700 KM तक किया पीछा, दिल्ली से ढूंढते-ढूंढते उदयपुर पहुंची पुलिस, रोहित चौधरी गैंग के बदमाश को दबोचा

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लंबे समय से फरार चल रहे रोहित चौधरी गैंग के एक बदमाश को राजस्थान के उदयपुर से गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है. इस गिरफ्तार बदमाश की पहचान 28 वर्षीय राहुल रावत के रूप में हुई है. वह तिहाड़ जेल में कैदी पर जानलेवा हमला करने सहित कई गंभीर मामलों में वांटेड था और चार अलग-अलग मामलों में अदालत उसे प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर (घोषित भगोड़ा अपराधी) घोषित कर चुकी थी.
पुलिस के मुताबिक राहुल की गिरफ्तारी आसान नहीं थी. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था और अलग-अलग राज्यों में छिपकर रह रहा था. स्पेशल सेल की SWR टीम ने करीब 700 किलोमीटर तक उसका पीछा किया, कई दिनों तक उसकी गतिविधियों पर नजर रखी और आखिरकार उदयपुर की अग्रवाल कॉलोनी से उसे दबोच लिया.
तिहाड़ जेल में कैदी पर जानलेवा हमला
राहुल रावत के खिलाफ सबसे गंभीर मामला तिहाड़ जेल के अंदर कैदी पर जानलेवा हमले का है. पुलिस के अनुसार मई 2023 में उसने अपने साथियों के साथ मिलकर पहले से बनाई गई साजिश के तहत जेल में बंद एक कैदी पर नुकीले हथियारों से हमला कर दिया था. समय रहते जेल प्रशासन के हस्तक्षेप से कैदी की जान बच गई.
इस मामले में हरि नगर थाने में आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 307 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था. पुलिस का कहना है कि जिस कैदी पर हमला हुआ था, उसका पहले रंदीप भाटी गैंग से संबंध था और बाद में वह हिमांशु उर्फ भाऊ गैंग के संपर्क में आ गया था. फरवरी 2026 में आगरा में यूपी एसटीएफ और पुलिस के साथ मुठभेड़ में उसकी मौत हो चुकी है.
गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार बदल रहा था ठिकाना
जेल से बाहर आने के बाद राहुल रावत फरार हो गया और पुलिस की पकड़ से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा. इतना ही नहीं, जिन मामलों में उसके खिलाफ अदालत में सुनवाई चल रही थी, उनमें भी वह पेश नहीं हुआ. लगातार गैरहाजिर रहने के कारण अदालत ने उसे अलग-अलग मामलों में घोषित भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया.
स्पेशल सेल फरार गैंगस्टरों और संगीन अपराधों में शामिल अपराधियों पर लगातार निगरानी रख रही थी. इसी दौरान 17 जुलाई 2026 को पुलिस को पुख्ता सूचना मिली कि राहुल उदयपुर में छिपा हुआ है. सूचना मिलते ही टीम राजस्थान पहुंची और स्थानीय स्तर पर कई दिनों तक गुप्त निगरानी की. सभी इनपुट की पुष्टि होने के बाद 18 जुलाई 2026 को उदयपुर की अग्रवाल कॉलोनी से उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
सात गंभीर मामलों में आरोपी
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक राहुल रावत का आपराधिक इतिहास लंबा रहा है. उसके खिलाफ कारजैकिंग, अपहरण और लूट, मारपीट, मोबाइल लूट, गवाह को धमकाने, अवैध हथियार रखने और तिहाड़ जेल में हत्या की कोशिश जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं.
साल 2016 में दिल्ली कैंट इलाके में टैक्सी कारजैकिंग का मामला उसके खिलाफ दर्ज हुआ था. 2018 में संगम विहार में अपहरण और लूट के केस में उसका नाम सामने आया. इसके अलावा गवाह को धमकाने, अवैध हथियार रखने और मोबाइल लूट जैसे मामलों में भी वह आरोपी रहा है. इन मामलों में अदालत द्वारा उसे कई बार भगोड़ा अपराधी घोषित किया गया.
गैंगस्टरों की चमक-दमक से देख बना अपराधी
पुलिस जांच में सामने आया है कि राहुल ने 12वीं तक पढ़ाई की थी. परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी. उसके पिता स्थानीय बेकरी में काम करते हैं, जबकि वर्ष 2022 में उसकी मां का निधन हो गया था.
पुलिस का कहना है कि राहुल गैंगस्टरों की लाइफस्टाइल और उनके प्रभाव से प्रभावित होकर अपराध की दुनिया में आया. जल्दी पैसा कमाने और इलाके में दबदबा बनाने की चाहत में उसने स्थानीय अपराधियों का साथ पकड़ लिया और धीरे-धीरे संगठित गैंग का सक्रिय सदस्य बन गया.
अब गैंग नेटवर्क की होगी पड़ताल
गिरफ्तारी के बाद राहुल रावत को दिल्ली लाकर पूछताछ की जा रही है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फरारी के दौरान उसे किन लोगों ने पनाह दी, वह किन-किन गैंग सदस्यों के संपर्क में था और क्या इस दौरान उसने किसी नई आपराधिक साजिश में भी भूमिका निभाई. अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से रोहित चौधरी गैंग और उससे जुड़े नेटवर्क के बारे में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं.



