Marriage News: क्या शादी की फोटो से साबित होता है कि दोनों पति-पत्नी हैं या नहीं? RPF की दलील और सबूतों पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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क्या शादी की फोटो से साबित होता है कि दोनों पति-पत्नी हैं या नहीं?HC का फैसला
Last Updated:August 05, 2026, 20:47 IST
High Court Big Order: कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि शादी की तस्वीर वैध शादी का पुख्ता प्रमाण नहीं हो सकता है. वैध शादी के लिए रस्मों, गवाहों और विश्वसनीय सबूतों का होना जरूरी है. हाईकोर्ट ने RPF कर्मचारी की बर्खास्तगी रद्द करने का फैसले को खारिज कर दिया है.क्या शादी की फोटो यह साबित करती है कि दोनों पति-पत्नी है. इस पर हाईकोर्ट ने फैसला दिया है. (फाइल फोटो)
कोलकाता. क्या किसी पुरुष और महिला की शादी की तस्वीर भर से यह साबित हो जाता है कि दोनों कानूनी रूप से पति-पत्नी हैं? कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस सवाल पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि केवल विवाह की तस्वीर किसी वैध शादी का निर्णायक प्रमाण नहीं हो सकती. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाह को वैध साबित करने के लिए जरूरी रस्मों, गवाहों और दूसरे विश्वसनीय सबूतों का होना आवश्यक है. इसी आधार पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उस RPF कर्मचारी की बर्खास्तगी रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा, जिसे पहली पत्नी से कानूनी तलाक लिए बिना दूसरी शादी करने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था.
रेलवे ने 2024 में हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती दी थी. हालांकि खंडपीठ ने रेलवे की अपील खारिज कर दी और RPF जवान को नौकरी पर बहाल करने का निर्देश दिया.
क्या था पूरा मामला?मामला वर्ष 2020 में शुरू हुआ था. RPF कर्मचारी की पत्नी ने रेलवे अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके पति ने उससे कानूनी रूप से तलाक लिए बिना दूसरी शादी कर ली है. पहली पत्नी की शिकायत के बाद रेलवे अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच शुरू की. जांच के बाद 30 अप्रैल 2021 को कर्मचारी के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया गया. इसके बाद विभागीय जांच बैठाई गई। जांच अधिकारी ने दूसरी शादी के आरोप को सही मान लिया. रिपोर्ट के आधार पर RPF कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया.
कर्मचारी ने क्यों किया बर्खास्तगी का विरोध?रेलवे के फैसले के खिलाफ RPF कर्मचारी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया. उसका कहना था कि केवल किसी व्यक्ति की शिकायत के आधार पर दूसरी शादी को साबित नहीं माना जा सकता. विभागीय जांच में जो दस्तावेज पेश किए गए, वे भी कानूनी रूप से पर्याप्त और भरोसेमंद नहीं थे. कर्मचारी की ओर से तर्क दिया गया कि जिस रजिस्टर की फोटोकॉपी को विवाह का प्रमाण बताया गया. उसमें दूल्हे, दुल्हन या गवाहों के हस्ताक्षर मौजूद नहीं थे. उसने यह भी सवाल उठाया कि जब कथित विवाह की आवश्यक रस्मों, विवाह कराने वाले व्यक्ति और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों का कोई ठोस प्रमाण नहीं था तो केवल एक तस्वीर और रजिस्टर की फोटोकॉपी के आधार पर दूसरी शादी का आरोप कैसे साबित माना गया.
रेलवे ने क्या दलील दी?रेलवे की ओर से कहा गया कि शिकायत करने वाली पहली पत्नी विभागीय जांच के दौरान पेश हुई थी. उसने अपनी शिकायत का समर्थन किया और कहा कि उसके पति ने दूसरी शादी की है. रेलवे ने यह भी दावा किया कि ‘मौनी बाबा मठ’ के एक रजिस्टर में कथित दूसरी शादी का रिकॉर्ड दर्ज था. इसके अलावा विभागीय जांच में एक शादी की तस्वीर भी सबूत के रूप में पेश की गई थी. रेलवे का कहना था कि शिकायत, रजिस्टर में दर्ज विवरण और तस्वीर को एक साथ देखने पर दूसरी शादी का आरोप साबित होता है. रेलवे ने इसी आधार पर कर्मचारी की बर्खास्तगी को उचित ठहराने की कोशिश की.
शादी की तस्वीर पर अदालत ने क्या कहा?कलकत्ता हाईकोर्ट रेलवे की इस दलील से सहमत नहीं हुआ कि केवल तस्वीर से विवाह सिद्ध हो जाता है. अदालत ने कहा कि किसी लड़की या महिला के पास किसी पुरुष के साथ शादी जैसी दिखाई देने वाली तस्वीर होना अपने आप यह साबित नहीं करता कि दोनों के बीच वैध विवाह हुआ था. तस्वीर से केवल यह दिखाई दे सकता है कि दोनों किसी समारोह या खास मौके पर साथ मौजूद थे लेकिन उससे यह साबित नहीं होता कि विवाह कानून के अनुसार सभी जरूरी रस्मों और शर्तों के साथ संपन्न हुआ. खंडपीठ ने कहा कि विवाह की वैधता साबित करने के लिए गवाहों और दूसरे विश्वसनीय प्रमाणों की आवश्यकता होती है।
About the Authorअरुण बिंजोला
अरुण बिंजोला वर्तमान में हिंदी में एसोसिएट एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वह करीब 19 वर्षों से काम कर रहे हैं, जिसमें 13 वर्षों से अधिक समय डिजिटल मीडिया में बी…
August 05, 2026, 20:47 IST
कर्मचारी ने क्यों किया बर्खास्तगी का विरोध?रेलवे के फैसले के खिलाफ RPF कर्मचारी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया. उसका कहना था कि केवल किसी व्यक्ति की शिकायत के आधार पर दूसरी शादी को साबित नहीं माना जा सकता. विभागीय जांच में जो दस्तावेज पेश किए गए, वे भी कानूनी रूप से पर्याप्त और भरोसेमंद नहीं थे. कर्मचारी की ओर से तर्क दिया गया कि जिस रजिस्टर की फोटोकॉपी को विवाह का प्रमाण बताया गया. उसमें दूल्हे, दुल्हन या गवाहों के हस्ताक्षर मौजूद नहीं थे. उसने यह भी सवाल उठाया कि जब कथित विवाह की आवश्यक रस्मों, विवाह कराने वाले व्यक्ति और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों का कोई ठोस प्रमाण नहीं था तो केवल एक तस्वीर और रजिस्टर की फोटोकॉपी के आधार पर दूसरी शादी का आरोप कैसे साबित माना गया.
रेलवे ने क्या दलील दी?रेलवे की ओर से कहा गया कि शिकायत करने वाली पहली पत्नी विभागीय जांच के दौरान पेश हुई थी. उसने अपनी शिकायत का समर्थन किया और कहा कि उसके पति ने दूसरी शादी की है. रेलवे ने यह भी दावा किया कि ‘मौनी बाबा मठ’ के एक रजिस्टर में कथित दूसरी शादी का रिकॉर्ड दर्ज था. इसके अलावा विभागीय जांच में एक शादी की तस्वीर भी सबूत के रूप में पेश की गई थी. रेलवे का कहना था कि शिकायत, रजिस्टर में दर्ज विवरण और तस्वीर को एक साथ देखने पर दूसरी शादी का आरोप साबित होता है. रेलवे ने इसी आधार पर कर्मचारी की बर्खास्तगी को उचित ठहराने की कोशिश की.
शादी की तस्वीर पर अदालत ने क्या कहा?कलकत्ता हाईकोर्ट रेलवे की इस दलील से सहमत नहीं हुआ कि केवल तस्वीर से विवाह सिद्ध हो जाता है. अदालत ने कहा कि किसी लड़की या महिला के पास किसी पुरुष के साथ शादी जैसी दिखाई देने वाली तस्वीर होना अपने आप यह साबित नहीं करता कि दोनों के बीच वैध विवाह हुआ था. तस्वीर से केवल यह दिखाई दे सकता है कि दोनों किसी समारोह या खास मौके पर साथ मौजूद थे लेकिन उससे यह साबित नहीं होता कि विवाह कानून के अनुसार सभी जरूरी रस्मों और शर्तों के साथ संपन्न हुआ. खंडपीठ ने कहा कि विवाह की वैधता साबित करने के लिए गवाहों और दूसरे विश्वसनीय प्रमाणों की आवश्यकता होती है।
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