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एम्स की स्टडी में खुलासा, स्कूल की उम्र में 5 में से एक लड़की इरेगुलर पीरियड से परेशान, गाइनेकोलॉजिस्ट ने बताया इसका निदान

Last Updated:September 24, 2026, 16:14 IST

Irregular Periods in Girls: एम्स की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि स्कूल में पढ़ने वाली 5 में से 1 लड़की अपनी अनियमित पीरियड्स से परेशान रहती हैं. स्टडी के मुताबिक इसका सटीक कारण अभी पता नहीं चला है लेकिन इस अनियमित पीरियड्स से भारी परेशानी उठानी पड़ती है. उन्हें बहुत तीव्र दर्द का सामना करना पड़ता है. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है, इसके लिए हमने बिड़ला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मुस्कान छाबड़ा से बात की.स्कूल की उम्र में 5 में से एक लड़की इरेगुलर पीरियड से परेशान, क्यों, जानें Zoomलड़कियों में अनियमित पीरियड के क्या कारण.

Irregular Periods in Girls:  एम्स ने 4000 स्कूली लड़कियों पर एक स्टडी की है. इस स्टडी में पाया गया है कि 5 में से 1 लड़की अनियमित पीरियड या माहवारी की समस्या से जूझ रही हैं. इनका पीरियड्स पिछले एक या दो साल के अंदर से शुरू हुआ था. अनियमित पीरियड्स के कारण पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम का खतरा ज्यादा रहता है जो बाद में इंफर्टिलिटी का कारण बन सकता है लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इन लड़कियों को पीसीओएस हो यह जरूरी नहीं. सर्वे में अभी यह पता लगाया जाना बाकी है कि इनमें से कितनी लड़कियां इस बीमारी से पीड़ित हैं. स्टडी में इस अनियमित पीरियड्स के कई संभावित कारण बताए गए हैं. ऐसे में हमने यह जानने की कोशिश की है कि ये अनियमित पीरियड्स आते ही क्यों हैं. क्यों रेगुलर नहीं होता. इस विषय पर न्यूज 18 डिजिटल बिड़ला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मुस्कान छाबड़ा से बात की.

इस उम्र में हार्मोन का उतार-चढ़ाव

डॉ. मुस्कान छाबड़ा ने बताया कि लड़कियों में जीवन के पहले पीरियड से लेकर अगले एक दो साल यानी अगले 20-25 पीरियड्स का अनियमित होना बेहद आम बात है. ऐसा हमेशा से होता रहा है. यह वह उम्र होती है जब लड़कियों के शरीर में कई तरह के हार्मोन और रसायनों का तेजी से उतार-चढ़ाव होता है. इसलिए इस उम्र में पीरियड्स का अनियमित होना एब्नॉर्मल नहीं है. यह बेहद आम है. लड़की के पहले पीरियड के एक-दो साल तक ब्रेन और ओवरी का एक्सेस मैच्योर नहीं हुआ रहता है. यानी अभी दिमाग और महिला प्रजनन अंगों के बीच का कॉर्डिनेशन पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ है. ऐसे में जब एक-दो साल का समय बीत जाता है तो सब कुछ ठीक होने लगता है. इसलिए इस उम्र में अनयमित महावारी को गलत नहीं समझा जा सकता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि सभी लड़कियों में ऐसा हो. कुछ लड़कियों में कुछ बीमारियां भी इसके कारण हो सकते हैं. अब सवाल है कि किस कंडीशन में माता-पिता को यह समझना चाहिए ये इरेगुलर पीरियड चिंता का विषय है और इसे अब चेक-अप कराने की जरूरत है.

टीनएज में इरेगुलर पीरियड के कारण

डॉ. मुस्कान छाबड़ा बताती हैं कि चूंकि टीनएज में लड़कियों के शरीर में हार्मोन का उतार-चढ़ाव बहुत ज्यादा होता है और शरीर के अंदरुनी तंत्र भी मैच्योर नहीं हो पाते, इसलिए इस उम्र में कई तरह के हार्मोन बढ़ जाते हैं या घट जाते हैं. शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन गर्भाशय की अंदरुनी परत को बनाता है लेकिन टीनएज में कभी एस्ट्रोजन बहुत ज्यादा बनेगा तो कभी बहुत कम. जब यह परत बिना किसी तय समय के बढ़ती या टूटती है, तो पीरियड का गैप कभी 20 दिन का हो जाता है तो कभी 45–60 दिनों का. इसी तरह टीनएज लड़कियों में कभी-कभी पुरुषों वाला टेस्टोस्टेरॉन बढ़ने लगता है जिसकी वजह से अंडा विकसित नहीं हो पाता है और यह सही समय पर रीलिज नहीं हो पाता है. इसी तरह यदि दूध बनाने वाले हार्मोन प्रोलेक्टिन जब बढ़ जाए तो यह दिमाग से निकलने वाले GnRH हार्मोन को दबा देता है. इसके दबने से अंडे को विकसित करने वाले हार्मोन LH और FSH हार्मोन नहीं बनते. इस कारण मैच्योर अंडा बनेगी ही नहीं. जब अंडा नहीं बनेगा तो एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का संतुलन बिगड़ जाएगा, जिससे पीरियड रुक जाते हैं या काफी देर से आते हैं. थायरॉयड हार्मोन भी कम-ज्यादा बनने लगे तो इससे पीरियड रुक-रुक कर या बहुत देर से आते हैं. वहीं इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण भी शरीर में शुगर और हॉर्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है जिससे ओव्यूलेशन रुक जाता है. पीसीओएस भी एक वजह हो सकती है. अगर इस उम्र में कोई लड़की बहुत ज्यादा स्ट्रेस में रहती हैं, खून की कमी है, वजन बहुत ज्यादा या बहुत कम है, तो भी पीरियड की साइकिल अनियमित हो जाती है. इसलिए हमें जांच कर देखना होगा कि अनियमित पीरियड्स के कारण क्या है.

कब चेक-अप कराने की जरूर होती है

डॉ. मुस्कान छाबड़ा ने बताया कि अगर तीन महीने तक लगातार पीरियड्स नहीं आ रहे हैं तो इसमें चेक-अप कराने की जरूरत पड़ती है. इसी तरह अगर पीरियड्स 21 दिनों से पहले ही आ जाता है या फिर दो पीरियड्स के बीच 3 महीने से ज्यादा का अंतर आ जाए तो भी चेक-अप कराने की जरूरत है. इसके अलावा पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना, ब्लीडिंग 7 दिनों से ज्यादा होना, हर घंटे में पैड बदलना, चेहरे पर बाल निकलना या कील-मुहांसे होना, छाती से दूध निकलना, वजन बढ़ जाना या वजन बहुत कम-ज्यादा हो जाना जैसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर दिखाना बहुत जरूरी है. क्योंकि इन स्थितियों में कई तरह की शारीरिक दिक्कतें हो सकती है जिनकी वजह से पीरियड्स इरेगुलर हो रहे हैं.

टीनएज में इरेगुलर पीरियड हो तो क्या करें

फिजिकल एक्टिविटी-डॉ. मुस्कान छाबड़ा बताती हैं कि अगर पहले पीरियड के एक-दो साल तक पीरियड अनियमित हो तो सबसे पहला काम गतिहीन जीवनशैली को छोड़ दें. मतलब एक ही जगह बैठे नहीं रहें कुछ न कुछ हरकत करते रहें. रोजना कुछ न कुछ एक्सरसाइज करें. खुद को एक्टिव रखें.30 से 45 मिनट हल्की-फुल्की एक्सरसाइज, योग, साइकिलिंग या वॉक जरूर करें. इससे शरीर का वजन संतुलित रहता है और इंसुलिन व हार्मोन का स्तर नियंत्रित होता है.
खान-पान की आदत सुधारें-इस उम्र में अक्सर लड़कियां गलत खान-पान की आदत डाल लेते हैं. ऐसे में सबसे पहले जंक फूड, फास्ट फूड, पैकेज्ड फूड छोड़ दें. अच्छा संतुलित लेकिन पौष्टिक भोजन करें. अत्यधिक चीनी और प्रोसेस्ड भोजन खाने से परहेज करें. अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, दालें, ड्राई फ्रूट्स, आयरन, कैल्शियम आदि पौष्टिक तत्वों से भरपूर चीजें शामिल करें ताकि पोषण की कमी न हो.
तनाव कम करें और पूरी नींद लें- डॉ. मुस्कान छाबड़ा ने बताया कि इस उम्र में अक्सर लड़कियां पढ़ाई या किसी भी छोटी बात का दबाव ले लेती हैं. यह मानसिक तनाव दिमाग से निकलने वाले हार्मोन्स को प्रभावित करता है. इसके लिए रोज 8-9 घंटे की गहरी नींद लें और मेडिटेशन या प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करें. माता-पिता को चाहिए कि इस उम्र में लड़कियों में हीन भावना को पनपने न दें.
वजन का संतुलन बनाए रखें-अचानक से बहुत ज्यादा वजन बढ़ना या कम होना दोनों ही ओवरी से अंडा रीलीज होने की प्रक्रिया को रोकते हैं. इसलिए हेल्दी बॉडी मास इंडेक्स बनाए रखना जरूरी है.अगर ज्यादा वजन बढ़ेगा तो इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ेगा. इससे पीरियड इरेगुलर होगा.
पीरियड ट्रैकिंग और खूब पानी पीना-अगर पीरियड इरेगुलर हो रहा है तो अपने पीरियड की तारीखों को किसी कैलेंडर या ऐप पर ट्रैक करना शुरू करें ताकि पैटर्न समझ आए. साथ ही दिन भर में 8-10 गिलास पानी पीकर शरीर को हाइड्रेटेड रखें, जिससे हार्मोनल फ्लो सही रहता है.
हीन भावना का शिकार न हों-टीनएज में लड़कियां एंग्जाइटी, डिप्रेशन, ईटिंग डिसऑर्डर और अपने शरीर को लेकर हीनभावना का शिकार हो सकती हैं. खासकर तब जब चेहरे या शरीर पर अत्यधिक बाल आने या वजन बढ़ने की समस्या होती है. कुछ लड़कियों को स्कूल में चिढ़ाने या बदमाशी का सामना भी करना पड़ सकता है.ऐसी स्थिति में माता-पिता को समझाना-बुझाना चाहिए. यदि खुद से बच्चों को इस तरह की परेशानियों से निपटने के लिए आवश्यक ट्रेनिंग नहीं दे सकते तो किसी साइकेट्रिस्ट से जरूर दिखाएं.
About the AuthorLakshmi Narayan

मीडिया में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता के हर विधा में माहिर हैं. भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांपने की अद्भुत कला उनके अंदर समाहि…

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September 24, 2026, 16:14 IST

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