Parijat | Parijat Health Benefits | पहाड़ के ये पत्ते शरीर के लिए वरदान, त्वचा में हो रही एलर्जी से दिलाता छुटकारा, चाय की तरह कर सकते हैं सेवन

Last Updated:August 15, 2026, 12:04 IST
Parijat Health Benefits: पारिजात को पारंपरिक औषधीय उपयोगों से जोड़ा जाता है. लेकिन इसके सेवन से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है. तस्वीरों में देखें इसके विभिन्न उपयोग और सावधानियां.
पारिजात के जब पत्ते नए और कोमल होते हैं, तब स्थानीय स्तर पर इनका इस्तेमाल चाय या काढ़े के रूप में करने की परंपरा बताई जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग कुछ पत्तियों को साफ पानी से धोकर पानी में उबालते हैं और फिर इसका सेवन करते हैं. इसका स्वाद सामान्य चाय से अलग होता है. पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में पारिजात के पत्तों का जिक्र है. इसलिए इसे रोजाना बड़ी मात्रा में पीना उचित नहीं माना जाना चाहिए.
डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि पारिजात की पत्तियों को इस्तेमाल करने का एक पारंपरिक तरीका उन्हें सुखाकर रखना भी बताया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में पत्तियों को साफ करके छाया में सुखाया जाता है, पूरी तरह सूखने के बाद इन्हें पीसकर चूर्ण जैसा तैयार किया जा सकता है. स्थानीय जानकार इसे कुछ घरेलू व्यंजनों में स्वाद के लिए इस्तेमाल करने की बात बताते हैं. हालांकि, इसे सामान्य मसाले के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने से पहले इसकी पहचान और सही मात्रा की जानकारी जरूरी है.
पहाड़ों में कई पौधों की टहनियों और पत्तियों का इस्तेमाल केवल खाने या घरेलू उपचार तक सीमित नहीं रहा है. स्थानीय स्तर पर पारिजात की पत्तियों और टहनियों से झाडू जैसी चीजें तैयार करने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है. ग्रामीण इलाकों में उपलब्ध प्राकृतिक सामग्री से घरेलू जरूरत की वस्तुएं तैयार करना पहले आम बात थी. इससे बाजार से सामान खरीदने की जरूरत कम होती थी, आसपास उपलब्ध संसाधनों का उपयोग भी हो जाता था.
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पारिजात की पत्तियों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में कई पारंपरिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं. पत्तियों को पीसकर तैयार किया गया लेप त्वचा पर होने वाली कुछ परेशानियों या एलर्जी वाले स्थान पर लगाया जाता था, लेकिन यहां सावधानी जरूरी है. पारिजात की पत्तियों का लेप त्वचा की एलर्जी को ठीक करता है, इसका पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. उल्टा, किसी व्यक्ति को पौधे से ही एलर्जी हो सकती है और पेस्ट लगाने से जलन या समस्या बढ़ सकती है.
पारिजात की पहचान केवल इसकी पत्तियों से ही नहीं होती है, बल्कि इसके खूबसूरत और सुगंधित फूल भी इसे खास बनाते हैं. इसके छोटे सफेद फूलों के बीच नारंगी रंग की डंडी जैसी संरचना दिखाई देती है. फूल सामान्यतः रात में खिलते हैं और सुबह तक जमीन पर गिर जाते हैं. इसी वजह से कई स्थानों पर इसे हरसिंगार भी कहा जाता है. उत्तराखंड के पहाड़ी घरों में आंगन या बगीचे में इस तरह के सुगंधित पौधे लगाने की परंपरा रही है.
पारिजात को घर के आंगन, बगीचे या ऐसी जगह लगाया जा सकता है, जहां पर्याप्त धूप मिलती हो. पौधा लगाने के लिए पानी निकासी वाली मिट्टी बेहतर रहती है. बहुत अधिक पानी जमा रहने वाली जगह पर पौधे की जड़ों को नुकसान हो सकता है. इसे नर्सरी से स्वस्थ पौधे के रूप में लाकर लगाया जा सकता है. पौधा लगाने के बाद शुरुआती समय में नियमित सिंचाई जरूरी होती है, लेकिन मिट्टी में पानी जमा नहीं होना चाहिए. अच्छी धूप और उचित देखभाल मिलने पर पौधा धीरे-धीरे विकसित होता है.
उत्तराखंड के गांवों में बुजुर्गो के पास आसपास पाए जाने वाले पेड़-पौधों की पहचान और उपयोग से जुड़ा काफी पारंपरिक ज्ञान रहा है. कौन सा पत्ता किस मौसम में तोड़ा जाता है, कौन-सा पौधा घर के पास लगाया जाता है, किस वनस्पति का इस्तेमाल किस काम में किया जाता है, ऐसी कई जानकारियां पीढ़ियों से आगे बढ़ती रही हैं. आधुनिक समय में यह ज्ञान धीरे-धीरे कम हो रहा है.
पारिजात को पारंपरिक औषधीय उपयोगों से जोड़ा जाता है, लेकिन किसी भी पौधे को प्राकृतिक होने मात्र से पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता है. पत्तियों, फूलों या बीजों का अधिक मात्रा में सेवन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. खासकर यदि कोई व्यक्ति पहले से दवाएं ले रहा है, गर्भवती है, बच्चे को यह दिया जाना है या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, तो स्वयं उपचार करना उचित नहीं है. त्वचा पर इसका लेप लगाने की स्थिति में भी पहले थी.
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August 15, 2026, 12:04 IST



