‘सतलुज’ के OTT से हटने पर भड़का सिख समुदाय, दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी आयोजित करेगी पब्लिक स्क्रीनिंग

Last Updated:July 08, 2026, 09:04 IST
Delhi Sikh Gurudwara Management Committee on Satluj: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 से हटाने पर नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कमेटी ने इसे पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की कहानी को दबाने की कोशिश जानबूझकर की गई. इसके विरोध में डीएसजीएमसी ने ऐलान किया है कि वे इस फिल्म को जनता तक पहुंचाने के लिए हर क्षेत्र में इसकी पब्लिक स्क्रीनिंग और शैक्षणिक संस्थानों में सेमिनार आयोजित करेंगे.
नई दिल्ली. ‘पंजाब 95’ से नाम बदलकर ‘सतलुज’ करीब 3 साल बाद ओटीटी पर रिलीज हुई. लेकिन 48 घंटे के बाद ही फिल्म को जी5 से हटा दिया. एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ स्टारर पॉलिटिकल-ड्रामा फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 से अचानक हटा दिया गया. फिल्म के ओटीटी से अचानक हटने के बाद विवाद गरमा गया है. अब दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने सरकार और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताया है. कमेटी ने आरोप लगाया है कि सामाजिक कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी को लोगों तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की जा रही है. फाइल फोटो
दिलजीत दोसांझ स्टारर ये फिल्म पिछले काफी समय से सुर्खियों में थी. दरअसल, सीबीएफसी ने फिल्म में 127 कट्स लगाने की मांग कर दी थी. इन कट्स में फिल्म के टाइटल से ‘पंजाब’ हटाने, हीरो का नाम बदलने, भारतीय झंडे के सीन हटाने और पंजाब पुलिस का जिक्र न करने जैसी शर्तें शामिल थीं. निर्देशक हनी त्रेहान ने उस वक्त कहा था कि अगर 127 कट्स लगा दिए गए तो फिल्म से सिर्फ ट्रेलर ही बचेगा. उन्होंने साफ कहा था कि इतने कट्स के बाद ये फिल्म उनकी या दिलजीत की नहीं रहेगी. हालांकि, मेकर्स ने हार नहीं मानी. निर्देशक हनी त्रेहान और दिलजीत दोसांझ ने सेंसर बोर्ड की मांग को ठुकरा दिया. तीन साल से लंबे के इंतजार के बाद आखिरकार फिल्म जी5 पर रिलीज हुई. लेकिन फिल्म 48 घंटे में ओटीटी से हटा दी गई. इस फिल्म के हटने से सिख समयाज भड़क गया है. फाइल फोटो
डीएसजीएमसी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने मंगलवार को एक ऑफिशियल बयान जारी किया. उन्होंने कहा, ‘जसवंत सिंह खालरा ने पंजाब के उस काले दौर में अपनी जान जोखिम में डालकर सच्चाई से दुनिया का सामना कराया था. उन्होंने खोजी पड़ताल कर 25,000 ऐसे शवों के सबूत जुटाए थे, जिन्हें पुलिस द्वारा ‘लावारिस’ बताकर गुपचुप तरीके से जला दिया गया था. इस सच्चाई को आज की पीढ़ी से छिपाना पूरी तरह गलत है, जिससे सिख समुदाय में भारी आक्रोश है.’
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हरमीत सिंह कालका ने घोषणा की है कि उसके सभी गुरुद्वारा प्रबंधन सदस्यों से फिल्म डाउनलोड कर अपने-अपने इलाकों में सार्वजनिक प्रदर्शन कराने को कहा गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देख सकें. इसके अलावा कमेटी जल्द ही अपने स्कूलों और कॉलेजों के चेयरपर्सन के साथ बैठक करेगी. हर कॉलेज में जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके योगदान पर सेमिनार आयोजित किए जाएंगे. कालका का कहना है कि समाज को यह समझना चाहिए कि एक सामाजिक कार्यकर्ता भी बड़ा बदलाव ला सकता है. फाइल फोटो
हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ जसवंत सिंह खालरा के किरदार में हैं. जसवंत सिंह खालरा एक बैंक क्लर्क से मानवाधिकार कार्यकर्ता बने, जिन्होंने 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में पंजाब में कथित अवैध हत्याओं और गुप्त अंतिम संस्कारों का पर्दाफाश किया. खालरा 1995 में लापता हो गए थे. दस साल बाद, चार पंजाब पुलिस अधिकारियों को उनके अपहरण, यातना और कथित हत्या के लिए दोषी ठहराया गया. खालरा का शव कभी नहीं मिला. फाइल फोटो
फिल्म का सफर भी विवादों से भरा रहा है. ‘पंजाब 95’ नाम से बनी इस फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के साथ लगभग चार साल तक संघर्ष करना पड़ा. बोर्ड ने फिल्म में 120 कट लगाने की मांग की थी. इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा गया और इसे बिना कट के जी5 पर रिलीज किया गया. हालांकि, रिलीज के दो दिन बाद ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया. जी5 ने केवल इतना कहा कि हालिया घटनाक्रम के चलते फिल्म फिलहाल उपलब्ध नहीं है. वहीं, कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि फिल्म को आईटी नियमों के कथित उल्लंघन के कारण हटाया गया. फाइल फोटो
फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अलावा अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं. फिल्म का निर्माण RSVP मूवीज और मैकगफिन पिक्चर्स ने किया है. फिलहाल जी5 या फिल्म निर्माताओं की ओर से फिल्म की दोबारा स्ट्रीमिंग को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. फाइल फोटो
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