भीलवाड़ा का गुरला बना ‘फूलों का गांव’, गेंदे की खेती से किसानों की बंपर कमाई, व्यापारी पहुंच रहे सीधे खेतों तक

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‘फूलों का गांव’ बना भीलवाड़ा का गुरला, गेंदे की खेती से किसानों को बंपर मुनाफ
Last Updated:August 07, 2026, 08:09 IST
Bhilwara Gurla Marigold Farming: भीलवाड़ा जिले का गुरला गांव गेंदे के फूलों की खेती के लिए “फूलों के गांव” के रूप में पहचान बना चुका है. भीलवाड़ा-उदयपुर नेशनल हाईवे-758 पर स्थित इस गांव में किसान बेंगलुरु और रतलाम से बीज मंगवाकर गेंदे की खेती कर रहे हैं. कम लागत और बेहतर दाम के कारण लगभग हर परिवार इससे जुड़ा है. नाथद्वारा, उदयपुर, अजमेर और चित्तौड़गढ़ के व्यापारी सीधे गांव आकर फूल खरीदते हैं, जिससे किसानों को बेहतरीन मुनाफा हो रहा है.
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Bhilwara: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले का गुरला गांव कृषि क्षेत्र में एक अनूठी और मिसाली पहचान बना चुका है. मरुधरा की धरती पर जहां अधिकांश किसान सदियों से चली आ रही पारंपरिक फसलों की खेती पर निर्भर हैं, वहीं गुरला गांव के किसानों ने गेंदे के फूलों (Marigold) की व्यापक फार्मिंग को अपनाकर अपनी किस्मत बदल ली है. आज यह गांव भीलवाड़ा ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य और आसपास के जिलों में “फूलों का गांव” के नाम से मशहूर हो चुका है.
भीलवाड़ा-उदयपुर नेशनल हाईवे-758 पर स्थित गुरला गांव से गुजरने वाले राहगीरों का ध्यान सड़क किनारे फैले रंग-बिरंगे खेतों की ओर खुद-ब-खुद खींच जाता है. गांव के खेतों में जहां तक नजर जाती है, वहां पीले गेंदे के फूलों की चादर बिछी नजर आती है. फूलों की भीनी-भीनी खुशबू से पूरा इलाका महकता रहता है. गांव की मिट्टी और अनुकूल मौसम गेंदे की खेती के लिए बेहद मुफीद साबित हो रहे हैं, जिससे यहां पैदा होने वाले फूलों की गुणवत्ता और चमक काफी बेहतरीन होती है.
बेंगलुरु और रतलाम से आते हैं उन्नत बीज, लागत कम और मुनाफा ज्यादागुरला निवासी किसान कन्हैया लाल माली ने बताया कि गांव के कई परिवार लंबे समय से गेंदे की खेती कर रहे हैं. इस फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें लागत बेहद कम आती है और बाजार में दाम बहुत अच्छे मिलते हैं. खेती के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज बेंगलुरु और रतलाम से मंगवाए जाते हैं. अनुकूल जलवायु और उन्नत किस्म के बीजों की वजह से पैदावार काफी शानदार होती है. कम लागत में अधिक लाभ मिलने के कारण अब गांव का लगभग हर परिवार इस खेती से जुड़ चुका है.
नाथद्वारा, उदयपुर और अजमेर के व्यापारी सीधे पहुंचते हैं गांवगुरला गांव में तैयार होने वाले गेंदे के फूलों की मांग पूरे साल बनी रहती है. धार्मिक आयोजनों, शादी-विवाह, त्योहारों और अन्य कार्यक्रमों के कारण नाथद्वारा, राजसमंद, उदयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ से व्यापारी सीधे गांव पहुंचकर फूलों की खरीदारी करते हैं. इसके अलावा राजस्थान से बाहर भी इन फूलों की बड़े पैमाने पर सप्लाई की जाती है. डायरेक्ट सेलिंग की वजह से किसानों को उनकी उपज का पूरा और सही मूल्य मिलता है.
फ्लोरीकल्चर का सफल मॉडल बना गुरलाफूलों की खेती ने गुरला गांव के किसानों को न केवल आर्थिक रूप से समृद्ध और मजबूत बनाया है, बल्कि युवाओं और महिलाओं को गांव में ही बेहतर रोजगार का जरिया भी दिया है. आज गुरला गांव सिर्फ एक साधारण गांव नहीं, बल्कि राजस्थान में फ्लोरीकल्चर (फूलों की खेती) का एक सफल और प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रहा है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan
First Published :
August 07, 2026, 08:09 IST



