Maharashtra hostel ghost news: हॉस्टल में अचानक हंसने और रोने लगीं छात्राएं…भूत के डर से 600 छात्रों ने छोड़ी आदिवासी आश्रमशाला

महाराष्ट्र के अमरावती स्थित डोमा आदिवासी आश्रमशाला में उस वक्त सन्नाटा पसर गया जब 600 छात्र-छात्राएं इस छात्रावास को छोड़कर अपने-अपने घर चले गए. हाल ही में 16 छात्राओं के अचानक हंसने और फिर अचानक रोने से हॉस्टल में भूत की अफवाह फैल गई और डर के चलते छात्रों में हड़कंप मच गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में आदिवासी छात्रों ने अपने-अपने घरों का रुख कर लिया. फिलहाल छात्रों को मनाने की कोशिशें चल रही हैं.
बता दें कि कुछ दिन पहले ही अमरावती की इसी आदिवासी आश्रमशाला में 6 छात्राओं को करैत नाग ने डस लिया था. जिसमें तीन छात्राओं की जान चली गई थी. वहीं अब मेलघाट के चिखलदरा तहसील स्थित डोमा आदिवासी आश्रमशाला में छात्राओं पर भूतबाधा आने की अफवाह से सनसनी फैल गई है. डर के चलते करीब 600 विद्यार्थी छात्रावास छोड़कर अपने-अपने घर चले गए हैं.
भूत बाधा के डर से 600 छात्रों ने छोड़ा आदिवासी स्कूल का हॉस्टल.
जानकारी के मुताबिक हॉस्टल में मोह के पेड़ की कहानी भी फैली हुई है. ज्यादातर छात्राओं को उसके बारे में जानकारी है. संत गाडगेबाबा और राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज की धरती पर अंधविश्वास के इस साए को हटाने के लिए महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने जागरुकता अभियान शुरू कर दिश है. साथ ही प्रशासन ने भी अपील की है कि हॉस्टल में कोई भूत नहीं है बल्कि सिर्फ अफवाह है, इसलिए डरें नहीं.
क्या हुआ था? छात्रावास की अधीक्षिका उज्ज्वला इंगले ने बताया कि करीब सात से आठ दिन पहले डोमा स्थित आदिवासी आश्रमशाला की 16 छात्राएं अचानक हंसने और रोने लगीं. कुछ छात्राओं ने घुंघरुओं जैसी आवाजें सुनाई देने की बात भी कही. छात्रावास की अधीक्षिका के संज्ञान में मामला आने के बाद उन्होंने इसकी जानकारी मुख्याध्यापक को दी.
हालांकि, अगले ही दिन यह खबर पूरे गांव में फैल गई और छात्राओं को भूतबाधा होने की अफवाह जोर पकड़ने लगी. देखते ही देखते डर का माहौल बन गया और करीब 600 से अधिक विद्यार्थी छात्रावास छोड़कर अपने-अपने गांव चले गए.
हालांकि मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम भी आश्रमशाला पहुंची. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह भूतबाधा का मामला नहीं, बल्कि मानसिक तनाव से जुड़ी हिस्टीरिया जैसी स्थिति हो सकती है.
फिलहाल छात्राओं और उनके अभिभावकों की काउंसलिंग की जा रही है. वहीं, महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की नंदिनी जाधव और डॉ. प्रवीण देशमुख भी मुंबई से डोमा पहुंचे हैं और छात्राओं की काउंसलिंग कर रहे हैं.
कितने छात्र पढ़ते हैं? डोमा स्थित इस आदिवासी आश्रमशाला में करीब 810 विद्यार्थी पढ़ते हैं, जबकि आवासीय आश्रमशाला में लगभग 310 छात्राएं रहती हैं. छात्राओं की काउंसलिंग कर उन्हें दोबारा स्कूल लाने के प्रयास किए जा रहे हैं. यह जानकारी आश्रमशाला के मुख्याध्यापक संजय चौधरी ने दी.
क्या बोलीं, हंसने-रोने वाली छात्राएं?
जिन छात्राओं के साथ कथित तौर पर भूतबाधा होने की बात कही जा रही है, उन्होंने भी इस पूरे मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. एक छात्रा ने बताया कि करीब एक साल पहले भूत की फिल्म देखने के बाद से इस तरह की घटनाओं की चर्चा शुरू हुई थी जो अब यहां तक पहुंच गई.
वहीं टोमा गांव के सरपंच सुनील उईके ने बताया कि कुछ वर्ष पहले इस आदिवासी आश्रमशाला में नया छात्रावास बनाया गया था. बताया जा रहा है कि यहां एक मोह का पेड़ था, जिसे बाद में काट दिया गया. इसके बाद यह अफवाह फैल गई कि उस पेड़ से जुड़ा कोई भूत यहां घूमता है. हालांकि, इस बात में कोई तथ्य नहीं है.
इसके साथ ही अमरावती जिले के सांसद बलवंत वानखड़े ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने विद्यार्थियों से डरने के बजाय हिम्मत रखने और किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास न करने की अपील की है.
छात्रावास की ओर से कहा गया कि यहां भूत के अस्तित्व का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. इसके बावजूद भूतबाधा की अफवाह ने आदिवासी छात्राओं और विद्यार्थियों में डर का माहौल पैदा कर दिया है.फिलहाल आवासीय आदिवासी आश्रमशाला में एक भी छात्रा वापस नहीं लौटी है. ऐसे में प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की ओर से छात्राओं और उनके अभिभावकों की काउंसलिंग की जा रही है.
प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की जा रही है कि वे डर और अफवाहों पर विश्वास न करें, स्कूल वापस लौटें और अपनी शिक्षा जारी रखें.



