. चूहों पर किए गए इस प्रयोग से यह भी संकेत मिला कि खुजलाना त्वचा पर मौजूद कुछ जर्म्स से थोड़ी-बहुत सुरक्षा देने में मदद कर सकता है. हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह फायदा इतना बड़ा नहीं है कि बार-बार खुजलाने को सही ठहराया जा सके. क्योंकि अत्यधिक खुजलाने से त्वचा को नुकसान पहुंचता है और खुजली की समस्या और भी बढ़ सकती है.
कीड़े के काटने या एलर्जी से हुई खुजली में क्या करेंगर्मियों में मच्छर या अन्य कीड़ों के काटने, पॉइज़न आइवी या कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस से होने वाली खुजली के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञ आमतौर पर कुछ क्रीम लगाने की सलाह देते हैं. हालांकि यह कुछ दिनों में अपने आप ठीक भी हो जाती है. डॉ. कप्लान एक और आसान उपाय बताते हैं. उनके अनुसार मेंथोल युक्त क्रीम कुछ समय के लिए स्किन को खुजली की बजाय ठंडक का एहसास कराती है. इससे खुजलाने की इच्छा कम हो जाती है और खुजली-खुजलाने का दुष्चक्र टूट सकता है. उन्होंने कहा कि यह एक तरह का चीट कोड है, जो थोड़ी देर के लिए त्वचा को धोखा देकर खुजली कम महसूस कराता है.
About the AuthorLakshmi Narayan
18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें
न्यूजलेटर
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें



