जीभ का छाला निकला कैंसर, पटना के डॉक्टर संदीप ने तैयार की नई जीभ

पटना: जीभ पर निकला एक छोटा सा छाला अक्सर लोग मामूली चोट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. बिहार की 55 वर्षीय महिला ने भी कुछ ऐसा ही किया. जीभ के पास मौजूद नुकीले दांत से बार-बार चोट लगने के कारण छाला हुआ था, लेकिन जब एक महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी यह ठीक नहीं हुआ तो महिला राजधानी पटना स्थित जय प्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल पहुंची. शुरुआती जांच कराई गई तो रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया. यह सामान्य छाला नहीं, बल्कि जीभ का कैंसर था. बीमारी जीभ के आगे के करीब दो-तिहाई हिस्से तक फैल चुकी थी. इसको ठीक करने के लिए जीभ के प्रभावित हिस्से को काट कर हटाने की नौबत आ गई.
तंबाकू का नहीं करती थी सेवन फिर कैसे हुआ कैंसरजय प्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजी सर्जरी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि मरीज ने कभी भी तंबाकू का सेवन नहीं किया था. दरअसल, उनके जीभ के बगल में एक दांत था, जो काफी नुकीला था. इससे जीभ पर बार-बार चोट लगती थी और इसी वजह से छाला बना था. मरीज को लगा कि चोट के कारण हुआ यह छाला समय के साथ ठीक हो जाएगा, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी इसमें सुधार नहीं हुआ.
डॉ. संदीप कुमार के अनुसार, जब महिला अस्पताल पहुंचीं तो जीभ की जांच की गई. जांच में पता चला कि जीभ का आगे का करीब दो-तिहाई हिस्सा बीमारी से प्रभावित है. इसके अलावा गले में भी कुछ गांठे थी. अलग-अलग जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि बीमारी मुख्य रूप से जीभ तक सीमित है, लेकिन इसके गले की गांठों तक फैलने की आशंका थी.
सर्जरी कर प्रभावित हिस्से को किया गया अलगमामला ऑपरेशन लायक होने के कारण डॉ. संदीप कुमार की टीम ने सर्जरी को इलाज का पहला ऑप्शन चुना. ऑपरेशन से पहले मरीज और उनके परिजनों को पूरी स्थिति के बारे में बताया गया. उन्हें यह भी समझाया गया कि जीभ का बड़ा हिस्सा निकालने के बाद बोलने और खाना खाने में कुछ समय तक परेशानी हो सकती है.
डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान जीभ के प्रभावित हिस्से को जरूरी मार्जिन के साथ निकाल दिया गया. बीमारी के गले तक फैलने की आशंका को देखते हुए वहां मौजूद गांठों को भी निकाला गया ताकि ताकि कैंसर के प्रभावित हिस्से को पूरी तरह हटाया जा सके. यह सर्जरी यहीं खत्म नहीं हुई. जीभ के बड़े हिस्से को निकालने के बाद उसी ऑपरेशन के दौरान प्लास्टिक सर्जरी टीम ने जीभ का रिकंस्ट्रक्शन किया.
कलाई की स्किन और मांसपेशियों से बनाई गई नई जीभसर्जरी के दौरान मरीज की कलाई से स्किन और मांस का एक हिस्सा लेकर उसका इस्तेमाल जीभ के कटे हुए हिस्से के रिकंस्ट्रक्शन में किया गया. इस तरह कैंसर प्रभावित हिस्से को हटाने के साथ ही जीभ को दोबारा तैयार किया गया.
डॉक्टर के अनुसार, ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी अच्छी रही और करीब एक सप्ताह बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. सर्जरी के लगभग एक महीने बाद वह सामान्य तरीके से बातचीत करने और खाना-पीना करने लगी थी.
अब कीमोथेरेपी और रेडिएशनसर्जरी के बाद निकाले गए टिशू की बायोप्सी कराई गई. रिपोर्ट के आधार पर मरीज को आगे कीमोथेरेपी और रेडिएशन की आवश्यकता बताई गई. इसके बाद उन्होंने डॉक्टरों की सलाह के अनुसार पूरा इलाज कराया. करीब डेढ़ महीने के आसपास उनका रेडिएशन चला.
डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि मरीज ने उपचार का पूरा कोर्स कराया और इसके बाद लगातार फॉलोअप में रहीं. पिछले करीब दो वर्षों से वह ट्यूमर से मुक्त हैं. वह नियमित रूप से अस्पताल आती हैं और करीब हर तीन महीने पर फॉलोअप कराया जाता है. वर्तमान में वह सामान्य जीवन जी रही हैं.
छाले को नहीं करें नजरअंदाजइस मामले को लेकर डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि जीभ पर लंबे समय तक रहने वाले छाले को हल्के में नहीं लेना चाहिए. खासकर अगर कोई छाला दो से तीन सप्ताह में ठीक नहीं हो रहा है, बार-बार खून आ रहा है, दर्द बना हुआ है या उसके आकार में बदलाव हो रहा है तो एक्सपर्ट से इसकी जांच कराना जरूरी है.
डॉ. संदीप कुमार के मुताबिक, कैंसर के मामले में सही समय पर सटीक इलाज मिलना बेहद जरूरी है. बीमारी का पता लगने के बाद केवल सर्जरी कराना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सर्जरी के बाद बायोप्सी रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाता है कि मरीज को आगे कीमोथेरेपी, रेडिएशन या अन्य उपचार की जरूरत है या नहीं. इसीलिए बेहतर परिणाम के लिए मरीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूरा उपचार कराना चाहिए और नियमित फॉलोअप भी जरूरी है.



