Rajasthan

Aluda Kubaniya Bawari Dausa | आलूदा की ऐतिहासिक कुबानिया बावड़ी

Last Updated:August 30, 2026, 08:36 IST

Aluda Kubaniya Bawari Dausa: दौसा जिले के आलूदा कस्बे में स्थित सैकड़ों साल पुरानी ऐतिहासिक ‘कुबानिया बावड़ी’ प्रशासनिक अनदेखी के कारण जर्जर हो रही है. स्थापत्य कला की यह अनमोल धरोहर कुंभानिया राजपूतों के इतिहास से जुड़ी है. लोकमान्यता के अनुसार चांद बावड़ी, भांडारेज और आलूदा की बावड़ी का निर्माण एक ही रात में हुआ था. देखरेख न होने से सुरक्षा दीवार कमजोर हो चुकी है. स्थानीय निवासियों और इतिहासकारों ने इस पारंपरिक जल संरक्षण धरोहर के संरक्षण और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है.

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दौसा की ऐतिहासिक बावड़ी पर मंडरा रहा खतरा, जीर्णोद्धार की उठी मांगZoomAluda Kubaniya Bawari Dausa: दौसा की ऐतिहासिक कुबानिया बावड़ी जर्जर, संरक्षण की दरकार

Dausa: दौसा जिले के आलूदा कस्बे में स्थित ऐतिहासिक कुबानिया बावड़ी आज भी अपने प्राचीन स्थापत्य और गौरवशाली इतिहास की कहानी बयां करती है. सैकड़ों वर्ष पुरानी यह बावड़ी किसी समय क्षेत्र में जल संरक्षण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र रही होगी.

आलूदा गांव के मुख्य प्रवेश मार्ग पर स्थित इस बावड़ी की वास्तुकला अपने आप में बेहद खास और अनूठी है. स्थानीय विवरणों के अनुसार बावड़ी में सात खाने और ऊपर एक विशाल गुंबदनुमा संरचना बनी हुई है. इसके साथ ही यहां मौजूद ‘कुबानिया कुण्ड’ भी ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. आज भी इसकी भव्य बनावट और विशाल संरचना राहगीरों तथा इतिहास प्रेमी पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींचती है.

कुंभानिया राजपूतों का इतिहास और रहस्यमयी लोककथाएंइतिहासकारों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस ऐतिहासिक बावड़ी का नाम और इसका इतिहास क्षेत्र के प्राचीन शासकों से जुड़ा हुआ है.

कुबानिया नाम का आधार: इतिहासकार सुआलाल तिवाड़ी के अनुसार प्राचीन काल में आलूदा और भांडारेज क्षेत्र में कुंभानिया राजपूतों का शासन हुआ करता था. कुंभानिया राजपूतों के नाम और कुण्ड की विशिष्ट आकृति के कारण ही इस बावड़ी को ‘कुबानिया बावड़ी’ कहा जाता है.
एक रात में निर्माण की कथा: इस बावड़ी से जुड़ी कई लोककथाएं भी क्षेत्र में काफी प्रचलित हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार दौसा क्षेत्र की प्रसिद्ध चांद बावड़ी, भांडारेज की बावड़ी और आलूदा की बावड़ी का निर्माण एक ही रात में हुआ था.
सुरंगों की मान्यता: लोककथाओं में यह भी कहा जाता है कि ये तीनों बावड़ियां आपस में गुप्त सुरंगों के जरिए जुड़ी हुई हैं, हालांकि इतिहासकार इसे ऐतिहासिक तथ्य के स्थान पर स्थानीय लोकमान्यता ही मानते हैं.

जीर्णोद्धार की दरकार और पर्यटन केंद्र बनने की अपार संभावनाएंदेखरेख के अभाव में यह अनमोल ऐतिहासिक धरोहर समय के साथ धीरे-धीरे जर्जर स्थिति में पहुंचती जा रही है. बावड़ी के आसपास सुरक्षा दीवार नहीं होने और इसके कुछ हिस्सों के कमजोर होने से यहां हादसे की आशंका बनी रहती है. पूर्व में प्रशासन की ओर से इसकी सफाई को लेकर कदम उठाए गए थे, जिसके बाद ग्रामीणों ने सुरक्षा रेलिंग और स्थायी जीर्णोद्धार की मांग उठाई थी. स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि प्रशासन और पुरातत्व विभाग इस बावड़ी का संरक्षण, जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कराए, तो आलूदा की कुबानिया बावड़ी दौसा के प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में स्थापित हो सकती है. यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए राजस्थान की पारंपरिक जल-संरक्षण व्यवस्था की महत्वपूर्ण मिसाल साबित होगी.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Dausa,Dausa,Rajasthan

First Published :

August 30, 2026, 08:36 IST

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