Agriculture: ग्वार की फसल में दिखे भूरे धब्बे तो न करें नजरअंदाज, बचाव के लिए किसान अपनाएं ये तरीका

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ग्वार की फसल में दिखे भूरे धब्बे तो न करें नजरअंदाज, जानें बचाव का तरीका
Last Updated:August 30, 2026, 06:28 IST
Agriculture News: नागौर के ग्वार उत्पादक क्षेत्रों में फसल पर फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ने से कृषि विभाग ने किसानों को अलर्ट किया है. एंगुलर लीफ स्पॉट, ब्लाइट और विल्ट जैसे रोगों की आशंका के बीच विभाग की टीम प्रभावित खेतों का निरीक्षण कर रही है. अधिकारियों ने किसानों से फसल की नियमित निगरानी करने और पत्तियों पर दिखाई देने वाले कोणीय भूरे या गहरे धब्बों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की है. रोग की रोकथाम के लिए काबेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी या थियोफेनेट मिथाइल 70 प्रतिशत डब्ल्यूपी में से किसी एक का 2 से 3 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है. साथ ही खेत में जलभराव रोकने और सफेद मक्खी जैसे कीटों की निगरानी करने को कहा गया है.
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नागौर: राजस्थान के नागौर जिले के ग्वार उत्पादक क्षेत्रों में इन दिनों फसल पर फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ गया है. यहां फसलों में एंगुलर लीफ स्पॉट, ब्लाइट और विल्ट जैसे रोगों की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. विभाग की उच्चस्तरीय टीम प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर खेतों का निरीक्षण कर रही है और फसल की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है. अधिकारियों ने किसानों को रोग की शुरुआती पहचान कर समय पर नियंत्रण उपाय अपनाने पर जोर दिया है.
कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक हरीश मेहरा ने बताया कि एंगुलर लीफ स्पॉट रोग की शुरुआत में ग्वार की पत्तियों पर छोटे-छोटे कोणीय आकार के भूरे या गहरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं. शुरुआती अवस्था में किसान इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अनुकूल मौसम मिलने पर रोग तेजी से फैल सकता है. प्रकोप बढ़ने पर पत्तियां समय से पहले झड़ने लगती हैं और पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है. इसका सीधा असर फलियों के विकास और फसल उत्पादन पर पड़ सकता है.
सफेद मक्खी की भी लगातार निगरानी जरूरी
उन्होंने बताया कि फफूंद जनित रोगों के साथ ग्वार की फसल में सफेद मक्खी और अन्य कीटों के प्रकोप पर भी कृषि विभाग नजर बनाए हुए है. सफेद मक्खी पौधों का रस चूसकर फसल को कमजोर करती है. ऐसे में किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने और पत्तियों के नीचे की सतह सहित पूरे पौधे की निगरानी करने की सलाह दी गई है. उन्होंने बताया कि समय रहते लक्षण मिलने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह से नियंत्रण उपाय अपनाना चाहिए.
दवा की मात्रा में गलती न करें
कृषि विभाग के अनुसार फफूंद जनित रोगों की रोकथाम के लिए किसान काबेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी या थियोफेनेट मिथाइल 70 प्रतिशत डब्ल्यूपी में से किसी एक दवा का उपयोग करें. इसके अलावा किसान इस बात का ध्यान रखे कि दवा की मात्रा 2 से 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डाले. तैयार घोल का पौधों पर अच्छी तरह छिड़काव करें, ताकि पत्तियों और प्रभावित हिस्सों तक दवा समान रूप से पहुंच सके. किसानों को दवा की मात्रा बढ़ाकर इस्तेमाल नहीं करने की भी सलाह दी गई है.
खेत में जलभराव बना तो बढ़ सकता है खतरा
संयुक्त निदेशक रविंद्र रियाड़ ने बताया कि रोग प्रबंधन में केवल दवा का छिड़काव ही पर्याप्त नहीं है. कृषि विभाग ने किसानों को खेत में अनावश्यक सिंचाई करने और जलभराव की स्थिति बनने से बचने की सलाह दी है. खेत में पानी जमा रहने से फफूंद जनित रोगों के फैलने की परिस्थितियां बन सकती हैं. इसलिए खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखना भी फसल सुरक्षा का अहम हिस्सा है. अतिरिक्त निदेशक हरीश मेहरा, संयुक्त निदेशक रविंद्र रियाड़, सहायक निदेशक शंकर राम सियाग और कृषि अधिकारी हरेंद्र कुमार ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हरे है. अधिकारियों ने किसानों से सीधे संवाद कर फसल में दिखाई दे रहे लक्षणों की जानकारी ली और रोग नियंत्रण के संबंध में आवश्यक सुझाव दिए.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Nagaur,Rajasthan
First Published :
August 30, 2026, 06:26 IST



