बिना तम्बाकू खाए भी हो रहा है मुंह का कैंसर, बिहार में मिल रहे हैं काफी मरीज, समय रहते ऐसे करें पहचान

पटना: मुंह के कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में तंबाकू, गुटखा और पान मसाले की तस्वीर उभरती है. अधिकांश मामलों में यह सच भी है लेकिन तंबाकू से दूर रहने वालों को भी मुंह का कैंसर हो रहा है. बिहार में ऐसे मरीज भी सामने आ रहे हैं, जो किसी तरह के तंबाकू का सेवन नहीं करते, फिर भी मुंह के कैंसर की चपेट में आ रहे हैं. ऐसे में शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी हो जाता है.
पटना के जय प्रभा मेदांता सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजी सर्जरी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. संदीप कुमार के अनुसार, मुंह के कैंसर में जीभ, गाल के अंदरूनी हिस्से, मसूड़े, जीभ के नीचे का हिस्सा, होंठ और दांतों के पीछे का हिस्सा प्रभावित हो सकता है. इनमें जीभ और गाल के अंदरूनी हिस्से का कैंसर सबसे आम मामलों में शामिल हैं.
तंबाकू सबसे बड़ा कारण, लेकिन यही एक वजह नहींडॉ. संदीप कुमार बताते हैं कि मुंह के कैंसर का सबसे प्रमुख कारण तंबाकू है. खासकर पान, जर्दा, गुटखा और सुपारी जैसे बिना धुआं वाले तंबाकू उत्पादों का सेवन जोखिम को काफी बढ़ाता है. इसके अलावा धूम्रपान और शराब का सेवन भी मुंह के कैंसर के प्रमुख कारणों में शामिल हैं. अगर कोई व्यक्ति तंबाकू और शराब दोनों का सेवन करता है तो कैंसर का खतरा और बढ़ जाता है. डॉक्टर के मुताबिक, दोनों का असर एक-दूसरे को बढ़ाने वाला हो सकता है, इसलिए इन दोनों से दूरी बनाना बेहद जरूरी है.
बिना नशे के भी क्यों होता है कैंसर?डॉ संदीप के अनुसार जिन लोगों को तंबाकू या शराब की आदत नहीं है, उनमें भी मुंह के कैंसर का जोखिम दूसरे कारणों से भी बढ़ रहा है. दांतों की ठीक से सफाई नहीं होना और नुकीले या टूटे हुए दांतों से बार-बार किसी हिस्से में चोट लगना इसका एक कारण हो सकता है. इसके अलावा ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी भी खासकर मुंह के पिछले हिस्से और गले से जुड़े कुछ कैंसर का एक कारण हो सकता है.
2 हफ्ते से ज्यादा पुराना छाला है तो हो जाएं सावधानमुंह के कैंसर का सबसे प्रमुख शुरुआती संकेत लंबे समय तक रहने वाला छाला है. अगर मुंह में कोई छाला सामान्य इलाज के बावजूद दो सप्ताह से ज्यादा समय तक ठीक नहीं होता, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉ. संदीप कुमार के मुताबिक ऐसे मामले में मरीज को स्पेशलिस्ट डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. खासकर तब जब छाला लगातार बढ़ रहा हो.
ये लक्षण भी हो सकते हैं संकेतमुंह में ऐसा छाला जो लंबे समय तक ठीक न हो.मुंह में सफेद या लाल रंग के धब्बे बनना.खाना निगलने में परेशानी होना.आवाज में अचानक बदलाव आना.जीभ के कैंसर में जरूरत से ज्यादा लार आना.मसूड़े पर छाले के साथ दांत का अचानक ढीला होना.अचानक मुंह खुलने की क्षमता कम हो जाना.गले में गांठ महसूस होना.बीमारी बढ़ने पर लगातार या ज्यादा खांसी जैसी समस्या होना.
मसूड़े पर छाला और दांत हिल रहा है तो दांत न निकलवाएंडॉ. संदीप कुमार ने एक अहम बात बताते हुए कहा कि अगर मसूड़े पर छाले के साथ आसपास का दांत ढीला हो रहा है तो इसे सामान्य दांत की समस्या समझकर तुरंत दांत नहीं निकलवाना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि कैंसर की स्थिति में बीमारी दांत की जड़ और आसपास की हड्डी तक पहुंच सकती है. ऐसे मामले में पहले स्पेशलिस्ट से जांच कराना जरूरी है.
सफेद और लाल धब्बे भी हो सकते हैं खतरे का संकेतमुंह में बनने वाले सफेद या लाल धब्बों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉक्टर के अनुसार, कुछ मामलों में ये प्रीकैंसरस यानी कैंसर से पहले की अवस्था के संकेत हो सकते हैं. अगर इस अवस्था में बीमारी की पहचान हो जाए तो समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है और बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है.
बिहार में आने वाले कैंसर मरीजों में ओरल कैंसर अधिकडॉ. संदीप कुमार के मुताबिक, उनके पास यानी मेदांता में इलाज के लिए आने वाले कैंसर मरीजों में करीब 40 प्रतिशत मामले ओरल कैंसर के हैं. उन्होंने बताया कि भारत में दुनिया के कुल ओरल कैंसर मामलों का करीब एक-तिहाई बोझ है. बिहार और पूर्वी भारत में खासकर पुरुषों में तंबाकू का अधिक प्रचलन इसके पीछे एक बड़ी वजह है.
बचाव का सबसे आसान तरीका क्या हैमुंह के कैंसर से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि तंबाकू, गुटखा, जर्दा, पान और सुपारी जैसे उत्पादों से दूरी बनाई जाए. शराब और धूम्रपान से भी बचना चाहिए. साथ ही मुंह की साफ-सफाई का ध्यान रखना और लंबे समय तक रहने वाले किसी भी छाले, सफेद या लाल धब्बे और मुंह खुलने में परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉक्टर का कहना है कि मुंह के कैंसर में जितनी जल्दी बीमारी की पहचान होती है, इलाज उतना ही आसान रहता है. इसलिए मुंह में कोई भी असामान्य बदलाव दो सप्ताह से ज्यादा समय तक बना रहे तो खुद से इलाज करने के बजाय विशेषज्ञ से जांच कराना सबसे जरूरी कदम है.



