Specialty of Khumbi| Health Benefits of Khumbi| Khumbi Market Rrice| रेगिस्तान में उगने वाली सब्जी | खुम्बी खाने के फायदे |

Last Updated:August 08, 2026, 13:24 IST
Bikaner Desi Khumbi Specialty: बीकानेर के रेतीले धोरों में मानसून की बारिश के बाद इन दिनों एक खास देसी सब्जी खुम्बी निकलने लगी है. साल में सीमित समय के लिए प्राकृतिक रूप से उगने वाली इस सब्जी का स्थानीय लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है. बारिश के बाद रेतीली जमीन में नमी पहुंचते ही खुम्बी कुछ ही समय में दिखाई देने लगती है. बाजार में इसकी आवक शुरू होते ही मांग बढ़ जाती है और यह करीब 1000 रुपए प्रति किलो तक बिक रही है. बीकानेर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लोग इसे पारंपरिक तरीके से बनाकर खाते हैं. खुम्बी का स्वाद सामान्य सब्जियों और बाजार में मिलने वाले मशरूम से अलग माना जाता है. मौसम और बारिश पर निर्भर इसकी उपलब्धता करीब 10 से 15 दिन तक रहने से इसकी कीमत और मांग दोनों बढ़ जाती हैं.
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बीकानेर. मरुस्थल में बारिश अपने साथ सिर्फ हरियाली ही नहीं लाती, बल्कि कई ऐसी प्राकृतिक सौगातें भी लेकर आती है, जिनका इंतजार स्थानीय लोगों को पूरे साल रहता है. बीकानेर के रेतीले धोरों में मानसून की बारिश के बाद इन दिनों ऐसी ही एक देसी और दुर्लभ सब्जी खुम्बी दिखाई देने लगी है. रेत से निकलने वाली यह सब्जी साल में सीमित समय के लिए ही उपलब्ध होती है. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग बढ़ जाती है और कीमत सामान्य सब्जियों के मुकाबले कई गुना अधिक पहुंच जाती है.
बीकानेर के धोरों में बारिश के बाद उगने वाली खुम्बी इसलिए सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि मरुस्थलीय जीवन और स्थानीय खान-पान से जुड़ी एक अनूठी मौसमी पहचान है. बीकानेर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बारिश के बाद धोरों और रेतीली जमीन पर प्राकृतिक रूप से उगने वाली खुम्बी को स्थानीय लोग बड़े चाव से खाते हैं. इसकी खासियत इसका अलग स्वाद और कम समय के लिए उपलब्ध होना है. बाजार में इन दिनों खुम्बी करीब 1000 रुपए प्रति किलो तक बिक रही है. स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, ताजा खुम्बी आते ही ग्राहक इसे खरीदने के लिए पहुंच जाते हैं.
बारिश की बूंदों के साथ रेत से निकलती है खुम्बी
खुम्बी की सबसे खास बात यह है कि सामान्य सब्जियों की तरह इसकी खेती नहीं की जाती. यह बारिश के बाद रेतीली जमीन में प्राकृतिक रूप से उगती है. तेज गर्मी में बीकानेर की रेत काफी गर्म हो जाती है, लेकिन मानसून की बारिश के बाद जब जमीन में नमी पहुंचती है तो कुछ ही समय में खुम्बी निकलना शुरू हो जाती है. स्थानीय जानकारों के मुताबिक, बीकानेर के आसपास के गांवों और रेतीले क्षेत्रों में इसकी उपलब्धता अधिक देखी जाती है. बारिश की स्थिति अच्छी होने पर यह कई दिनों तक निकलती रहती है. हालांकि इसकी उपलब्धता मौसम और बारिश की मात्रा पर काफी निर्भर करती है. यही कारण है कि इसे लेकर ग्रामीण इलाकों में हर साल खास उत्सुकता रहती है.
10 से 15 दिन में बढ़ जाती है मांग
खुम्बी का बाजार में आना अपने आप में एक मौसमी घटना है. सामान्य तौर पर बारिश के बाद इसकी उपलब्धता का दौर सीमित रहता है. यही इसकी कीमत और मांग दोनों को बढ़ाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, जब ताजा खुम्बी बाजार में पहुंचती है तो इसकी मांग अचानक बढ़ जाती है. कई परिवार इसे घर ले जाकर पारंपरिक तरीके से इसकी सब्जी बनाते हैं. इसका स्वाद सामान्य सब्जियों और बाजार में मिलने वाले मशरूम से अलग माना जाता है. ग्रामीण और स्थानीय लोग इसे राजस्थान की पारंपरिक देसी सब्जी के रूप में पहचानते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि अब कुछ स्थानों पर इसकी खेती या नियंत्रित तरीके से उत्पादन के प्रयास भी किए जा रहे हैं, लेकिन प्राकृतिक रूप से उगने वाली खुम्बी की मांग अलग बनी हुई है.
स्वाद के साथ पोषण का भी खजाना है खुम्बी
खुम्बी को पोषण की दृष्टि से भी उपयोगी माना जाता है. मशरूम में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद करते हैं. इसमें मौजूद पोषक तत्व प्रतिरक्षा तंत्र के सामान्य कामकाज में योगदान देते हैं. मशरूम को विटामिन डी का भी अच्छा स्रोत माना जाता है, हालांकि इसकी मात्रा प्रजाति और धूप के संपर्क पर निर्भर करती है. मशरूम में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कई अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में कम हो सकती है, लेकिन इसे वजन या ब्लड शुगर के लिए पूरी तरह सुरक्षित मानने से पहले व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति और इसे पकाने के तरीके को ध्यान में रखना जरूरी है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
August 08, 2026, 13:24 IST



