धान की पत्तियां पड़ने लगीं हैं पीली और कत्थई, तो हो सकता है खैरा रोग, जानें बचाव का तरीका

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धान की पत्तियां पड़ने लगीं पीली और कत्थई? हो सकता है खैरा रोग, जानिए बचाव
Last Updated:August 14, 2026, 06:29 IST
धान की फसल में खैरा रोग जिंक की कमी के कारण हो सकता है. इसकी वजह से पौधे छोटे और कमजोर रह जाते हैं और पत्तियों पर पीले या कत्थई धब्बे दिखाई देने लगते हैं. कृषि वैज्ञानिक के अनुसार समय रहते जिंक सल्फेट का उचित मात्रा में छिड़काव करने से जिंक की कमी दूर करने और फसल की बढ़वार सुधारने में मदद मिल सकती है.
गोंडा: धान की फसल में इस समय कई तरह के रोग और कीट लगने का खतरा रहता है. इनमें खैरा रोग किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है. यह रोग मुख्य रूप से धान के पौधों में जिंक की कमी के कारण होता है. समय रहते इसकी पहचान और सही उपचार नहीं किया गया तो पौधों की बढ़वार रुक सकती है और पैदावार पर भी असर पड़ सकता है.
पत्तियों पर दिखते हैं ये लक्षण
लोकल 18 से बातचीत के दौरान दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र गोपाल ग्राम के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरपाल सिंह ने बताया कि खैरा रोग से प्रभावित पौधे दूसरे पौधों की तुलना में छोटे और कमजोर दिखाई देते हैं. इस रोग की शुरुआत धान की पत्तियों से होती है. पौधों की निचली पत्तियों पर हल्के पीले या भूरे यानी कत्थई रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं. धीरे-धीरे इन धब्बों का रंग गहरा हो सकता है.
प्रभावित पौधों की बढ़वार सामान्य पौधों की तुलना में कम रहती है. खेत में कई जगह पौधे कमजोर और छोटे दिखाई दे सकते हैं. रोग बढ़ने पर पत्तियों के साथ-साथ पौधों की जड़ें भी भूरे रंग की दिखाई दे सकती हैं.
ज्यादा यूरिया डालने से बचें
डॉ. हरपाल सिंह के अनुसार खैरा रोग जिंक की कमी के कारण होता है. ऐसे में किसान बिना जरूरत के अधिक उर्वरक का प्रयोग न करें. खासकर यूरिया का अधिक इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट का छिड़काव किया जा सकता है.
कितनी मात्र में करें छिड़काव
हरपाल सिंह ने बताया कि एक एकड़ धान की फसल के लिए डेढ़ किलो जिंक सल्फेट 33 प्रतिशत और 2 किलो यूरिया को करीब 150 लीटर पानी में मिलाकर अच्छी तरह छिड़काव किया जा सकता है.
8 से 10 दिन बाद दोबारा करें छिड़काव
यदि पहले छिड़काव के बाद खैरा रोग के लक्षण पूरी तरह नियंत्रित नहीं होते हैं तो कृषि वैज्ञानिक की सलाह के अनुसार 8 से 10 दिन बाद दोबारा छिड़काव किया जा सकता है. इससे जिंक की कमी दूर करने में मदद मिलती है और पौधों की बढ़वार में सुधार हो सकता है.
किसानों को धान के खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए. पत्तियों पर पीले या कत्थई धब्बे और पौधों की कमजोर बढ़वार दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर रोग की पहचान और सही उपचार से फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है. उर्वरक या मिश्रण का प्रयोग कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करना बेहतर है.
About the AuthorVivek Kumar
विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…
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Gonda,Gonda,Uttar Pradesh
First Published :
August 14, 2026, 06:29 IST



