Jaipur News I बदलते तापमान के बीच गेहूं-जौ की नई किस्मों पर जोर, जयपुर में देश-विदेश के वैज्ञानिक जुटे

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सम बदला तो खेती भी बदलेगी, गेहूं-जौ को लेकर जयपुर में वैज्ञानिकों की बड़ी बैठक
Last Updated:August 19, 2026, 13:23 IST
बदलते मौसम और बढ़ते तापमान के बीच गेहूं-जौ की खेती को नई दिशा देने के लिए जयपुर में देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिक जुटे हैं. दुर्गापुरा में तीन दिवसीय राष्ट्रीय वैज्ञानिक बैठक में जलवायु अनुकूल किस्मों, उत्पादन बढ़ाने, रोग-कीट प्रबंधन, AI, रिमोट सेंसिंग और किसानों की आमदनी बढ़ाने वाली तकनीकों पर मंथन किया जा रहा है.
जयपुर. राजस्थान में गेहूं और जौ की खेती को बदलते मौसम के अनुरूप ढालने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिक जयपुर आए है. श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर की अधीनस्थ इकाई राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (रारी), दुर्गापुरा में सभी देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिक एक जगह हुए हैं. यहां 18 से 20 अगस्त तक गेहूं एवं जौ अनुसंधान से जुड़ी तीन दिवसीय राष्ट्रीय वैज्ञानिक बैठक आयोजित की जा रही है. बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और विभिन्न शोध संस्थानों के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे.
दरअसल, तापमान में लगातार बदलाव और मौसम की अनिश्चितता का सीधा असर गेहूं-जौ जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादकता पर पड़ रहा है. ऐसे में वैज्ञानिकों के सामने ऐसी किस्में विकसित करने की चुनौती है, जो कम अवधि में तैयार होने के साथ अधिक उत्पादन दे सकें और बदलती जलवायु का सामना भी कर सकें. बैठक में इसी दिशा में चल रहे अनुसंधान और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी.
रोग-कीट से लेकर बीज उत्पादन तक बनेगी रणनीति
राष्ट्रीय बैठक में गेहूं और जौ की उत्पादकता बढ़ाने के साथ रोग एवं कीट प्रबंधन पर भी मंथन होगा. वैज्ञानिक गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, उन्नत किस्मों के विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े उपायों पर अपने अनुभव साझा करेंगे. खेती में पानी और अन्य संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के साथ ऐसी तकनीकों पर भी चर्चा होगी, जिनसे उत्पादन लागत कम करते हुए किसानों को अधिक आर्थिक लाभ मिल सके.
खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रिमोट सेंसिंग की एंट्री
इस बैठक में पारंपरिक कृषि अनुसंधान के साथ आधुनिक तकनीक भी चर्चा के केंद्र में रहेगी. कृषि में डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिमोट सेंसिंग और प्रिसिजन एग्रीकल्चर के इस्तेमाल की संभावनाओं पर वैज्ञानिक विचार साझा करेंगे. इन तकनीकों के जरिए फसल की स्थिति की निगरानी, रोग-कीट की समय रहते पहचान और खेत में जरूरत के मुताबिक संसाधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा.
पुराने शोध की समीक्षा, नए कार्यक्रमों की बनेगी रूपरेखा
बैठक में अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं के तहत हुए कार्यों और उपलब्धियों की समीक्षा भी की जाएगी. इसके आधार पर आगामी वर्षों के लिए अनुसंधान कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार होगी. इसका उद्देश्य गेहूं-जौ की खेती से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों का समाधान तलाशना और विकसित तकनीकों को प्रयोगशालाओं से निकालकर खेतों तक पहुंचाना होगा. श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलगुरु प्रो. डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि राजस्थान में इस राष्ट्रीय बैठक का आयोजन प्रदेश के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए बड़ा अवसर है. इससे गेहूं-जौ अनुसंधान में राजस्थान की भूमिका और मजबूत होगी. इससे नई तकनीकों को विकसित कर उन्हें किसानों तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी. माना जा रहा है कि बैठक में लिए जाने वाले शोध संबंधी फैसलों का लाभ आने वाले समय में गेहूं-जौ उत्पादक किसानों को मिल सकता है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Jaipur,Rajasthan
First Published :
August 19, 2026, 13:23 IST



