Inspirational Story | Bharatnatyam Classes

Last Updated:August 26, 2026, 15:30 IST
Jodhpur 9 Year Old Devanshi Bharatnatyam : जोधपुर की 9 साल की देवांशी चांडक भरतनाट्यम से बेटियों को प्रेरित कर रही हैं. वह इंडियन कल्चर को घर-घर पहुंचाना चाहती हैं. भरतनाट्यम नृत्यांगना देवांशी चांडक अपनी प्रस्तुतियों के दौरान उत्कृष्ट कलात्मक क्षमता का प्रदर्शन कर चुकी हैं.
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पाली. क्या आपको लगता है कि आज की जेनरेशन सिर्फ वेस्टर्न कल्चर को फॉलो करती है? तो आपको राजस्थान के जोधपुर की रहने वाली 9 साल की देवांशी चांडक से मिलना चाहिए. जो इन दिनों राजस्थान भर में बेटियों को भरतनाट्यम के प्रति प्रेरित करने का काम कर रही हैं. देवांशी पाली में भी बेटियों को इसके गुर सिखा रही हैं. माता-पिता से प्रेरित होकर देवांशी ने भरतनाट्यम में वह मुकाम हासिल किया है, जो बड़ों के लिए भी आसान नहीं होता.
उनका अगला लक्ष्य खुद की एकेडमी खोलना और इंडियन कल्चर को घर-घर तक पहुंचाना है. आइए, इस नन्ही प्रतिभा के जज्बे को सलाम करें. भरतनाट्यम नृत्यांगना देवांशी चांडक अपनी प्रस्तुतियों के दौरान उत्कृष्ट कलात्मक क्षमता का प्रदर्शन कर चुकी हैं. उन्होंने मंच पर लगभग 150 प्रकार के एक्सप्रेशन्स और 12 से अधिक भाव-भंगिमाओं का प्रदर्शन कर अपनी अभिव्यक्ति क्षमता का लोहा मनवाया है.
संवेदनशील अभिनय और मंच पर जीवंतताप्रस्तुति के दौरान देवांशी पौराणिक प्रसंगों, विशेष रूप से द्रौपदी चीर-हरण जैसे संवेदनशील दृश्य को अपने अभिनय से जीवंत कर देती हैं. उनकी भावाभिव्यक्ति और सधे हुए कदमों की गति दर्शकों को भावुक कर देती है. उनके प्रदर्शन के दौरान अक्सर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता है.
अपनी एकेडमी खोलकर ट्रेनिंग देना मेरा उद्देश्यदेवांशी चांडक कहती हैं कि 9 साल की कड़ी तपस्या के बाद इस तरह की उपाधि मिलना बहुत खुशी का पल होता है. भरतनाट्यम एक इंडियन क्लासिकल डांस है. शुरुआत में मेरी मां ने मुझे इसे सीखने के लिए मोटिवेट किया था. उनसे मिली प्रेरणा के बाद मैंने इसे अपने दिल में उतार लिया. इसे सीखने का मेरा उद्देश्य यही था कि आगे चलकर अपनी एक एकेडमी खोलूं और बच्चों को इसके प्रति प्रेरित करूं. इंडियन कल्चर को बढ़ावा देना ही मेरा उद्देश्य है.
भारत की पुरानी कला को संजोकर रखना जरूरीदेवांशी के बड़े भाई विकास चांडक का कहना है कि मेरी छोटी बहन ने 9 साल तक इसे सीखा और इस कला को इस कदर अपने दिल में उतारा कि आज वह सभी के लिए एक मिसाल बन चुकी है. मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करना और भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने का भाव रखना अपने आप में सराहनीय है. आगे जाकर भरतनाट्यम को मेरी बहन और ऊंचाइयों तक पहुंचाए और जगह-जगह अपनी कला का प्रदर्शन करे, यही हम सभी की भावना है. भारत की इस प्राचीन कला को संजोकर रखना नई पीढ़ी का भी काम है.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
August 26, 2026, 15:30 IST



