Health Tips: गुलाबी फूलों वाली इस पालक के फायदे कर देंगे हैरान, फूल, पत्ती से लेकर जड़ तक सब है खास

Last Updated:September 07, 2026, 12:12 IST
Talinum Paniculatum Plant Benefits: घरों और क्यारियों के आसपास अक्सर नजर आने वाला तालिनम पैनकुलेटम पौधा देखने में भले ही सामान्य लगे, लेकिन इसके कई पारंपरिक उपयोग बताए जाते हैं. इसकी मांसल हरी पत्तियां और छोटे गुलाबी फूल इसकी खास पहचान हैं. गांवों में इसे सांबर चीरा और सीलोन पालक समेत कई नामों से जाना जाता है. पारंपरिक तौर पर इसकी पत्तियों और जड़ के अलग-अलग इस्तेमाल का उल्लेख मिलता है. पेट से जुड़ी कुछ सामान्य परेशानियों से लेकर त्वचा की छोटी-मोटी दिक्कतों तक में इसके उपयोग की परंपरा है.
गांवों में अक्सर घर के आसपास, क्यारियों और खाली जगहों पर कई तरह के पौधे अपने आप उग आते हैं. इनमें कुछ पौधों की पहचान लोग आसानी से कर लेते हैं, जबकि कई पौधे ऐसे भी होते हैं जिन पर ज्यादा ध्यान नहीं जाता. ऐसा ही एक पौधा है Talinum paniculatum. हरी और मांसल पत्तियों के साथ छोटे-छोटे गुलाबी फूलों वाला यह पौधा देखने में सामान्य लगता है, लेकिन इसके खाद्य और पारंपरिक उपयोगों के कारण इसे खास माना जाता है.
लोकल 18 से बातचीत में वैद्य जमुना प्रसाद यादव ने बताया कि Talinum paniculatum को अलग-अलग जगहों पर अलग नामों से जाना जाता है. इसे सांबर चीरा और सीलोन पालक जैसे नामों से भी पहचाना जाता है. इसकी पहचान चमकदार हरी और मांसल पत्तियों के साथ पतली डंडियों पर आने वाले छोटे गुलाबी फूलों से होती है. पौधा बड़ा होने पर इसकी शाखाएं चारों तरफ फैलने लगती हैं और यह घरों, बगीचों या खेतों के आसपास आसानी से दिखाई दे सकता है.
गांवों में कई पौधों का इस्तेमाल लंबे समय से घरेलू और पारंपरिक उपचारों में किया जाता रहा है. Talinum paniculatum को लेकर भी लोक चिकित्सा में कई तरह के उपयोग बताए जाते हैं. इसकी पत्तियों के इस्तेमाल का उल्लेख अपच, गैस, पेट फूलने और कब्ज जैसी सामान्य परेशानियों के लिए मिलता है. हालांकि, इन पारंपरिक उपयोगों को किसी बीमारी का प्रमाणित इलाज नहीं माना जाना चाहिए और किसी समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
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इस पौधे की पत्तियों का इस्तेमाल कुछ पारंपरिक उपचारों में त्वचा से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियों के लिए भी बताया जाता है. कुछ जगहों पर पत्तियों को पीसकर लेप के रूप में लगाने की परंपरा का उल्लेख मिलता है. इसका इस्तेमाल हल्की सूजन, खरोंच या छोटे घाव पर किया जाता है. गहरे घाव, संक्रमित घाव, ज्यादा खून निकलने या त्वचा की गंभीर समस्या होने पर घरेलू उपचार करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
Talinum paniculatum की जड़ को भी कुछ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिलती है. कुछ जगहों पर इसका उपयोग कमजोरी और शरीर की ऊर्जा से जुड़े पारंपरिक उपचारों में बताया जाता है. इसे शक्तिवर्धक या टॉनिक के तौर पर इस्तेमाल करने का भी उल्लेख मिलता है. हालांकि, किसी पौधे के पारंपरिक इस्तेमाल का मतलब यह नहीं है कि वह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित है या किसी बीमारी के इलाज में वैज्ञानिक रूप से साबित हो चुका है.
वैद्य जमुना प्रसाद यादव के मुताबिक, इस पौधे की पहचान इसकी मांसल हरी पत्तियों और छोटे गुलाबी फूलों से की जा सकती है. इसके बावजूद केवल पत्तियों का रंग, आकार या फूल देखकर किसी पौधे को खाने योग्य या औषधीय मान लेना सही नहीं है. कई जंगली पौधे एक-दूसरे से मिलते-जुलते दिखाई दे सकते हैं. इसलिए इस्तेमाल से पहले पौधे की सही पहचान करना जरूरी है.
Talinum paniculatum को लेकर कई पारंपरिक उपयोग बताए जाते हैं, लेकिन इन्हें किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. खासकर इसकी जड़, अर्क या किसी अन्य औषधीय रूप का सेवन खुद से शुरू करना ठीक नहीं है. बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं या पहले से किसी बीमारी की दवा ले रहे लोगों को ऐसे पौधों का सेवन करने से पहले डॉक्टर या योग्य विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.
Talinum paniculatum अपनी हरी मांसल पत्तियों और छोटे गुलाबी फूलों के कारण आसानी से पहचाना जा सकता है. इसके पत्तों के खाद्य इस्तेमाल के साथ-साथ पत्तियों और जड़ से जुड़े कई पारंपरिक प्रयोगों का भी उल्लेख मिलता है. हालांकि, इन प्रयोगों को बीमारी के इलाज का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी औषधीय उपयोग या सेवन से पहले पौधे की सही पहचान और योग्य चिकित्सक या विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है.
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September 07, 2026, 12:12 IST



