1973 से 1999: एक नाम से बनी 2 फिल्में, पहली में बाप ने बॉक्स ऑफिस पर किया राज, दूसरी में बेटे ने छाप डाले नोट

Last Updated:August 05, 2026, 15:44 IST
Two films with Same Title: एक नाम की वैसे तो कई फिल्में बनी हैं. लेकिन 26 साल के अंदर एक नाम की 2 फिल्में बनी. कमाल की बात ये है कि दोनों ने अलग-अलग दौर में बॉक्स ऑफिस किया. बाप की हिट फिल्म का नाम लेकर बेटे ने डायरेक्टोरियल डेब्यू किया और नई कहानी पेश कर टिकट खिड़की पर नोट बरसा दिए. दोनों फिल्मों की स्टारकास्ट, कहानी और संगीत अलग थे, लेकिन सफलता ने इन्हें एक धागे में बांध दिया.
नई दिल्ली. फिल्म इंडस्ट्री में जब कोई नाम कल्ट बन जाता है तो उसे दोबारा पर्दे पर उतारना किसी खतरे से खाली नहीं होता. लेकिन बॉलीवुड के इतिहास में एक ऐसा नाम है, जिसने दो अलग-अलग दशकों में सिनेमाघरों की खिड़कियों को नोटों से भर दिया. बात कर रहे हैं ऐसी फिल्म की जो 26 साल में एक नाम से दो बार बनी और दोनों बार दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रही. एक ही टाइटल, दो पीढ़ियां, दो अलग कहानियां… लेकिन दोनों ने कमाई और लोकप्रियता के मामले में अपनी अलग छाप छोड़ दी. आखिर क्या था इस नाम का जादू, जिसने बाप और बेटे दोनों को हिट दिलाई?
बात कर रहे हैं फिल्म ‘कच्चे धागे’ की. ‘कच्चे धागे’ नाम ही कुछ ऐसा है जो टूटे-जुड़े रिश्तों की कहानी बयां करता है. लेकिन बॉलीवुड की दुनिया में यह नाम दो अलग-अलग युगों में दो अलग-अलग कहानियों का जरिया बना. पहली फिल्म में पिता राज खोसला ने चंबल की घाटियों में डाकूओं की दुश्मनी और प्यार का ताना-बाना बुना तो 26 साल बाद बेटे मिलन लुथरिया ने उसी नाम से राजस्थान-पाकिस्तान बॉर्डर पर सौतेले भाइयों की दोस्ती और साहस की कहानी गढ़ी. दोनों फिल्में अलग-अलग थीं, लेकिन दोनों ने अपने-अपने समय में दर्शकों को बांधे रखा.
साल 1973 में रिलीज हुई ‘कच्चे धागे’ का निर्देशन राज खोसला ने किया था. फिल्म में विनोद खन्ना, मौसमी चटर्जी, कबीर बेदी और निरूपा रॉय लीड रोल्स में थे. यह एक एक्शन-ड्रामा फिल्म थी. कहानी दो दुश्मन डाकूओं की है. ठाकुर लखन सिंह (विनोद खन्ना) और रूपा (कबीर बेदी) की है. जो बदले की आग में एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं. दोनों एक-दूसरे को मारने की कसम खाए बैठे हैं. बीच में आती है सोना (मौसमी चटर्जी), जिस पर दोनों को प्यार हो जाता है. प्यार और बदले की इस कश्मकश में फिल्म का अंत अनोखा है. दोनों दोस्त बनकर मरने का फैसला करते हैं. उस दौर में फिल्म ने टिकट खिड़की पर शानदार प्रदर्शन किया और सुपरहिट साबित हुई. यह 1973 की सफल फिल्मों में शामिल रही.
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फिल्म में निरूपा रॉय, त्रिलोक कपूर, के.एन. सिंह, देव कुमार और भगवान दादा जैसे कलाकार थे. संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था और गीत आनंद बख्शी के. लता मंगेशकर की आवाज में गाने यादगार बने ‘मेरे बचपन तू जा’, ‘जा रे जा ओ दीवाने’ (लता-हेमलता), ‘हाय हाय एक लड़का’ और टाइटल ट्रैक ‘कच्चे धागे के साथ’. खास बात ये हैं कि फिल्म के चारों गाने लता मंगेशकर ने गाए थे. 1973 के टॉप ग्रॉसर्स में यह 17वें स्थान के आस-पास रही. ‘मेरा गांव मेरा देश’ की सफलता के बाद राज खोसला की यह फिल्म भी डकैती या लुटेरों वाली शैली में अच्छी मानी गई.
19 फरवरी 1999 को राज खोसला के बेटे ने इसी नाम से फिल्म रिलीज की. ये मिलन लुथरिया की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म थी. जो अपने पिता के ‘कच्चे धागे’ से पूरी तरह अलग थी. कहानी सौतेले भाइयों आफताब (अजय देवगन) और धनंजय ‘जय’ पंडित (सैफ अली खान) की है. आफताब राजस्थान-पाकिस्तान बॉर्डर पर सामान तस्करी करने वाला है, जबकि जय शहर का स्मार्ट, महत्वाकांक्षी युवक हैं और दोनों एक-दूसरे से नफरत करते हैं. लेकिन हालात ऐसे बनते हैं कि दोनों को साथ मिलकर आतंकवाद के आरोप से बचने और मासूमियत साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है.
मनीषा कोईराला (रुखसाना) और नम्रता शिरोडकर (रागिनी) लीडिंग लेडीज थीं. गोविंद नामदेव, सदाशिव अमरापुरकर, विनीत कुमार जैसे कलाकारों ने सपोर्टिंग भूमिकाएं निभाईं. फिल्म राजस्थान के रेगिस्तान (खासकर जैसलमेर-कुलधरा) और स्विट्जरलैंड में शूट हुई.
सबसे यादगार सीक्वेंस ट्रेन के नीचे लटककर भागने वाला एक्शन था, जो बिना ज्यादा VFX के फिल्माया गया.अजय देवगन ने इस सीन में चोट भी खाई थी. बजट करीब 10 करोड़ रुपये था.
फिल्म का संगीत भी सुपरहिट रहा. गीत आनंद बख्शी के और संगीत नुसरत फतेह अली खान का था, जिसकी रिकॉर्डिंग उनकी मौत के बाद पूरी हुई. ‘खाली दिल नहीं जान भी है’ , ‘दिल परदेसी हो गया’, ‘प्यार नहीं करना जहां’, ‘इश शाने करम का’, ‘ओ रे छोरी’, ‘एक जवानी तेरी’ गाने आज भी हिट हैं. एल्बम ने करीब 30 लाख यूनिट्स बिक्री का आंकड़ा छुआ और 1999 के टॉप सेलिंग एल्बम्स में जगह बनाई. दिलचस्प बात यह कि लता मंगेशकर ने दोनों फिल्मों के गाने गाए.
1999 में आई ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फिल्म हिट साबित हुई. भारत नेट कलेक्शन 16.19 करोड़ रुपये, डोमेस्टिक ग्रॉस करीब 27.7 करोड़ और वर्ल्डवाइड करीब 28-29 करोड़ रुपये रहा. पहले हफ्ते में ही 5.70 करोड़ नेट आया. यह 1999 की छठी सबसे ज्यादा नेट कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों में शामिल रही. अजय-सैफ की केमिस्ट्री, एक्शन और म्यूजिक ने फिल्म को कामयाब बनाया.
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August 05, 2026, 15:44 IST



