CM Vijay News | Tamilnadu Politics: CM विजय की कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा, क्या जाएगी कुर्सी? DMK के वार के बाद HC पहुंचे थलापति, लगाई गुहार

तमिलनाडु की राजनीति में जबसे सी. जोसेफ विजय मुख्यमंत्री बने हैं तबसे हलचल मची हुई है. मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के प्रमुख विजय की चुनावी जीत को लेकर कानूनी लड़ाई मद्रास हाईकोर्ट पहुंच चुकी है. मामला सिर्फ चुनावी जीत हार का नहीं है. DMK के प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार एस. इनिगो इरुदयराज ने विजय की जीत को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दाखिल की है. इसमें चुनाव प्रचार में बच्चों की कथित भागीदारी समेत कई आरोप लगाए गए हैं. अब विजय ने भी इस याचिका के खिलाफ कोर्ट में बड़ा कानूनी पलटवार किया है. मुख्यमंत्री की ओर से मद्रास हाईकोर्ट में ‘रिजेक्ट द प्लेंट’ आवेदन दाखिल कर याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने की मांग की गई है. उनकी दलील है कि प्रचार में बच्चों की कथित मौजूदगी अपने आप में ऐसा कानूनी आधार नहीं बनती, जिसके जरिए चुनाव परिणाम रद्द किया जा सके.
विजय की ओर से दाखिल आवेदन पर जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन के सामने सुनवाई हुई. उनके वकीलों ने Representation of the People Act, 1951 यानी जनप्रतिनिधित्व कानून का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव याचिका में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बच्चों की कथित भागीदारी किस तरह कानून की धारा 100 के तहत चुनाव रद्द करने का आधार बनती है. विजय की टीम ने यह भी तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को यह बताना जरूरी है कि कथित चुनावी गतिविधियों का नतीजे पर वास्तविक और ठोस असर कैसे पड़ा. अब अदालत 31 अगस्त को इस आवेदन को आधिकारिक रूप से सूचीबद्ध करेगी. इसके बाद तय होगा कि चुनाव याचिका पर आगे सुनवाई होगी या मामला शुरुआती चरण में ही खत्म हो जाएगा.
बच्चों के प्रचार में इस्तेमाल को लेकर क्या है विवाद?
DMK उम्मीदवार एस. इनिगो इरुदयराज ने विजय की चुनावी जीत को चुनौती देते हुए कई आरोप लगाए हैं. इनमें चुनाव प्रचार में बच्चों की कथित भागीदारी भी शामिल है. विजय की कानूनी टीम ने इस आरोप को चुनाव रद्द करने के लिए पर्याप्त आधार मानने से इनकार किया है. उनका कहना है कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश या Model Code of Conduct में बच्चों की भागीदारी से जुड़े प्रावधान होने भर से चुनाव अपने आप रद्द नहीं किया जा सकता.
विजय की टीम ने अदालत के सामने कहा कि चुनाव याचिका में ऐसे ठोस तथ्य नहीं दिए गए हैं, जिनसे यह साबित हो कि कथित गतिविधियों ने चुनाव परिणाम को वास्तव में प्रभावित किया. उनका तर्क है कि केवल यह कहना कि मतदाता भावनात्मक रूप से प्रभावित हुए, पर्याप्त नहीं है. इसके लिए ठोस सबूत और चुनाव नतीजे पर कथित प्रभाव से जुड़ी स्पष्ट जानकारी जरूरी है.
विजय ने याचिका के कानूनी आधार पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री की ओर से दाखिल आवेदन में कहा गया है कि Representation of the People Act की धारा 100 में चुनाव रद्द करने के लिए निर्धारित कानूनी आधार हैं. विजय के वकीलों का दावा है कि याचिकाकर्ता बच्चों के कथित इस्तेमाल और चुनाव रद्द करने के बीच जरूरी कानूनी संबंध स्थापित करने में विफल रहे हैं. इसी आधार पर उन्होंने याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने की मांग की है.
विजय की टीम ने यह भी कहा कि चुनाव परिणाम पर कथित असर को साबित करने के लिए ठोस सामग्री होनी चाहिए. सिर्फ सामान्य या अनुमान आधारित आरोप पर्याप्त नहीं हो सकते. अदालत अब इस बात पर विचार करेगी कि चुनाव याचिका आगे ट्रायल के लिए जाती है या नहीं.
चुनावी खर्च और धार्मिक भावनाओं के इस्तेमाल के आरोप भी खारिज
विजय ने चुनाव प्रचार में कथित तौर पर तय सीमा से ज्यादा खर्च और धार्मिक भावनाओं के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों को भी चुनौती दी है. उनकी ओर से कहा गया कि इन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त विशिष्ट तथ्य नहीं दिए गए हैं. याचिकाकर्ता ने कथित बयानों, संचार या घटनाओं से जुड़ी सटीक जानकारी भी पर्याप्त रूप से सामने नहीं रखी है.
चुनावी खर्च को लेकर विजय के वकीलों ने एक और अहम दलील दी. उनका कहना है कि TVK के पदाधिकारियों या कार्यकर्ताओं की ओर से स्वतंत्र रूप से किया गया खर्च उम्मीदवार के व्यक्तिगत चुनावी खर्च की सीमा में अपने आप नहीं जोड़ा जा सकता. इसके लिए ठोस और प्रासंगिक सामग्री जरूरी होगी.
31 अगस्त को होगी अगली अहम सुनवाई
जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने मद्रास हाईकोर्ट रजिस्ट्री को विजय के ‘रिजेक्ट द प्लेंट’ आवेदन को नंबर देने का निर्देश दिया है. मामले को 31 अगस्त को आधिकारिक सूची में शामिल किया जाएगा. यानी अब अगला बड़ा पड़ाव इसी तारीख को होगा. अदालत का फैसला यह तय करने में अहम होगा कि DMK उम्मीदवार की चुनाव याचिका आगे विस्तृत सुनवाई और ट्रायल की ओर बढ़ेगी या विजय की शुरुआती आपत्ति के आधार पर मामला यहीं खत्म हो जाएगा.



