‘टेस्ट क्रिकेट को आज भी मदर ऑफ क्रिकेट कहते हैं…’ सुन लो वैभव सूर्यवंशी, श्रीनाथ अंकल क्या कह रहे

नई दिल्ली. क्रिकेट की दुनिया में इन दिनों चौकों-छक्कों की आंधी और टी-20 के रोमांच का दबदबा ऐसा है कि हर युवा खिलाड़ी की पहली पसंद आईपीएल और शॉर्ट फॉर्मेट ही बनता जा रहा है. ऐसे दौर में जब खेल पूरी तरह से कमर्शियल हो चुका है, तब भारतीय क्रिकेट के महान तेज गेंदबाज और आईसीसी मैच रेफरी जवागल श्रीनाथ की एक दो टूक सलाह ने खेल प्रेमियों और युवा क्रिकेटर्स को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) के इंदौर में आयोजित सीजन अवार्ड 2025-26 समारोह में शिरकत करने पहुंचे जवागल श्रीनाथ (Javagal Srinath) ने साफ शब्दों में कहा कि क्रिकेट को बेचा नहीं जाना चाहिए, बल्कि उसे सिखाया जाना चाहिए. उनका यह बयान उन तमाम उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी सीख है जो सिर्फ आईपीएल के ग्लैमर और शॉर्टकट सफलता की चमक में अपनी असली बुनियाद को भूलते जा रहे हैं.
जवागल श्रीनाथ ने युवा खिलाड़ियों को दिया मैसेज.
टेस्ट क्रिकेट ही क्रिकेट की असली आत्मा और गहराई हैजवागल श्रीनाथ ने टेस्ट क्रिकेट को क्रिकेट की असली आत्मा बताते हुए इसे ‘मदर ऑफ क्रिकेट’ का दर्जा दिया है. उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर यह स्पष्ट किया कि टी-20 या आईपीएल जैसे टूर्नामेंट अपनी जगह ठीक हैं, लेकिन अगर किसी खिलाड़ी को क्रिकेट के खेल में गहराई यानी डेप्थ चाहिए, तो वह सिर्फ 5 दिन के लंबे फॉर्मेट से ही मिल सकती है. उन्होंने एक बेहद अहम तकनीकी और मानसिक पहलू पर रोशनी डालते हुए कहा कि शॉर्ट फॉर्म क्रिकेट खेलने वाला खिलाड़ी जरूरी नहीं कि टेस्ट क्रिकेट में भी उतनी ही आसानी से ढल जाए, लेकिन जिस खिलाड़ी ने टेस्ट क्रिकेट की भट्टी में खुद को तपाया है, वह किसी भी फॉर्मेट में अपनी चमक बिखेर सकता है. टी-20 में रन बनाना और विकेट लेना आसान लग सकता है, लेकिन असली परीक्षा 5 दिन की सहनशक्ति, तकनीक और मानसिक एकाग्रता में ही होती है.
वैभव सूर्यवंशी के रिकॉर्ड और उनका बढ़ता दायराबिहार के लाल वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) ने बेहद कम उम्र में अपने खेल और रिकॉर्ड्स से जिस तरह तहलका मचाया है, उसने हर किसी को हैरान किया है. महज़ 14 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखने वाले इस युवा बल्लेबाज ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से कम समय में ही बड़ा मुकाम हासिल किया है. रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू मुकाबलों में उनके नाम कई शानदार पारियां दर्ज हैं, जहां उन्होंने अपनी तकनीक और बड़े शॉट खेलने की क्षमता का लोहा मनवाया है. आईपीएल के मंच पर भी उनकी एंट्री और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में उनके तेवर ने यह साबित कर दिया है कि वे आधुनिक दौर के सबसे खतरनाक युवा टैलेंट में से एक हैं. हालांकि, जवागल श्रीनाथ की यह चेतावनी उनके जैसे रिकॉर्डधारी युवा खिलाड़ी के लिए एक आईना है कि टी-20 और आईपीएल की चमक के बीच अपने फर्स्ट क्लास और लाल गेंद के क्रिकेट के सफर को मजबूत रखना ही उनके लंबे करियर की असल गारंटी बनेगा.
वैभव सूर्यवंशी के लिए क्या है श्रीनाथ की इस सलाह का मायनेजब इस बात को आधुनिक दौर के सबसे चर्चित युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो श्रीनाथ की यह सलाह और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है. बिहार की माटी से निकलकर महज 14-15 साल की उम्र में अपनी तूफानी बल्लेबाजी से पूरी दुनिया का ध्यान खींचने वाले वैभव सूर्यवंशी ने जिस कम उम्र में आईपीएल जैसे बड़े मंच और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा है, उनके लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि लंबा करियर कैसे बनता है. जवागल श्रीनाथ ने इस बात पर खास जोर दिया कि शॉर्ट फॉर्म क्रिकेट में ग्लैमर बहुत ज्यादा है, जिसके कारण आज के युवा इसकी तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, जो कि स्वाभाविक भी है. लेकिन अगर किसी खिलाड़ी को 10 से 15 साल का लंबा और शानदार इंटरनेशनल करियर बनाना है, तो उसे टेस्ट क्रिकेट को अपना मुख्य आधार बनाना ही होगा. छोटे फॉर्मेट में खिलाड़ियों का चयन जितनी जल्दी होता है, उतनी ही तेजी से उनका रोटेशन या बाहर होना भी तय माना जाता है. ऐसे में स्थायित्व केवल पारंपरिक क्रिकेट से ही मिल सकता है.
जवागल श्रीनाथ की यह सीख कंपास की तरह हैश्रीनाथ ने अपने संबोधन में माता-पिता, कोच और क्रिकेट एसोसिएशन की भूमिका पर भी जोर दिया. उनका मानना है कि यह इन सभी की जिम्मेदारी है कि वे उभरते हुए खिलाड़ियों को सही दिशा दिखाएं. वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ियों के लिए यह एक खुला संदेश है कि उनकी प्रतिभा अद्भुत है, उनकी टाइमिंग और शॉट्स में दम है, लेकिन मॉडर्न क्रिकेट के शोरगुल के बीच अपनी तकनीक को मजबूत रखने के लिए लाल गेंद के क्रिकेट यानी रणजी ट्रॉफी और टेस्ट मुकाबलों से दूरी नहीं बनाई जा सकती. शॉर्ट फॉर्मेट के इस दौर में जहां हर कोई रातों-रात स्टार बनना चाहता है, वहीं जवागल श्रीनाथ की यह सीख एक कंपास की तरह है जो बताती है कि चमकती हुई रोशनी के पीछे असली ऊर्जा और ताकत टेस्ट क्रिकेट की पिचों से ही आती है. यदि वैभव और उनके जैसे अन्य युवा इस सलाह को आत्मसात कर लें, तो वे ना सिर्फ आईपीएल के सितारे बनेंगे बल्कि भारतीय क्रिकेट के लंबे इतिहास में अपनी ऐसी अमिट छाप छोड़ेंगे जो पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी.



