पुराने जमाने की पत्थर की मिक्सी का जलवा आज भी कायम, इसमें पिसे मसालों का स्वाद और टेक्सचर कर देगा हैरान

Last Updated:September 09, 2026, 23:10 IST
Karauli Hindi News: आधुनिक मशीनों के दौर में भी सिलबट्टे की यह वापसी बताती है कि कुछ पारंपरिक चीजें समय के साथ पुरानी जरूर होती हैं, लेकिन उनकी उपयोगिता और स्वाद की पहचान कभी खत्म नहीं होती.लोग कहते है कि मशीन से चलने वाली मिक्सी ने भले ही काम को आसान और तेज कर दिया हो, लेकिन सिलबट्टे पर पिसी चटनी और मसालों के स्वाद की बात ही अलग है.
पुराने जमाने की कई ऐसी चीजें हैं, जिनका इस्तेमाल अब धीरे-धीरे घरों से लगभग खत्म हो चुका है. आधुनिकता के इस दौर में रसोई से लेकर घर के अन्य कामों तक ज्यादातर चीजों ने हाईटेक मशीनों की जगह ले ली है. लेकिन इन सबके बीच पुराने जमाने की एक ऐसी चीज है, जिसकी पकड़ आज भी बरकरार है. खास बात यह है कि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक मिक्सी और तमाम हाईटेक मशीनें भी इसे पूरी तरह पीछे नहीं छोड़ पाई हैं.
हम बात कर रहे हैं सिलबट्टे की. कभी लगभग हर घर की रसोई का अहम हिस्सा रहने वाला सिलबट्टा आज भी बाजारों में हाथों से तैयार किया जाता है और इसकी मांग बनी हुई है. पत्थर को टांकी और हथौड़े की चोट से आकार देकर कारीगर इसे तैयार करते हैं. कारीगरों का कहना है कि अच्छी तरह तैयार किया गया सिलबट्टा लंबे समय तक चलता है और इसमें पीसे गए मसाले और चटनी का स्वाद इलेक्ट्रॉनिक मिक्सी से अलग होता है.
सिलबट्टे पर मसाले, चटनी, लहसुन, अदरक और अन्य खाद्य सामग्री पीसने की परंपरा काफी पुरानी है. आधुनिक मिक्सी के मुकाबले इसमें सामग्री को धीरे-धीरे पीसा जाता है, जिससे स्वाद और बनावट में अंतर महसूस होता है. यही वजह है कि कई लोग आज भी खास व्यंजन और चटनी सिलबट्टे पर ही तैयार करना पसंद करते हैं.
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सिलबट्टे पर पीसे गए मसालों से बने खाने का स्वाद अलग होने के कारण नई पीढ़ी के लोग भी अब इसे दोबारा अपनाने लगे हैं. खासकर ग्रामीण और पारंपरिक खान-पान पसंद करने वाले परिवारों में इसका इस्तेमाल आज भी देखने को मिलता है.
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. ओमप्रकाश भारद्वाज के मुताबिक, सिलबट्टा प्राकृतिक पत्थर से तैयार किया जाता है और इसमें मसाले या चटनी पीसने का तरीका पूरी तरह पारंपरिक है. उनके अनुसार, घर में तैयार की जाने वाली चटनी और मसालों में ताजी सामग्री का इस्तेमाल होने से भोजन के स्वाद और गुणवत्ता में फर्क पड़ सकता है. पारंपरिक तरीके से तैयार किया गया ताजा भोजन पाचन के लिहाज से बेहतर हो सकता है. हालांकि, किसी बीमारी या पेट की समस्या के इलाज के तौर पर सिलबट्टे पर पिसे भोजन को नहीं देखा जाना चाहिए.
लोगों का कहना है कि आधुनिक दौर में समय बचाने के लिए मिक्सी का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन जब बात खास स्वाद और पारंपरिक तरीके से खाना तैयार करने की आती है तो सिलबट्टे की अपनी अलग जगह है. यही कारण है कि कभी घरों से गायब होता नजर आया यह पुराना घरेलू सामान अब एक बार फिर नए जमाने की रसोई में दिखाई देने लगा है.
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September 09, 2026, 23:10 IST



