रेगिस्तान में बसा स्मार्ट शहर! HRRL टाउनशिप बनी सस्टेनेबल डेवलपमेंट का नया मॉडल, खूबियां कर देंगी हैरान

बाड़मेर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) परियोजना के साथ विकसित आधुनिक टाउनशिप आज देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है. बालोतरा के पचपदरा का यह टाउनशिप केवल कर्मचारियों के लिए बनाया गया आवासीय परिसर नहीं है, बल्कि रेगिस्तानी क्षेत्र में टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक शहरी विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभरी है. बाड़मेर जैसे इलाके में, जहां गर्मियों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, भूजल सीमित है और पानी की गुणवत्ता भी बड़ी चुनौती मानी जाती है, वहां इस टाउनशिप की पूरी योजना स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है.
आधुनिक इंजीनियरिंग के साथ राजस्थान की पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों और वास्तुशिल्प को शामिल कर इसे विकसित किया गया है. लगभग 248 एकड़ में फैले इस परिसर में जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता, हरित विकास और सामुदायिक जीवन को प्राथमिकता दी गई है. यही वजह है कि यह टाउनशिप अब औद्योगिक परियोजना का हिस्सा भर नहीं, बल्कि भविष्य के स्मार्ट, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल शहरी विकास की मिसाल बन चुकी है. विशेषज्ञ भी इसे ऐसे मॉडल के रूप में देख रहे हैं, जिसे देश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में अपनाया जा सकता है.
रेगिस्तान की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार हुआ मास्टर प्लान
इस टाउनशिप को प्रसिद्ध आर्किटेक्चर फर्म सीपी कुकरेजा आर्किटेक्ट्स (CPKA) ने डिजाइन किया है. पूरे मास्टर प्लान को राजस्थान की पारंपरिक जल संरक्षण प्रणाली ‘जोहड़’ से प्रेरित होकर तैयार किया गया है. सीमित भूजल, खारे पानी और अत्यधिक गर्म जलवायु जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और टिकाऊ विकास को प्राथमिकता दी गई है.
जल संरक्षण और हरित विकास पर विशेष फोकस
टाउनशिप में 100 प्रतिशत रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग, 2 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, 12 रिचार्ज पिट, सोलर स्ट्रीट लाइटिंग और 5,000 से अधिक स्वदेशी पेड़ों का रोपण किया गया है. इन व्यवस्थाओं के माध्यम से जल की मांग में लगभग 45 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है. पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के कारण इस परियोजना को HUDCO Design Award और GRIHA Large Developments श्रेणी में 4-स्टार रेटिंग भी मिल चुकी है.
248 एकड़ में फैली इस टाउनशिप को सीपी कुकरेजा आर्किटेक्ट्स ने डिजाइन किया है.
पारंपरिक वास्तुकला से ऊर्जा की बचत की कोशिश
टाउनशिप की इमारतों में जालियां, झरोखे, आंगन और विशेष छत डिजाइन जैसी पारंपरिक तकनीकों का उपयोग किया गया है. इससे प्राकृतिक वेंटिलेशन बेहतर होता है और गर्मी का प्रभाव कम रहता है. परिणामस्वरूप एयर कंडीशनिंग पर निर्भरता घटती है और ऊर्जा की खपत में उल्लेखनीय कमी आती है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित एचआरआरएल परियोजना के साथ विकसित आधुनिक टाउनशिप देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है
आधुनिक सुविधाओं से लैस है आत्मनिर्भर टाउनशिप
टाउनशिप में आवासीय परिसर के साथ स्कूल, आंगनवाड़ी, क्लब, ऑडिटोरियम, गेस्ट हाउस, शॉपिंग एरिया, कार्यालय और सुरक्षा सुविधाओं को सुव्यवस्थित पैदल मार्गों से जोड़ा गया है. कुल क्षेत्रफल का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हरित क्षेत्र और खुले सार्वजनिक स्थानों के लिए सुरक्षित रखा गया है. इससे यह केवल कर्मचारियों का आवासीय परिसर नहीं, बल्कि एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और समुदाय-केंद्रित टाउनशिप के रूप में विकसित हुई है.
पचपदरा का टाउनशिप रेगिस्तानी क्षेत्र में टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक शहरी विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभरी है.
टाउनशिप भविष्य के विकास का है मॉडल
सीपी कुकरेजा आर्किटेक्ट्स के मैनेजिंग प्रिंसिपल दिक्षु सी. कुकरेजा के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य केवल आवास बनाना नहीं था, बल्कि ऐसा शहरी तंत्र विकसित करना था जो रेगिस्तान की जलवायु के अनुरूप टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और मानवीय जीवनशैली प्रदान करे. स्थानीय जल संरक्षण तकनीकों, निष्क्रिय डिजाइन और सामुदायिक नियोजन के माध्यम से यह टाउनशिप भविष्य के स्मार्ट और सतत शहरी विकास का एक सफल उदाहरण बनकर सामने आई है.



