मानसून में गर्भवती महिलाएं रहें अलर्ट! जानें कैसे बढ़ेगी इम्युनिटी, इन चीजों से बना लें दूरी

सतना. मानसून की ठंडी फुहारें और सुहावना मौसम हर किसी को पसंद आता है लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए यही मौसम कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियां भी लेकर आता है. इस दौरान नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड, गैस्ट्रोएंटेराइटिस, डेंगू, मलेरिया और यूरिन इंफेक्शन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में खानपान, साफ-सफाई और व्यक्तिगत देखभाल में थोड़ी सी लापरवाही मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत पर असर डाल सकती है, इसलिए विशेषज्ञ मानसून में गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार, स्वच्छता और हाइड्रेशन पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
लोकल 18 को जानकारी देते हुए सतना निवासी डायटीशियन ममता पांडे ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की इम्युनिटी सामान्य से कमजोर रहती है. ऐसे में शरीर को संक्रमण से बचाने और शिशु के बेहतर विकास के लिए पौष्टिक भोजन बेहद जरूरी हो जाता है. गर्भवती महिलाओं को ताजा बना हुआ गर्म भोजन, उबली हुई सब्जियां, दालें, सूप और अच्छी तरह धोकर और छीलकर खाए जाने वाले फल अपने दैनिक आहार में शामिल करने चाहिए. इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है और संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है.
बीमारी की वजहविशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में बाहर मिलने वाले स्ट्रीट फूड, खुले में रखे खाद्य पदार्थ और पहले से कटे हुए फलों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए. बारिश के मौसम में अधिक नमी के कारण बैक्टीरिया और वायरस तेजी से बढ़ते हैं. दूषित पानी या अधपका भोजन खाने से टाइफाइड, फूड पॉइजनिंग और गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. यही कारण है कि गर्भवती महिलाओं को केवल घर का ताजा और गर्म भोजन ही खाना चाहिए ताकि मां और शिशु दोनों सुरक्षित रह सकें.
विटामिन, मिनरल और प्रोटीन से भरपूर रखें डाइटडायटीशियन के मुताबिक, केवल पेट भरना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल का सही संतुलन होना भी जरूरी है. विटामिन सी के लिए नींबू, संतरा, मौसंबी, कीवी, अमरूद और जामुन का सेवन लाभदायक माना जाता है. वहीं जिंक और आयरन की जरूरत पूरी करने के लिए सीमित मात्रा में कद्दू के बीज, तरबूज के बीज, सूरजमुखी के बीज, तिल और अलसी को आहार में शामिल किया जा सकता है. ये पोषक तत्व भ्रूण के बेहतर विकास के साथ-साथ मां की सेहत बनाए रखने में भी मदद करते हैं.
शरीर को रखें हाइड्रेटमानसून के दौरान वातावरण में उमस अधिक रहती है, जिससे पसीने के जरिए शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लगातार बाहर निकलते रहते हैं. कई बार पर्याप्त पानी न पीने से डिहाइड्रेशन और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की समस्या भी हो सकती है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ साफ पानी पीना चाहिए. इसके अलावा नींबू पानी और नारियल पानी भी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं. वहीं पर्याप्त हाइड्रेशन से संक्रमण का खतरा भी कम होता है.
स्वच्छता और सुरक्षा का भी रखें पूरा ध्यानमानसून में खानपान के साथ-साथ साफ-सफाई और व्यक्तिगत सुरक्षा भी बेहद जरूरी है. गर्भवती महिलाओं को सूती और ढीले कपड़े पहनने चाहिए ताकि पसीने और उमस से होने वाले त्वचा संक्रमण से बचा जा सके. जलभराव वाले रास्तों पर चलने से बचें और फिसलने के खतरे को कम करने के लिए नॉन-स्लिप फुटवियर पहनें. इसके अलावा घर के आसपास पानी जमा न होने दें, खिड़कियों पर जाली लगाएं और गर्भावस्था के लिए सुरक्षित मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं ताकि डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से बचाव हो सके. यदि इन छोटी-छोटी सावधानियों के साथ संतुलित पोषण और स्वच्छता का ध्यान रखा जाए, तो गर्भवती महिलाएं मानसून के पूरे मौसम में स्वस्थ रह सकती हैं और गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होता है.



