नई माताओं के लिए बनी उम्मीद, जनाना अस्पताल की स्तनपान इकाई से एक साल में 2300 से ज्यादा महिलाओं को मिला लाभ

Last Updated:August 05, 2026, 20:39 IST
Sikar Health News: सीकर के जनाना अस्पताल की स्तनपान इकाई नई माताओं के लिए बड़ी मददगार साबित हो रही है. यहां प्रतिदिन 15 से अधिक महिलाओं को स्तनपान, नवजात की देखभाल और मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी विशेषज्ञ काउंसलिंग दी जा रही है. अस्पताल की इस पहल से पिछले एक वर्ष में 2300 से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है. प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी माताओं को सही स्तनपान तकनीक, दूध की कमी, नवजात को सही तरीके से दूध पिलाने और अन्य समस्याओं के समाधान की जानकारी देते हैं. इस पहल से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार के साथ जागरूकता भी लगातार बढ़ रही है.
Sikar News: नवजात शिशु के बेहतर स्वास्थ्य, रोग प्रतिरोधक क्षमता और शारीरिक विकास के लिए मां का दूध सबसे जरूरी आहार होता है. इसके बावजूद प्रसव के बाद कई महिलाओं को दूध कम बनने, बिल्कुल नहीं बनने या शिशु के सही तरीके से स्तनपान नहीं कर पाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे मामलों में सीकर के जनाना अस्पताल में विशेष स्तनपान प्रबंधन एवं काउंसलिंग इकाई की बनाई गई है. यह इकाई महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है.
जनाना अस्पताल की इस विशेष स्तनपान इकाई में प्रतिदिन 15 से अधिक महिलाएं परामर्श और उपचार के लिए पहुंच रही हैं. इनमें कई महिलाएं ऐसी होती हैं, जिनका दूध प्रसव के बाद पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है. इसके अलावा कुछ मामलों में नवजात शिशु स्तन को सही तरीके से पकड़ नहीं पाता. जनाना अस्पताल में पहले एक्सपर्ट डॉक्टर समस्या का कारण समझते हैं और फिर काउंसलिंग करते हैं. इसके बाद आवश्यक थैरेपी के माध्यम से मां और शिशु दोनों की परेशानी दूर करने का प्रयास करते हैं.
अस्पताल में यह स्तनपान प्रबंधन इकाई करीब एक साल पहले शुरू की गई थी. इस दौरान अस्पताल के विभिन्न वार्डों से स्तनपान संबंधी परेशानी वाली महिलाओं को यहां रेफर किया जाता है. इकाई शुरू होने के बाद से अब तक 2300 से अधिक महिलाओं को इसका लाभ मिल चुका है. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि लगातार बढ़ती जागरूकता और सफल परिणामों के कारण अब अधिक से अधिक महिलाएं इस सुविधा का लाभ लेने के लिए आगे आ रही हैं.
Add as Preferred Source on Google
दूध न बनने या कम बनने की समस्या से जूझ रही महिलाओं के लिए अस्पताल में खास तरह की लैक्टेशन थैरेपी दी जाती हैं. इस थैरेपी के माध्यम से दूध बनने की नेचुरल प्रोसेस को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाता है. साथ ही महिलाओं को मानसिक रूप से भी इसके लिए बजबूत किया जाता है. ताकि वे तनावमुक्त होकर अपने शिशु को स्तनपान करा सकें. इस दौरान एक्सपर्ट नियमित रूप से उनकी निगरानी और रिपोर्ट का ध्यान रखते हुए.
स्तनपान इकाई काउंसलर मनीषा पूनिया ने बताया कि कई बार नवजात शिशु समय से पहले जन्म लेने, शारीरिक कमजोरी या सही तकनीक की जानकारी नहीं होने के कारण स्तन को ठीक प्रकार से पकड़ नहीं पाते. ऐसे बच्चों के लिए अस्पताल में ग्रिपिंग और फीडिंग थैरेपी कराई जाती है. इसके लिए एक्सपर्ट स्टाफ शिशुओं को धीरे-धीरे सही तरीके से स्तनपान करना सिखाता है. इसके बाद वे पर्याप्त मात्रा में मां का दूध पी पाते हैं.
उन्होंने बताया कि स्तनपान इकाई में माताओं को केवल उपचार ही नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें स्तनपान कराने की सही तकनीक भी बताई जाती है. इसके अलावा सही लैचिंग, सही पोजिशन और स्तनपान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की भी जानकारी दी जाती है. इससे स्तनपान के दौरान होने वाले दर्द, असहजता और अन्य समस्याओं में कमी आती है. साथ ही शिशु को भी सही पोषण मिलने से उसके स्वस्थ विकास में भी मदद मिलती है.
जनाना अस्पताल की इस सुविधा का लाभ अब प्राइवेट हॉस्पिटलों में प्रसव कराने वाली महिलाएं भी लेने पहुंच रही हैं. कई महिलाओं का कहना है कि निजी अस्पतालों में स्तनपान संबंधी समस्याओं पर सही काउंसलिंग नहीं की जाती है. इसके बारे में बहुत कम बताया जाता है. इस कारण माताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है. उनका कहना है कि जनाना अस्पताल में टीम हर समस्या को गंभीरता से सुनकर उसका समाधान करती है. अस्पताल के अनुसार काउंसलिंग और विशेष थैरेपी की मदद से 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में महिलाएं अपने नवजात शिशु को स्तनपान कराने में सक्षम हो रही हैं.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|First Published :
August 05, 2026, 20:39 IST



