भाई की लंबी उम्र के लिए बहन रखती है उपवास; द्वार पर ‘भात’ लेकर पहुंचता है भाई, आखिर क्या है ‘वीर फूली’?

पाली. आपने अक्सर तीज, करवाचौथ या अहोई अष्टमी पर महिलाओं को अपने पति या संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखते सुना होगा. लेकिन मारवाड़ की पावन धरा पर एक ऐसा भी पर्व है, जो पूरी तरह भाइयों की लंबी उम्र और उनकी रक्षा को समर्पित है. जी हां, रक्षाबंधन से ठीक पहले आने वाले विशेष वार पर मनाया जाने वाला ‘वीर फूली पर्व’. पाली जिले के सोमेसर सहित निम्बाड़ा, बूसी, टेवाली, जवाली और आसपास के तमाम ग्रामीण इलाकों में वीर फूली पर्व पूरे हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया.
मान्यता है कि इस दिन बहनें अपने भाई की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए उपवास रखती हैं, जिससे भाइयों पर आने वाला हर संकट टल जाता है. इस पर्व की सबसे खूबसूरत बात यह है कि बहनें दिनभर व्रत रखती हैं और शाम को भाई अपनी भाभी के साथ ढेरों पकवान और मिठाइयां लेकर बहन के घर ‘भात’ भरने पहुंचते हैं, जिसके बाद ही बहनें अपना व्रत खोलती हैं.
सोमेसर में उत्साह से मनाया जाता है त्यौहारसोमेसर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक ‘वीर फूली’ पर्व श्रद्धा, उल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया. रक्षाबंधन से पूर्व विशेष वार के अनुसार आयोजित होने वाले इस पर्व पर बहनों ने अपने भाइयों की लंबी आयु, सुखी जीवन और संकटों से रक्षा के लिए दिनभर व्रत रखा.
भात भरकर खुलवाया व्रतमान्यता है कि वीर फूली का व्रत रखने से भाई पर आने वाले संकट टल जाते हैं. इस अवसर पर भाइयों ने अपनी बहनों के घर ‘भात’ भरकर उनका उपवास खुलवाया. भाइयों और भावज ने तरह-तरह के पकवान तैयार कर बहन को भेंट किए. कई बहनों ने भाइयों के घर पहुंचकर तो कई भाइयों ने बहन के घर मिठाइयां और भोजन पहुंचाकर इस पावन परंपरा को निभाया.
प्रेम और सौहार्द का प्रतीकवीर फूली पर्व पारस्परिक प्रेम, सुख-समृद्धि और भाईचारे का अनूठा प्रतीक है. सोमेसर के अलावा निम्बाड़ा, बूसी, टेवाली, सोडावास, भादरलाऊ, इंदरवाड़ा, देवली पाबूजी, सावलता, जवाली और खोंड सहित आसपास के सभी गांवों में इस पर्व की खासी रौनक देखने को मिली.
क्या है पर्व का पूरा महत्ववीर फूली पर्व पर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और सुखी जीवन की मंगल कामना के लिए उपवास रखती हैं. भाई और भाभी अपनी बहन (ननद) का व्रत खोलने के लिए विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर भात लेकर बहन का व्रत खोलते हैं. ऐसा करने से भाई पर किसी प्रकार का संकट नहीं आता. वीर फूली का यह पावन पर्व सुख-समृद्धि, प्रेम, सौहार्द्र, भाईचारा और अपनत्व का प्रतीक है. इसी तरह सोमेसर सहित निम्बाड़ा, बूसी, टेवाली, सोडावास, सापूनी, प्रतापगढ़, भादरलाऊ, गुड़ाजेतसिंह, रूंगड़ी, इंदरवाड़ा, डुठारिया, देवली पाबूजी, सावलता आदि गांवों में भी भाई-बहनों ने वीर फूली पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया.



