Rajasthan

सीकर में मानसून की बेरुखी, सावन में 4 साल की सबसे कम बारिश, फसलों पर मंडराया संकट

सीकर. सावन में अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के लिए इस बार मानसून के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2026 में सावन के दौरान अब तक औसत बारिश महज 101.77 एमएम दर्ज हुई है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे कम है. इसके मुकाबले 2025 में सावन में 226.44 एमएम, 2024 में 268.05 एमएम, 2023 में 268.76 एमएम और 2022 में 171.06 एमएम बारिश हुई थी. यानी पिछले साल की तुलना में इस बार सावन की बारिश करीब 125 एमएम कम है.

सीकर जिले में मानसून सीजन 15 जून से 15 सितंबर तक करीब 92 दिनों का माना जाता है. इसमें से 71 दिन बीत चुके हैं, लेकिन 25 अगस्त तक जिले में कुल बारिश करीब 300 एमएम ही पहुंची है. सामान्य औसत 535 एमएम के मुकाबले यह आंकड़ा करीब 235 एमएम कम है. पिछले वर्षों में इसी अवधि में 2022 में 282 एमएम, 2023 में 387 एमएम, 2024 में 535 एमएम और 2025 में 535 एमएम बारिश दर्ज हुई थी. ऐसे में इस बार बारिश का आंकड़ा बीते वर्षों की तुलना में स्पष्ट रूप से पिछड़ा हुआ है.

बारिश के मामले में सीकर ग्रामीण सबसे पीछे

ब्लॉकवार आंकड़े भी बारिश के असमान वितरण की तस्वीर दिखाते हैं. 15 जून से 25 अगस्त तक नीमकाथाना में 2023 में 484 एमएम, 2025 में 411 एमएम और 2026 में जिले में सर्वाधिक 258 एमएम बारिश दर्ज हुई. वहीं 2022 में सीकर शहर में 229 एमएम और 2024 में रींगस में 413 एमएम सबसे अधिक बारिश हुई थी. दूसरी ओर सीकर ग्रामीण लगातार दूसरे वर्ष सबसे कम बारिश वाला क्षेत्र रहा. 2026 में यहां महज 47 एमएम और 2025 में 84 एमएम बारिश दर्ज हुई. 2024 में नेछवा में 110 एमएम, 2023 में रींगस में 121 एमएम और 2022 में खंडेला में 109 एमएम सबसे कम बारिश हुई थी.

बांधों में आवक नहीं, फसलों पर बढ़ा संकट

पिछले साल जुलाई में अच्छी बारिश के कारण रायपुर पाटन, कोट, कोटड़ी, भूदोली और हरिपुरा सहित कई बांधों में पानी की आवक हुई थी. इस बार स्थिति इसके बिल्कुल उलट है और एक भी बांध में बहुत कम पानी की आवक हुई है. करीब एक पखवाड़े से बादलों की आवाजाही और उमस के बावजूद पर्याप्त बारिश नहीं होने से बाजरा, मूंगफली और दलहन जैसी फसलों में नमी की कमी दिखाई देने लगी है. किसान अब फसलों को बचाने के लिए कुओं से सिंचाई करने को मजबूर हैं.

15 सितंबर तक बारिश नहीं तो बांध रहेंगे खाली

सिंचाई विभाग के एक्सईएन नथमल खेदड़ ने बताया कि इस बार पिछले सालों की तुलना में जिले में काफी कम बारिश दर्ज की गई है. यही वजह है कि जल स्रोतों और बांधों में पानी की आवक नगण्य रही है. उन्होंने बताया कि इस यदि 15 सितंबर तक मानसून की यही स्थिति बनी रहती है, तो जिले के अधिकांश बांध खाली रह सकते हैं.

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