Vaishali Express Guard Missing Chair। Missing Guard Seat Railway Incident। गायब हुई गार्ड की सीट… 1 घंटे खड़ी रही ट्रेन, बुजुर्ग का रेलवे को हिला डाला

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गायब हुई गार्ड की सीट… 1 घंटे खड़ी रही ट्रेन, बुजुर्ग का रेलवे को हिला डाला
Last Updated:August 18, 2026, 18:20 IST
Railway Guard Missing Chair Controversy: 100 km/h से दौड़ने वाली वैशाली एक्सप्रेस अचानक गोरखपुर में थम गई क्योंकि गार्ड भैया के डिब्बे से कुर्सी ही नदारद थी. फिर क्या था, 59 साल के गार्ड ने बजा दिया बिगुल, “कुर्सी नहीं तो ट्रेन भी नहीं चलेगी. 1 घंटे से ज्यादा ट्रेन रुकी रही और यात्री इंतजार में बैठे रहे. अंत में जब प्लास्टिक की कुर्सी मिली तब जाकर ट्रेन मूव हुई. पूरी इनसाइड स्टोरी जानिए.रेलवे की तरफ से इस घटना पर सफाई भी दी गई. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
क्या भारतीय रेलवे में अब एक अदद कुर्सी के लिए भी जंग लड़नी पड़ेगी? नई दिल्ली से जा रही वैशाली एक्सप्रेस जब सोमवार की सुबह गोरखपुर जंक्शन पर थमी तो किसी ने नहीं सोचा था कि अगले 1 घंटे से ज्यादा का डिले किसी तकनीकी खराबी, घने कोहरे या सिग्नल की वजह से नहीं बल्कि सिर्फ एक गायब कुर्सी के चलते होने वाला है. ट्रेन के पहिए थम गए, पैसेंजर्स हैरान-परेशान प्लेटफॉर्म पर टहलने लगे और उधर 59 साल के ट्रेन मैनेजर (गार्ड) रामाशिश दास ने सिस्टम के आगे घुटने टेकने से साफ इनकार कर दिया. 100 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से दौड़ती ट्रेन, 8 घंटे से ज्यादा की थकाऊ ड्यूटी और बैठने के लिए कोई फिक्स्ड सीट नहीं. जब अफसरों ने कहा कि ऐसे ही ले जाओ तो दास ने सीधे कहा नो वे, सेफ्टी फर्स्ट. फिर क्या था, प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर वो हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हुआ जिसकी गूंज सीधे वाराणसी से लेकर सोनपुर रेल मंडल तक सुनाई दे गई.
कुर्सी नहीं तो ड्यूटी नहीं
न्यू दिल्ली-ललितग्राम वैशाली एक्सप्रेस पहले से ही 31 मिनट लेट होकर सुबह 9:48 बजे गोरखपुर पहुंची थी. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार यहां जब रामाशिश दास ने गार्ड कोच का चार्ज संभाला तो देखा कि बैठने के लिए कोई फिक्स्ड सीट ही नहीं है. उन्होंने तुरंत स्टेशन अथॉरिटीज को इंफॉर्म किया और प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर ट्रेन रोक दी.• पुराने वाले भैया एडजस्ट कर गए: दास ने बताया कि उनसे पहले वाले ट्रेन मैनेजर तो पावर कार में बैठकर किसी तरह निकल गए थे, लेकिन दास ने कोई रिस्क नहीं लिया. उन्होंने कोच की फोटो खींची, वाराणसी और सोनपुर डिवीजन को मैसेज डाला और स्टेशन सुपरिटेंडेंट को मेमो थमा दिया.• प्लास्टिक की कुर्सी से काम चलाया: गोरखपुर में बात नहीं बनी तो रेलवे स्टाफ ने कहा कि आगे देवरिया में इंतजाम करेंगे. देवरिया पहुंचने पर उन्हें एक प्लास्टिक की चेयर दी गई.
एक कुर्सी और घंटों का डिलेइस पूरे कुर्सी कांड की वजह से ट्रेन गोरखपुर से ही 1 घंटे 9 मिनट की देरी से रवाना हुई. इसके बाद तो जो डिले का सिलसिला शुरू हुआ वो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था:
• देवरिया सदर: 82 मिनट लेट• सीवान: 74 मिनट लेट• छपरा: 67 मिनट लेट• सोनपुर: 77 मिनट लेटमुजफ्फरपुर: 78 मिनट लेट
59 की उम्र में प्लास्टिक कुर्सी? रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके 59 साल के दास ने सीधे सवाल उठाया कि क्या इतनी लंबी और स्पीड वाली यात्रा के लिए प्लास्टिक की कुर्सी सही जुगाड़ है? उन्होंने याद दिलाया कि कुछ साल पहले भी गोरखपुर में फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक) गायब होने पर उन्होंने ट्रेन रोक दी थी. उनका कहना बड़ा सिंपल था, “अगर रास्ते में कुछ गड़बड़ हो जाती तो ब्लेम मेरे सिर आता. इसलिए जिम्मेदारी लेना जरूरी है.”
घटना पर रेवले का जवाबपूर्वोत्तर रेलवे (NER) के CPRO सुमित कुमार ने टीओआई को बताया कि इस मामले को ऑफिशियली ईसीआर (ECR) के सामने उठाया गया है. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सीट की जिम्मेदारी कैरिज एंड वैगन डिपार्टमेंट की होती है. खैर, पैसेंजर्स के कुछ मिनट भले ही एक्स्ट्रा खर्च हो गए लेकिन ट्रेन मैनेजर दास ने साबित कर दिया कि जब बात सेफ्टी और अपने हक की हो, तो नो कॉम्प्रोमाइज.
Location :
Gorakhpur,Gorakhpur,Uttar Pradesh
First Published :
August 18, 2026, 18:15 IST



