क्या सच में फंस गए विक्रम? विदेशी बंदर के साथ रील बनाना पड़ा भारी, मलेशिया से चेन्नई तक हैं तस्करी के तार!

नई दिल्ली. साउथ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ‘चिहान’ विक्रम एक बड़े कानूनी झमेले में फंसते नजर आ रहे हैं. मामला किसी फिल्म का नहीं, बल्कि एक असली और बेहद दुर्लभ विदेशी जानवर से जुड़ा है. दरअसल, विक्रम ने अपने इंस्टाग्राम पर एक प्यारा सा वीडियो शेयर किया था, जिसमें वो एक छोटे से बेहद दुर्लभ विदेशी बंदर ‘लार गिब्बन’ के साथ खेलते और दुलार करते दिख रहे थे. वीडियो देखकर फैंस तो खुश हुए लेकिन वन्यजीव प्रेमियों के कान खड़े हो गए. विवाद बढ़ता देख विक्रम ने वीडियो तुरंत डिलीट तो कर दिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
तमिलनाडु के वन विभाग ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी. अब तमिलनाडु वन विभाग इस विदेशी गिब्बन के मालिकाना हक, उसके भारत आने और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचने की पूरी कड़ी की जांच कर रहा है.
आखिर क्यों मचा है इतना बवाल?
जिस जानवर के साथ विक्रम वीडियो में नजर आए, वह कोई आम बंदर नहीं बल्कि लार गिब्बन है. यह दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाने वाला एक एप है और इसे IUCN रेड लिस्ट में लुप्तप्राय यानी संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है. यह सीटी अपेंडिक्स आई में भी लिस्टेड है यानी दुनिया के सबसे अधिक संकटग्रस्त पशुओं में शामिल है, जिसके तहत इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बेहद कड़े प्रतिबंध लागू होते हैं. यही वजह है कि वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि यह गिब्बन भारत में कैसे आया और इसके बाद किन-किन लोगों के पास पहुंचा.
मणिपुर से शुरू हुई कहानी
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में सामने आए दस्तावेजों में पता चला है कि इस गिब्बन की कहानी मणिपुर से शुरू होती है. रिकॉर्ड में मणिपुर के स्टॉकहोल्डर लइखुराम सिंह द्वारा 2020 में 8 लार गिब्बन घोषित किए जाने का उल्लेख है. इनमें चार नर और चार मादा थे. दस्तावेजों में इनके मूल देश के तौर पर मलेशिया दर्ज था. इसके बाद इन जानवरों की कागजी यात्रा मणिपुर से इरोड और फिर चेन्नई तक पहुंचती है. 5 जून 2026 के एक फॉ़र्म I में तीन गिब्बन एक नर और दो मादा को लइखुराम सिंह से तमिलनाडु के इरोड जिले के पेरुंदुरई निवासी एसके केशवनाथन को ट्रांसफर किए जाने की जानकारी दर्ज है. इसमें ट्रांसफर का उद्देश्य ‘एडॉप्शन’ बताया गया है.
रिकॉर्ड में 3, मिले सिर्फ 2
मामला तब और पेचीदा हो गया जब वन विभाग की टीम ने इरोड स्थित परिसर का निरीक्षण किया. वहां अधिकारियों को एक नर और एक मादा गिब्बन ही मिले. इरोड के जिला वन अधिकारी केवी अप्पाला नायडू के अनुसार, केशवनाथन ने बताया कि उन्होंने तीन गिब्बन के लिए आवेदन किया था, लेकिन बाद में एक जानवर की मौत हो गई. अब वन विभाग यह सत्यापित कर रहा है कि वास्तव में उसकी मौत हुई थी या फिर उसका कहीं और बिना उचित दस्तावेज के ट्रांसफर हुआ. यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि गिब्बन किसके पास था, बल्कि यह भी है कि रिकॉर्ड में दर्ज तीसरे जानवर का क्या हुआ.
फिर चेन्नई पहुंचा गिब्बन
दस्तावेजों की अगली कड़ी चेन्नई से जुड़ती है. एक अन्य फॉर्म आई में एक नर और एक मादा लार गिब्बन के केशवनाथन से चेन्नई के इंजमबक्कम निवासी चिन्नी कृष्णा रंगनाथन को ट्रांसफर का उल्लेख है. इस दस्तावेज में ट्रांसफर का तरीका ‘खरीज’ और उद्देश्य ‘पालतू’ दर्ज किया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच में पता चला कि यह वीडियो बिजनेसमैन सी.के. रंगनाथन के आलीशान फार्महाउस पर शूट हुआ था. रंगनाथन, विक्रम की बेटी के ससुर हैं. हालांकि, इस ट्रांसफर की मंजूरी भी मुख्य वन्यजीव वार्डन से लंबित बताई गई है.
क्या वीडियो वाला गिब्बन वही है?
जांच में एक और दिलचस्प सवाल सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक, वीडियो में दिखाई देने वाला गिब्बन करीब दो से तीन साल का प्रतीत होता है. अगर उम्र का यह अनुमान सही साबित होता है तो सवाल उठता है कि क्या वीडियो में दिख रहा जानवर वही हो सकता है जिसे 2020 में घोषित किए गए आठ गिब्बनों में शामिल किया गया था? यही वजह है कि वन विभाग अब सिर्फ दस्तावेजों की जांच नहीं कर रहा, बल्कि जानवर की पहचान और उसकी पूरी हिस्ट्री को भी जोड़ने की कोशिश कर रहा है.
अब आगे क्या होगा?
वीडियो डिलीट करने से विक्रम की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं. वन विभाग अब यह जांच कर रहा है कि क्या विक्रम को पता था कि यह जानवर गैर-कानूनी है? क्या यह किसी बड़े इंटरनेशनल वाइल्डलाइफ स्मगलिंग गिरोह का हिस्सा है? अगर कागजातों में हेरफेर साबित होती है, तो विक्रम और उनके करीबियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.



