कान में खुजली और दर्द से हैं परेशान तो न करें ये गलती, डॉक्टर ने दी जरूरी सलाह

जौनपुर: अगर आप भी कान में जमा मैल को साफ करने के लिए बार-बार कॉटन बड्स, माचिस की तीली, पिन या किसी नुकीली चीज का इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाइए. खासकर बरसात के मौसम में कान की इस तरह सफाई परेशानी बढ़ा सकती है. बारिश के दिनों में वातावरण में नमी बढ़ने से कान के अंदर फंगस और बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में कान को बार-बार कुरेदना संक्रमण का कारण बन सकता है.
कान का मैल गंदगी नहीं, प्राकृतिक सुरक्षा है
डॉ राजेश कुमार ने बताया कि कान के अंदर जमा होने वाला मैल गंदगी नहीं, बल्कि कान की प्राकृतिक सुरक्षा का हिस्सा है. यह धूल और दूसरे बाहरी कणों को रोकने में मदद करता है. सामान्य तौर पर कान खुद ही अपनी सफाई करता है, इसलिए अंदर तक कॉटन बड्स डालकर सफाई करने की जरूरत नहीं होती. कान के अंदर किसी वस्तु को डालने से बचने और केवल बाहरी हिस्से को मुलायम कपड़े से साफ करने की सलाह देता है.
बरसात में बढ़ सकता है फंगल इंफेक्शन का खतरा
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि बरसात में कान के अंदर नमी रहने पर फंगस तेजी से बढ़ सकता है. ऐसे में कान में खुजली, भारीपन, दर्द, पानी या किसी तरह का रिसाव और सुनाई देने में परेशानी हो सकती है. उन्होंने कहा कि कान की सफाई के नाम पर कॉटन बड्स या किसी नुकीली चीज को अंदर डालने से कान की त्वचा पर चोट लग सकती है और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. फंगल संक्रमण होने पर घर पर कान कुरेदने या कोई घरेलू चीज डालने के बजाय ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए.
कान को सूखा रखना है जरूरी
बरसात में खासतौर पर कान को सूखा रखना जरूरी है. नहाने या बारिश में भीगने के बाद कान के बाहरी हिस्से को मुलायम कपड़े से धीरे से पोंछें. कान के अंदर पानी या तेल डालने से बचें, खासकर तब जब डॉक्टर ने इसकी सलाह न दी हो. कान में दर्द, लगातार खुजली, सुनाई कम देना या पानी-पस जैसा रिसाव हो तो खुद से इलाज करने के बजाय चिकित्सक को दिखाना बेहतर है.
कान को कुरेदने की आदत छोड़ें
यानी अगर आप भी रोजाना कान साफ करने की आदत रखते हैं तो बरसात में इसे बदलने की जरूरत है. कान को साफ रखने के लिए अंदर तक पहुंचना जरूरी नहीं, बल्कि उसे अनावश्यक छेड़छाड़ से बचाना ज्यादा जरूरी है.



