गहने गिरवी रख लगाए 2 लाख, फिर भी नहीं बिक रहीं गणेश मूर्तियां; खरीदारों का इंतजार

Last Updated:September 09, 2026, 22:20 IST
Ganesh Idol Business: गणेश चतुर्थी को लेकर मूर्ति कारोबारियों ने बड़ी उम्मीद से प्रतिमाएं तैयार कीं, लेकिन खरीदार नहीं मिलने से उनकी चिंता बढ़ गई है. एक कारोबारी को पहले करीब 4.5 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा. इसके बावजूद कारोबार जारी रखने के लिए गहने गिरवी रखकर दोबारा 2 लाख रुपये की लागत लगाई. अब गणेश मूर्तियां तैयार हैं, लेकिन बिक्री नहीं होने से पूंजी फंसने और नुकसान बढ़ने का डर बना हुआ है.
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पाली. गणेश चतुर्थी के त्योहार में बस कुछ ही दिन बाकी हैं. चारों तरफ उत्सव की तैयारियां हैं, लेकिन पाली शहर के राजा बली सर्कल के किनारे रखी ये अधूरी और मुस्कुराती हुई मूर्तियां एक ऐसी कहानी छिपाए बैठी हैं, जिसमें खुशियों से ज्यादा दर्द की नमी है. यहाँ पिछले 45 सालों से एक परिवार मिट्टी को आकार देकर देवताओं को गढ़ रहा है. यह सिर्फ इनका काम नहीं, बल्कि जीने का एकमात्र जरिया है. परिवार के बुजुर्ग बताते हैं, ‘हमें इसके अलावा कोई दूसरा काम नहीं आता. हमारी आने वाली पीढ़ी और हमारा पेट, सब इन्हीं मूर्तियों से पलता है.’ त्योहारों की इस जगमगाहट के पीछे का सच बेहद कड़वा है.
पिछले साल गणेश चतुर्थी पर इस परिवार को बारिश की वजह से पानी भरने की वजह से मूर्तिया खराब हुई जिससे तकरीबन 4.5 लाख रुपये का भारी नुकसान झेलना पड़ा था. उम्मीद थी कि बिकी हुई मूर्तियों से पिछले घाटे की भरपाई होगी, लेकिन लागत तक पूरी नहीं निकल पाई.
गहने गिरवी रखकर बनाई मूर्तियां, पर खरीदार लापताइस साल फिर नई उम्मीद के साथ इस परिवार ने बप्पा की प्रतिमाएं तैयार की हैं. इस बार भी वे अब तक 2 लाख रुपये से ज्यादा की लागत लगा चुके हैं. जेब में पैसे नहीं थे, तो घर की औरतों के गहने तक गिरवी रखने पड़े. लेकिन त्योहार बेहद नजदीक होने के बावजूद बाज़ार में सन्नाटा है. मूर्तियों को निहारने वाले तो आ रहे हैं, लेकिन मोल-भाव करके आगे बढ़ जाते हैं. खरीदार उस तादाद में नहीं पहुँच रहे, जिससे लागत भी निकल सके.हमने गहने बेचकर और गिरवी रखकर बप्पा को गढ़ा है, ताकि किसी के घर में खुशियां जा सकें. लेकिन हमारे अपने चूल्हे पर संकट छाया है.
सरकार से आस, कला को बचाने की गुहार45 वर्षों की इस कलात्मक यात्रा के बाद आज यह परिवार आर्थिक तंगी की उस कगार पर खड़ा है जहाँ से आगे का रास्ता धुंधला दिखता है. इस शिल्पकार परिवार ने सरकार और स्थानीय प्रशासन से आर्थिक मदद और राहत की गुहार लगाई है, ताकि वर्षों पुरानी यह हस्तकला और इनका परिवार बची रहे.
पिछले साल हुआ साढे चार लाख का नुकसानदेश भर में गणपति बप्पा के आगमन की तैयारियां ज़ोरों पर हैं. लेकिन क्या आपने कभी उन हाथों के बारे में सोचा है, जो भगवान की इन मूर्तियों में प्राण डालते हैं? पिछले साल साढ़े चार लाख का नुकसान झेलने वाला यह परिवार आज पाई-पाई को मोहताज है. इस बार भी अपनी रोजी-रोटी बचाने के लिए इन्होंने घर के गहने तक गिरवी रख दिए और 2 लाख रुपये लगाकर मूर्तियां तैयार कीं. लेकिन अफसोस बाज़ार में आज भी सन्नाटा है, खरीदार पहुँच नहीं रहे हैं. इनके पास इस हुनर के अलावा जीवनयापन का कोई दूसरा साधन नहीं है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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September 09, 2026, 22:20 IST



