1 लाख में फर्जी BPEd डिग्री; SOG के जाल में आया दलाल दीपक शर्मा, PTI भर्ती 2022 केस में बड़ा खुलासा

जयपुर. जयपुर में फर्जी डिग्री केस में SOG की एक और कार्रवाई, दलाल दीपक शर्मा गिरफ्तार. PTI भर्ती परीक्षा 2022 से जुड़े मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच का दायरा यूनिवर्सिटी से लेकर फर्जी डिग्री दिलाने वाले दलालों तक पहुंच गया है.
राजस्थान में फर्जी डिग्री और डिप्लोमा के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के मामलों पर SOG लगातार कार्रवाई कर रही है. इसी कड़ी में अब फर्जी डिग्री और डिप्लोमा दिलवाने वाले एक और कथित दलाल दीपक शर्मा को गिरफ्तार किया गया है. SOG की यह कार्रवाई PTI भर्ती परीक्षा 2022 से जुड़े फर्जी दस्तावेजों के मामले में हुई है. जांच में पहले ही कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अब इस पूरे नेटवर्क की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं.
ओपीजेएस यूनिवर्सिटी से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में यह अहमSOG के मुताबिक गिरफ्तार किया गया दीपक शर्मा फर्जी डिग्री गैंग के भंडाफोड़ के लिए किए गए डिकॉय ऑपरेशन में वांछित था. उस पर फर्जी डिग्री और डिप्लोमा उपलब्ध कराने में दलाली करने का आरोप है. यह कार्रवाई चूरू की OPJS यूनिवर्सिटी से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में भी अहम मानी जा रही है. दलाल सुभाष पूनियां के खिलाफ दर्ज FIR नंबर 13/2024 से भी इस मामले का संबंध बताया गया है.
डिकॉय ऑपरेशन में सामने आया था दीपक का नामSOG लंबे समय से फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के जरिए सरकारी भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों और उन्हें मदद पहुंचाने वाले लोगों की जांच कर रही है. इसी दौरान फर्जी डिग्री गैंग तक पहुंचने के लिए डिकॉय ऑपरेशन भी किया गया था. इस कार्रवाई में दीपक शर्मा का नाम सामने आया और वह SOG की तलाश में था. अब उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि उसने कितने लोगों को फर्जी डिग्री या डिप्लोमा उपलब्ध कराए और इसके बदले कितनी रकम ली गई. जांच का फोकस उन लोगों तक पहुंचने पर भी है जो अभ्यर्थियों, दलालों और यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों के बीच कड़ी का काम कर रहे थे.
एक लाख रुपए में मिलती थी BPEd की फर्जी डिग्री
SOG की जांच में यह भी सामने आया है कि BPEd की कथित फर्जी डिग्री एक लाख रुपए में उपलब्ध कराई जाती थी. PTI भर्ती परीक्षा 2022 से जुड़े मामलों में शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच के दौरान कई गड़बड़ियां सामने आईं. इसी के बाद SOG ने अलग-अलग मामलों में FIR दर्ज कर जांच तेज की. फर्जी डिग्री और डिप्लोमा का मामला सिर्फ एक यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं रहा. जांच की कड़ियां राजस्थान से बाहर मध्य प्रदेश तक पहुंच चुकी हैं. एक मामले में मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंस के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है.
कुलपति, परीक्षा नियंत्रक और कंप्यूटर ऑपरेटर गिरफ्तारPTI भर्ती परीक्षा 2022 से जुड़े एक अन्य मामले में SOG अब तक श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी के कुलपति मुकेश तिवारी, परीक्षा नियंत्रक संजय राठौड़ और कंप्यूटर ऑपरेटर आनंद शर्मा को गिरफ्तार कर चुकी है. यह मामला अभ्यर्थी भारमल राम के खिलाफ दर्ज FIR नंबर 80/2024 से जुड़ा है. जांच में भारमल राम के दस्तावेज फर्जी पाए जाने की बात सामने आई थी. बताया गया कि भर्ती के लिए फॉर्म भरते समय OPJS यूनिवर्सिटी, चूरू का नाम लिखा गया था, लेकिन दस्तावेज श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी से जुड़े लगाए गए थे. इसी गड़बड़ी के बाद जांच की दिशा बदल गई और SOG यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों तक पहुंची. अब तीनों आरोपियों की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद उन्हें फिर कोर्ट में पेश किया जाएगा. SOG इस दौरान फर्जी डिग्री तैयार करने की पूरी प्रक्रिया और इसमें शामिल लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है.
दलाल से यूनिवर्सिटी तक पहुंची जांचदीपक शर्मा की गिरफ्तारी के बाद SOG की जांच में एक और अहम कड़ी जुड़ गई है. एक तरफ चूरू की OPJS यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले की जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ सीहोर की श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो चुकी है. PTI भर्ती परीक्षा 2022 से जुड़े इन मामलों ने यह सवाल खड़ा किया है कि फर्जी डिग्री का नेटवर्क आखिर कितना बड़ा है और कितने अभ्यर्थियों ने ऐसे दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भर्ती प्रक्रिया में जगह बनाने की कोशिश की. SOG अब दलालों, अभ्यर्थियों और यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों के बीच के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है.
आईजी अजयपाल लांबा ने दी जानकारीSOG के IG अजयपाल लांबा ने इस मामले और संगठित अपराध से जुड़ी कार्रवाई को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी. फर्जी डिग्री मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियों से साफ है कि जांच अभी खत्म नहीं हुई है. दीपक शर्मा की गिरफ्तारी के बाद आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों तक SOG की जांच पहुंच सकती है.



