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छोटे शहर से निकला वो लड़का, 500 रुपये से शुरू हुआ सफर, हुआ फ्लॉप, चमकी किस्मत आज है करोड़ों की शोहरत

Last Updated:August 30, 2026, 04:02 IST

आज जिस आवाज पर जेन-जी थिरकती है, कभी वही आवाज छोटे स्टेज पर सिर्फ 500 रुपये में सुनाई देती थी. शोहरत मिलने से पहले इस कलाकार ने लगातार असफलताओं का सामना किया. पहला गाना नहीं चला, फिर एल्बम भी उम्मीद के मुताबिक पहचान नहीं दिला सकी. लेकिन एक सही मुलाकात और एक हिट गाने ने पूरा खेल बदल दिया. इसके बाद एक के बाद एक चार्टबस्टर आए और देखते ही देखते यह साधारण शुरुआत वाला लड़का देश ही नहीं, विदेशों में भी मशहूर हो गया.

नई दिल्ली. कभी छोटे से गांव की गलियों में संगीत सुनकर बड़े हुए एक लड़के ने शायद ही सोचा होगा कि एक दिन उसकी आवाज करोड़ों लोगों की पसंद बन जाएगी. बचपन से ही गाने का शौक था, लेकिन शोहरत की राह आसान नहीं रही. शुरुआती दौर में छोटे-मोटे कार्यक्रमों में गाने के बदले महज 500 रुपये मिलते थे. पहला गाना रिलीज हुआ तो उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिली और बाद में खुद के दम पर निकाला एल्बम भी खास कमाल नहीं कर सका. लगातार असफलताओं के बीच एक मुलाकात ने जिंदगी की दिशा बदल दी. एक गाने ने ऐसी किस्मत चमकाई कि वही कलाकार आज पंजाबी पॉप और बॉलीवुड म्यूजिक का बड़ा नाम बन चुका है. लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे संघर्ष, ठोकरें और एक टूटे दिल की कहानी भी छिपी है.

‘लाहौर’ और ‘हाई रेटेड गबरू’ जैसे चार्टबस्टर के लिए मशहूर गुरु रंधावा की खास पहचान है कि उन्होंने ‘सूट सूट’ और ‘मेड इन इंडिया’ जैसे हिट गानों से पंजाबी पॉप, इंडी-पॉप और बॉलीवुड म्यूजिक को जेन-जी के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया है. 30 अगस्त 1991 को पंजाब के गुरदासपुर जिले के नूरपुर गांव में जन्मे गुरशरणजोत सिंह रंधावा एक मध्यमवर्गीय सिख परिवार से ताल्लुक रखते . गुरु रंधावा का झुकाव 7 साल की उम्र से ही गायन की ओर था. बचपन में गुरदास मान, बब्बू मान और सीमा पार के दिग्गज कलाकार सज्जाद अली को सुनते हुए उनके भीतर संगीत की गहरी समझ विकसित हुई. फोटो साभार-@gururandhawa/Instagram

अपनी शिक्षा को लेकर सजग रहने वाले गुरु रंधावा ने दिल्ली जाकर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड मैनेजमेंट (आईआईपीएम) से एमबीए (एमबीए) की डिग्री हासिल की. इसी दौरान उन्होंने दिल्ली और गुरदासपुर में छोटी पार्टियों और समारोहों में गाना शुरू किया, जहां एक स्टेज शो के लिए उन्हें मात्र 500 रुपए पारिश्रमिक मिलता था. फोटो साभार-@gururandhawa/Instagram

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उनके जीवन में एक वक्त ऐसा भी था, जब उनके पास सफलता या पैसा नहीं था, तब एक लड़की ने उन्हें यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि ‘तेरे पास है क्या.’ इसी दिल टूटने की घटना ने उन्हें ‘बन जा तू मेरी रानी’ जैसा हिट गीत लिखने के लिए प्रेरित किया. फोटो साभार-@gururandhawa/Instagram

गुरु रंधावा की संगीत यात्रा की शुरुआत असफलताओं से भरी रही. साल 2012 में उन्होंने ब्रिटिश-श्रीलंकाई गायक अर्जुन के साथ मिलकर अपना पहला गाना ‘सेम गर्ल’ रिलीज किया, जो बुरी तरह नाकाम रहा. इसके बाद 2013 में उन्होंने अपने भाई रमणीक की आर्थिक मदद से ‘पेज वन’ नाम की एल्बम निकाली, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली. फोटो साभार-@gururandhawa/Instagram

लगातार मिल रही निराशाओं के बीच उनकी मुलाकात मशहूर पाकिस्तानी-अमेरिकी रैपर बोहेमिया से हुई. बोहेमिया ने ही उनके लंबे नाम को छोटा करके मंच के लिए ‘गुरु’ नाम दिया. 2015 में दोनों का साझा ट्रैक ‘पटोला’ रिलीज हुआ. यह गाना रातों-रात हिट साबित हुआ, जिसने पीटीसी म्यूजिक अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ पंजाबी डुओ का पुरस्कार जीत कर गुरु रंधावा की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी. इसके बाद ‘हिंदी मीडियम’ (2017) में ‘सूट सूट’ के साथ उनका बॉलीवुड डेब्यू हुआ. फोटो साभार-@gururandhawa/Instagram

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, 2024 में मशहूर अमेरिकी हिप-हॉप आइकन रिक रॉस और डीजे शैडो दुबई के साथ उनका ट्रैक ‘रिच लाइफ’ रिलीज हुआ. दुबई के रेगिस्तानों में फिल्माया गया यह गाना ‘ईस्ट मीट्स वेस्ट’ का एक बेहतरीन उदाहरण बना और इसे श्रोताओं द्वारा वैश्विक स्तर पर भारी प्रशंसा मिली. गायन के अलावा, 2024 में रिलीज हुई फिल्म ‘कुछ खट्टा हो जाए’ से गुरु रंधावा ने अपना बॉलीवुड एक्टिंग डेब्यू भी किया. उन्हें 2019 में ‘दादा साहब फाल्के अवार्ड’ भी मिला था. फोटो साभार-@gururandhawa/Instagram

वर्तमान में गुरु रंधावा दुनिया के सबसे ज्यादा सुने जाने वाले पंजाबी कलाकारों में से एक हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर उनके 35 मिलियन फॉलोअर्स हैं. उन्होंने ‘सा रे गा मा पा’ जैसे शो में जज की भूमिका भी निभाई, और वे मौजूदा समय में जेन-जी के लोकप्रिय गायक बने हुए हैं. फोटो साभार-@gururandhawa/Instagram

इसी साल अगस्त महीने में उनका नया गाना ‘फाइन शिट’ रिलीज हुआ था, जो सोशल मीडिया पर विवादों में घिरा रहा. इस गाने को इसके विवादास्पद बोल और संगीत वीडियो में कॉर्पोरेट महिलाओं के चित्रण के लिए दर्शकों और सोशल मीडिया पर भारी आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा. इससे पहले 2025 में उनके गीत ‘अजुल’ को भी टीनएज गर्ल्स के आपत्तिजनक चित्रण के कारण आलोचना झेलनी पड़ी थी. फोटो साभार-@gururandhawa/Instagram

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August 30, 2026, 04:02 IST

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