Sikar News: सदियों से जलाभिषेक का असर, शिवलिंग में बना 2 इंच गहरा गड्ढा, जानिए क्यों खास है खानेश्वर महादेव

सीकर. राजस्थान के शेखावाटी अंचल में आस्था और रहस्य से जुड़ी कई ऐसी जगहें हैं, जिनकी कहानियां आज भी लोगों को हैरान करती हैं. उदयपुरवाटी कस्बे के पास धनावता में स्थित खानेश्वर महादेव मंदिर भी ऐसी ही जगह है. यहां शिवलिंग पर सदियों से जलाभिषेक किए जाने की मान्यता है. खास बात यह है कि लगातार जल चढ़ने से शिवलिंग के ऊपरी हिस्से में करीब दो इंच गहरा गड्ढा बन गया है. आमतौर पर जी शिवलिंग के खंडित होने के बाद उसे मंदिर से हटा दिया जाता है, वहीं इस जगह पर ऐसा नहीं है. शिवलिंग का खंडित होना ही इस मंदिर को खास बनाती है. शिवलिंग पर बने दो इंच के गहरे गड्ढे के कारण ही इस मंदिर का नाम खानेश्वर महादेव मंदिर पड़ा है.
खानेश्वर महादेव मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसका प्राचीन इतिहास है. महंत शंकर दास महाराज के अनुसार, इस मंदिर का अस्तित्व उदयपुरवाटी कस्बे की बसावट से भी पुराना है. यानी जिस इलाके में आज शहर और आबादी नजर आती है, वहां कभी घना जंगल वाला क्षेत्र था. उसी दौर से यहां भगवान शिव की पूजा किए जाने की लोकमान्यता चली आ रही है. हालांकि इस मंदिर से जुड़ा कोई प्राचीन शिलालेख उपलब्ध नहीं है, लेकिन पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताएं इस स्थान को खास बनाती हैं.
पानी की बूंदों ने पत्थर पर छोड़ दी आस्था की कहानी
मंदिर में पहुंचते ही सबसे ज्यादा ध्यान जिस बात पर जाता है, वह है शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा. यहां जलाभिषेक के दौरान चढ़ाया जाने वाला पानी एक स्थान पर एकत्र होता है. भक्तों का मानना है कि वर्षों नहीं, बल्कि सदियों से लगातार जल चढ़ने के कारण शिवलिंग में करीब दो इंच गहरा गड्ढा बन गया. श्रद्धालुओं के लिए यह निशान भगवान शिव की भक्ति में बीते अनगिनत वर्षों की कहानी है.
कभी दो भक्त बैठते थे, अब करोड़ों का भव्य धाम
स्थानीय लोगों के मुताबिक, खानेश्वर महादेव का मूल मंदिर बेहद छोटा था. एक समय ऐसा था जब मंदिर के अंदर केवल दो लोग ही मुश्किल से बैठकर पूजा कर पाते थे. समय बदला और श्रद्धालुओं की आस्था के साथ मंदिर का स्वरूप भी बदलता गया. भामाशाहों और भक्तों के सहयोग से करोड़ों रुपए की लागत से मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार कराया गया. परिसर में भगवान आदिदेव शिव की विशाल प्रतिमा भी स्थापित की गई है, जो यहां आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है.
यहां शिव परिवार नहीं, तपस्या वाले स्वरूप की मान्यता
खानेश्वर महादेव की एक और बात इसे दूसरे शिव मंदिरों से अलग बनाती है. यहां शिवलिंग के साथ नंदी महाराज की प्रतिमा विराजमान है. महंत शंकर दास महाराज के अनुसार, इसे भगवान शिव के विवाह से पूर्व के तपस्वी स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि उस समय भगवान शिव कठोर तपस्या में लीन थे. इसी कारण पहले यहां गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमाएं नहीं थीं. हालांकि बाद में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर दी गई.
राजा टोडरमल और पारसमणि की कहानी भी जुड़ी
मंदिर से जुड़ी लोककथाओं में राजा टोडरमल का नाम भी आता है. मान्यता है कि राजा भगवान शिव के अनन्य उपासक थे. उनकी कठोर साधना से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें इसी क्षेत्र में पारसमणि का वरदान दिया था. आज खानेश्वर महादेव मंदिर में आस्था, इतिहास और लोककथाएं एक साथ दिखाई देती हैं.



