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चीन ने कैंसर की सबसे पावरफुल दवा बनाने का किया दावा, कहा AstraZeneca की दवा से बहुत आगे, क्या होगी आगे की राह

Last Updated:August 27, 2026, 18:06 IST

Most Powerful Cancer Drug: सबसे खतरनाक कैंसर में से एक बाइलरी ट्रैक्ट कैंसर के इलाज के लिए चीनी कंपनी अकेसो ने सबसे पावरफुल दवा बनाने का दावा किया है. अकेसो ने दावा किया है कि तीसरे चरण के ट्रायल में दवा इवोनससिमैब ने एस्ट्राजेनेका की दवा इम्फिंजी से बेहतर प्रदर्शन किया है. यह दावा अमेरिका और यूरोपीय कंपनियों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है लेकिन अगर सच में अकेसो के दावे में दम है तो यह दुनिया के लिए बेहद शानदार खबर है.चीन ने कैंसर की सबसे पावरफुल दवा बनाने का किया दावा, कहा AstraZeneca से आगेZoomचीनी कंपनी असेको की कैंसर दवा.

Most Powerful Cancer Drug: करीब 100 से ज्यादा तरह के कैंसर होती हैं और इन सब के लिए अलग-अलग तरह की दवा काम करती है. पेट में के अंदर बाइलरी ट्रैक्ट कैंसर को बेहद घातक कैंसर माना जाता है. इसके ठीक होने की दर बहुत कम है. इसके लिए ब्रिटेन-स्वीडन की मशहूर बायोटेक कंपनी एस्ट्राजेनेका AstraZeneca दवा बनाती है जिसका नाम है इम्फिंजी. अब तक बाइलरी ट्रैंक्ट कैंसर में इम्फिंजी को सबसे पावरफुल दवा मानी जाती है. लेकिन अब चीन की बायोफार्मा कंपनी अकेसो Akeso ने दावा किया है कि इसी तर्ज पर उसने बाइलरी ट्रैक्ट कैंसर की ऐसी दवा बनाई है जो एस्ट्रजेनेका की दवा से ज्यादा पावरफुल है. तीसरे चरण के ट्रायल में इसका शानदार रिजल्ट सामने आया है जो यह साबित करता है कि अकेसो कंपनी की दवा इवोनसिमैब Ivonescimab ज्यादा पावरफुल है. इसका सीधा मतलब है कि चीन की दवा कंपनी अकेसो ने कैंसर की बेहत ताकतवर दवा बनाकर दुनिया में अपना दबदबा कायम करने की कोशिश कर रहा है.

कैसे काम करती है यह दवा

दरअसल, अकेसो कंपनी की दवा इवोनसिमैब भी एस्ट्राजेनेकी की दवा इंफिंजी की तरह ही काम करती है. इंफिजी इम्यूनोथेरेपी दवा है. कैंसर के लिए आमतौर पर कीमोथेरेपी की जाती है. लेकिन कीमोथेरेपी में कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ हेल्दी कोशिकाएं भी खत्म होने लगती है. यह बहुत बड़ी चुनौती है क्योंकि इससे कभी-कभी शरीर के महत्वपूर्ण अंग खराब हो जाते हैं. लेकिन एस्टाजेनेका की इंफिजी दवा इम्यूनोथेरेपी पर आधारित है. इसमें दवा खुद कैंसर कोशिकाओं को नहीं मारती बल्कि शरीर की इम्यूनिटी को इस तरह ट्रेंड करती है कि वह कैंसर कोशिका के झांसे में नहीं फंसती और उसे मार देती है. हमारे शरीर में किसी भी बाहरी हमले या गलत कोशिकाओं के बनने पर हमारे लिंफ में मौजूद टी कोशिका उसे आसानी से मार देती है लेकिन कैंसर कोशिका बहुत ढीठ होती है. यह अपनी सतह पर PD-L1 नामक प्रोटीन का ढाल बना लेती हैं. इससे टी कोशिका को यह भ्रम होता है कि यह हेल्दी कोशिका है. लेकिन एस्ट्रजेनेका की इम्फिंज़ी इस PD-L1 प्रोटीन का नकाब उतारकर उसे ब्लॉक कर देती है जिससे कैंसर का सुरक्षा कवच टूट जाता है और इसके बाद टी कोशिका आसानी से कैंसर कोशिका को अपना शिकार बना लेता है. माना जा रहा है कि चीनी कंपनी अकेसो की दवा इवोनसिमैब भी इसी तरह काम करती है लेकिन ज्यादा प्रभावी तरीके से करती है.

तीसरे चरण में 682 मरीजों पर परीक्षण 

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक अकेसो की दवा इवोनसिमैब का तीसरे चरण का ट्रायल पित्त वाहिनी के कैंसर के मरीजों पर किया गया. इसमें 682 मरीजों को शामिल किया गया. इसमें एक समूह को इवोनोसिमैब के साथ कीमोथेरेपी दी गई जबकि दूसरे समूह को एस्ट्रजेनेका की इंफिंजी के साथ कीमोथेरेपी दी गई. परीक्षण में पाया गया कि अकेसो की दवा लेने वाले मरीज, एस्ट्राजेनेका की दवा लेने वाले मरीजों की तुलना में ज्यादा समय तक जीवित रहे. अकेसो की संस्थापक और सीईओ डॉ. शिया यू के अनुसार यह इस दवा की पेट और पाचन तंत्र से जुड़े कैंसर में पहली बड़ी सफलता है. इससे भविष्य में अन्य प्रकार के सॉलिड ट्यूमर या कैंसर के इलाज का रास्ता भी खुल सकता है. यह दवा पहले से ही फेफड़ों के कैंसर के इलाज के लिए चीन में मंजूर हो चुकी है और अमेरिका में इसकी मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है. कंपनी अब इसका परीक्षण आंतों के कैंसर और गले या गर्दन के कैंसर पर भी कर रही है.

वैश्विक दवा कंपनियों को चुनौती

चीन की दवा कंपनी अकेसो के इस नए दावे ने वैश्विक जगत की अन्य कैंसर बनाने वाली कंपनियों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है. अब तक मर्क, मोडर्ना और एस्ट्राजेनेका कंपनी की कैंसर की इम्यूनोथेरेपी वाली दवा का पूरी दुनिया में दबदबा है. वैश्विक स्तर पर इम्यूनोथेरेपी कैटगरी की दवा कीट्रुडा Keytruda को सबसे सफल और प्रभावी दवाओं में गिना जाता है. इसे अमेरिकी दिग्गज फार्मास्यूटिकल कंपनी मर्क बनाती है. इसका जेनरिक वर्जन भी मार्केट में उपलब्ध है. वहीं एस्ट्राजेनेका इम्फिंजी भी पूरी दुनिया में इस्तेमाल होती है. ब्रिटिश-स्वीडिश कंपनी एस्ट्राजेनेका ने पिछले साल इंफिजी की बिक्री से 6 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की कमाई की थी, जो पिछले साल की तुलना में 28% अधिक थी.पर अब चीन की बायोफार्मा कंपनियां अब एस्ट्राजेनेका जैसी वैश्विक दवा कंपनियों से सीधे मुकाबला करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं. विश्लेषकों का मानना है कि अगर आगे की नियामकीय प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी होती है, तो फेज-3 ट्रायल की सफलता के बाद अकेसो चीन में बाइलरी ट्रैक्ट कैंसर के इलाज के लिए इवोनोसिमैब को बाजार में जल्दी उतार सकती है.

About the AuthorLakshmi Narayan

मीडिया में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता के हर विधा में माहिर हैं. भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांपने की अद्भुत कला उनके अंदर समाहि…

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August 27, 2026, 18:04 IST

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