How to Identify Disease Symptoms on Crop Leaves | Measures to Protect Crops From Disease | फसल में कीटों के प्रकोप को कैसे रोकें |

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फसल की पत्तियां बदलें रंग तो हो जाएं सावधान, इन 6 संकेतों को न करें नजरअंदाज
Last Updated:August 10, 2026, 11:22 IST
Crop Disease Control Tips: खेत में फसल की पत्तियां अचानक अपना रंग और आकार बदलने लगे तो किसान को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. पीली पत्तियां जड़ों की समस्या या नाइट्रोजन की कमी, मुरझाना विल्ट या जड़ सड़न, भूरे-काले धब्बे लीफ स्पॉट और नीचे सफेद या बैंगनी फफूंद मृदुरोमिल फफूंदी का संकेत हो सकती है. वहीं पत्तियों के किनारों का सूखना पोषण या नमी की समस्या और पत्तियों का मुड़ना रस चूसने वाले कीटों के हमले का संकेत है. सही पहचान और समय पर नियंत्रण से किसान फसल के नुकसान को काफी कम कर सकते हैं.
खेत में खड़ी फसल कई बार बिना किसी आवाज के अपनी परेशानी बता देती है और उसका सबसे बड़ा संकेत पौधे की पत्तियां होती है. पत्तियों का रंग बदलना, मुरझाना, धब्बे पड़ना या नीचे फफूंद दिखाई देना किसी न किसी समस्या की ओर इशारा करता है. किसान यदि इन शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लें तो बीमारी को फैलने से रोक सकते हैं और फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है.
पत्तियां पीली पड़ना: यह पौधे की जड़ों में परेशानी का संकेत है. इसकी पहचान है कि पौधे की पत्तियां धीरे-धीरे पीली पड़ने लगती हैं, पौधे की बढ़वार कमजोर हो जाती है और नई पत्तियों का विकास भी प्रभावित दिखाई देता है. यह पौधों मेंनाइट्रोजन की कमी, खेत में अधिक पानी का जमाव या जड़ों में सड़न इसकी वजह हो सकती है. इसके उपचार के लिए किसान खेत में जल निकास की व्यवस्था सुधारें, जरूरत से ज्यादा सिंचाई से बचें, रोगग्रस्त पत्तियां हटाएं तथा गोमूत्र 3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें.
पत्तियों का मुरझाना: अगर पानी होने के बावजूद पौधा सूखने लगे तो किसान सावधान हो जाएं. इसमें शुरुआत में पत्तियां पीली दिखाई देती हैं और इसके बाद धीरे-धीरे मुरझाने लगती है. खास बात यह है कि खेत में पर्याप्त नमी या पानी होने के बावजूद पूरा पौधा कमजोर होकर झुकने लगता है और बाद में सूख भी सकता है. यह विल्ट यानी मुरझान रोग अथवा जड़ सड़न इसकी प्रमुख वजह हो सकती है. इसके बचाव के लिए प्रभावित पौधों को खेत से निकालकर नष्ट करें, पानी का जमाव न होने दें और गोमूत्र 3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें.
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पत्तियों पर भूरे-काले धब्बे: यह लीफ स्पॉट का खतरा हो सकता है. इसमें पत्तियों पर छोटे-छोटे गोल भूरे या काले धब्बे दिखाई देते हैं. समय के साथ ये धब्बे आकार में बढ़ने लगते हैं और कई बार आपस में मिलकर पत्ती के बड़े हिस्से को प्रभावित कर देते हैं. गंभीर स्थिति में पत्तियां सूखकर गिर सकती हैं। यह पत्ती धब्बा रोग यानी लीफ स्पॉट का संकेत हो सकता है. इसके उपचार के लिए संक्रमित पत्तियों को हटाएं, पौधों में उचित दूरी रखें और अधिक नमी से बचाते हुए मैनकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें.
पत्तियों के नीचे रूई जैसी फफूंदी: यह फसल में मृदुरोमिल फफूंदी की दस्तक होती है. इसमें पत्तियों की ऊपरी सतह पर अनियमित पीले या हल्के रंग के धब्बे दिखाई देते हैं, जबकि नीचे की सतह पर सफेद, मटमैली या बैंगनी रंग की रूई जैसी फफूंदी नजर आ सकती है. नमी बढ़ने पर यह समस्या तेजी से फैल सकती है. मृदुरोमिल फफूंदी का प्रमुख लक्षण माना जाता है. इसके उपचार के लिए संक्रमित पत्तियां हटाएं, खेत में हवा का आवागमन बनाए रखें, अतिरिक्त नमी से बचें और कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें.
पत्तियों का किनारों से सूखना: अगरपत्तियों का किनारों से सूखना नजर आए तो किसान पौधों के पोषक तत्व और नमी पर ध्यान दें. इसमें पत्तियों के किनारे पहले हल्के पीले दिखाई देते हैं और धीरे-धीरे भूरे होकर सूखने लगते हैं. कई बार यह समस्या पत्ती के किनारों से शुरू होकर अंदर की ओर बढ़ती दिखाई देती है. अनियमित सिंचाई, मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी, अधिक लवणता या गर्म मौसम का तनाव इसकी वजह हो सकता है. इसके उपचार के लिए मिट्टी में नमी संतुलित रखें, जरूरत के अनुसार सिंचाई करें और खेत की मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरक का उपयोग करें.
पत्तियां सिकुड़ना और मुड़न: यह कीटों के हमले का संकेत हो सकते हैं. इसमें पौधे की नई और कोमल पत्तियां सिकुड़ने, मुड़ने या अंदर की ओर लिपटने लगती है. कई बार पत्तियों की सतह पर चिपचिपा पदार्थ भी दिखाई देता है और पौधे की बढ़वार रुकने लगती है. इसके कारण माहू, सफेद मक्खी या अन्य रस चूसने वाले कीट इसका कारण हो सकते हैं. इसके उपचार के लिए खेत का नियमित निरीक्षण करें, प्रभावित पत्तियों और कीटों की पहचान करें. वहीं, उचित कीटनाशी का प्रयोग करें. शुरुआत में नियंत्रण करने पर नुकसान को काफी हद तक रोका जा जा सकता है.
First Published :
August 10, 2026, 11:22 IST



