टीम इंडिया का नया हथियार, IPL का मोह छोड़ रेड बॉल को थामा, चंद्रकांत पंडित ने सारांश जैन को ऐसे बनाया टेस्ट क्रिकेटर

कोलंबो. भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने वाले 320वें खिलाड़ी बने सारांश जैन का सफर खुद पर अटूट भरोसा और कड़ी मेहनत की एक प्रेरणादायक मिसाल है. उन्होंने लाल गेंद के क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी को धार देने के लिए इंडियन प्रीमियर लीग के बड़े अनुबंध और अवसरों तक को छोड़ दिया था. मध्य प्रदेश में जैन के कोच चंद्रकांत पंडित को अपने शिष्य के साथ हुई बातचीत याद है जिससे वह इस खिलाड़ी से काफी प्रभावित हुए थे.
चंद्रकांत पंडित ने ‘पीटीआई’ से कहा, ‘‘पिछले सत्र में उसने मुझसे कहा था कि वह अपने लाल गेंद के खेल पर ध्यान देना चाहता है. वह इसे लेकर बिल्कुल स्पष्ट था। ऐसा नहीं है कि वह सफेद गेंद से गेंदबाजी नहीं करना चाहता था या उसमें उसकी रुचि नहीं थी, लेकिन वह अपनी लाल गेंद की गेंदबाजी पर काम करना चाहता था.’
सारांश जैन को टेस्ट क्रिकेटर बनाने में चंद्रकांत पंडित का अहम रोल है.
जैन को यहां श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में पदार्पण कराया गया. उनके साथ पंडित की यह बातचीत आईपीएल 2024 के दौरान हुई थी। जैन उस समय कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के नेट गेंदबाज के रूप में जुड़े हुए थे, लेकिन वह इस भूमिका को जारी नहीं रखना चाहते थे. पंडित ने 2020 में मध्य प्रदेश की टीम की कोचिंग शुरू की थी. उन्होंने बताया, ‘उस समय उसने कहा था कि नेट गेंदबाज के तौर पर सफेद गेंद के साथ समय बिताने के बजाय वह लाल गेंद के खेल पर काम करना पसंद करेगा. इसके बाद वह राज्य की टीम का खिलाड़ी बन गया.’
हालांकि पंडित को पूरा विश्वास है कि जैन सफेद गेंद के प्रारूप में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘उसके पास दोनों प्रारूपों में खेलने के लिए अच्छा कौशल है. मुझे भरोसा है कि अगर अगले आईपीएल सत्र में कोई फ्रेंचाइजी उसे चुनती है तो वह वहां भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे.’
पंडित ने कहा, ‘लेकिन वह नेट गेंदबाज के रूप में दो महीने सफेद गेंद से गेंदबाजी करने में समय नहीं बिताना चाहते थे. मुझे बहुत अच्छा लगा कि उसने लगातार अपने लाल गेंद के खेल पर काम किया. जब वह हमारी राज्य टीम के लिए खेलते हैं, तब वह सफेद गेंद से भी अच्छी गेंदबाजी करते हैं. इसलिए, यह उनके लिए शायद सिर्फ शुरुआत है.’
जब पंडित ने करीब छह साल पहले मध्य प्रदेश के कोच का पद संभाला था, तब जैन नियमित खिलाड़ी नहीं थे. पंडित ने कहा, ‘जब मैं पहली बार आया था, उस समय वह टीम में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. पर्याप्त मैच खेलने का मौका नहीं मिलने से उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ था. मुझे उनसे बात करनी पड़ी और उन्हें भरोसा दिलाना पड़ा कि वह चयन जैसी दूसरी चीजों की चिंता किए बिना खुलकर खेलें.’
लेकिन पंडित ने जैन जैसे खिलाड़ी पर ध्यान क्यों दिया, इस पर उन्होंने बताया, ‘हरभजन और अश्विन के दौर के बाद हमारे पास अभी कोई ऐसा विशेषज्ञ ऑफ-स्पिनर नहीं है. जैन मुझे ऐसे खिलाड़ी लगे जो उच्चतम स्तर पर खेल सकते हैं और उन्हें सिर्फ समर्थन की जरूरत थी. इसलिए मैंने उनसे बात की, उनकी मानसिकता को समझा और उनका भरोसा जीतने की कोशिश की.’
पंडित का ध्यान जैन की एक और खासियत ने आकर्षित किया और वो थी ‘राउंड द विकेट‘ गेंदबाजी करने की उनकी क्षमता. आमतौर पर ऑफ-स्पिनर इस तरह से गेंदबाजी नहीं करते. उन्होंने कहा, ‘सारांश इकलौते ऐसे गेंदबाज हैं जिन्हें मैंने ‘राउंड द विकेट’ गेंदबाजी करते देखा है. मेरा मतलब है कि मैंने ऐसा कोई ऑफ-स्पिनर नहीं देखा जो पहली ही गेंद ‘राउंड द विकेट’ से शुरू करता हो. हर गेंदबाज का अपना तरीका होता है और उनका भी अपना तरीका है.’ पूर्व भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज पंडित ने कहा, ‘लेकिन ‘राउंड द विकेट’ गेंदबाजी के मामले में सारांश सबसे अलग गेंदबाज हैं जिन्हें मैंने देखा हैण् हाल में मैंने कई राज्य स्तर के स्पिनरों को उनकी शैली की नकल करते हुए देखा है.’



