Raksha Bandhan Special NEET Success Story: फौजी के बच्चों का कमाल, नीट पास कर पहले बहन ने रची मिसाल, फिर भाई को एम्स में मिला एडमिशन

नई दिल्ली (Raksha Bandhan Special NEET Success Story). सपनों को उड़ान भरने के लिए सिर्फ पंखों की नहीं, बल्कि अपनों के अटूट विश्वास की भी जरूरत होती है. कोटा के कोचिंग कल्चर के बीच अलवर के सांगवान परिवार की यह कहानी इसी विश्वास की जीती-जागती मिसाल है. आर्मी में तैनात पिता राजेश सांगवान जब सीमा पर देश की सेवा कर रहे थे, तब उनकी बेटी अनुजा और बेटा गौरव सांगवान कोटा में अपने सपनों की नींव रख रहे थे.
ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में जब बड़ी बहन अनुजा मेडिकल की तैयारी के लिए कोटा गईं तो मां सीमा देवी और भाई गौरव भी उनके साथ आ गए. अनुजा ने 2023 में पहले ही प्रयास में नीट में 640 अंक हासिल किए. उन्हें अलवर का ESIC मेडिकल कॉलेज मिला, लेकिन उनका दिल दिल्ली AIIMS के लिए धड़कता था. रैंक थोड़ी कम रह गई, जिससे उनका यह सपना अधूरा रह गया. लेकिन अनुजा ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने इस अधूरे सपने की मशाल अपने छोटे भाई गौरव के हाथों में थमा दी.
बहन की नाकामयाबी बनी भाई की प्रेरणा
अनुजा जब एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थीं, तब उन्होंने अपने भाई गौरव को केवल पढ़ाई का लक्ष्य ही नहीं दिया, बल्कि उसके लिए हर दिन एक मजबूत ढाल बनीं. अनुजा जानती थीं कि दिल्ली एम्स का माहौल और वहां की पढ़ाई का स्तर क्या होता है. इसलिए उन्होंने गौरव को शुरू से ही टॉपर्स वाली सोच और अनुशासन के साथ ढालना शुरू कर दिया था. इस पूरे सफर में वह गाइड की तरह गौरव सांगवान के साथ खड़ी रहीं.
अलवर से कोटा तक, फोन पर हर दिन क्लास
एमबीबीएस की कठिन पढ़ाई के बीच भी अनुजा रोजाना फोन पर गौरव की दिनभर की पढ़ाई का हिसाब लेती थीं. गौरव ने क्या पढ़ा, कहां अटका, कितना रिवीजन किया- हर छोटी-बड़ी बात पर उनकी नजर रहती थी. छुट्टियों में वे सीधे कोटा पहुंचती थीं, जिससे भाई की कमजोरियों पर काम कर सकें. उन्होंने न अपनी पढ़ाई प्रभावित होने दी और न ही गौरव की तैयारी में कोई कमी आने दी.
एक ही कमरे से शुरू हुआ सफलता का सफर
बचपन से ही दोनों भाई-बहन की बॉन्डिंग बहुत खास रही है. अनुजा को 10वीं में 95% और 12वीं में 97% अंक मिले थे, जबकि गौरव ने 10वीं में 92% और 12वीं में 90% अंक हासिल किए. कोटा में दोनों एक ही कमरे में बैठकर घंटों पढ़ाई करते रहते थे. गौरव सांगवान अपनी बहन को देर रात तक पढ़ते देख खुद भी मेहनत करने के लिए प्रेरित होते थे.
ऑल इंडिया 9वीं रैंक और रक्षाबंधन का तोहफा
अनुजा ने गौरव के लिए टाइमलाइन और स्टडी प्लान बनाया था, जिसे वह आंख मूंदकर फॉलो करते थे. नतीजा यह हुआ कि गौरव ने नीट में ऑल इंडिया 9वीं रैंक हासिल कर ली. जिस दिल्ली AIIMS में जाने का सपना बहन ने देखा था, आज गौरव उसी कैंपस के एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन ले चुके हैं. रक्षाबंधन से ठीक पहले मिला एडमिशन बहन के लिए दुनिया का सबसे बड़ा तोहफा बन गया.
आगे NEET PG में भी जारी रहेगी यह जोड़ी
अनुजा फिलहाल एमबीबीएस के चौथे साल में हैं. वहीं गौरव अपने पहले साल की शुरुआत AIIMS दिल्ली से कर रहे हैं. अनुजा का कहना है कि मेडिकल की पढ़ाई आसान नहीं होती, लेकिन वे आगे भी अपने भाई को गाइड करती रहेंगी. इससे गौरव NEET PG जैसी कठिन परीक्षाओं में भी सफलता का झंडा गाड़ सकेंगे. वहां भी बहन का अनुभव उनके बहुत काम आएगा.



