Health

गोंडा की कुसुम मौर्य का कमाल: घर पर तैयार पथरी नाशक आयुर्वेदिक जूस की मुंबई और दिल्ली तक भारी मांग

Last Updated:September 09, 2026, 17:24 IST

कभी सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज अपने हुनर से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के वजीरगंज ब्लॉक स्थित रायपुर गांव की कुसुम मौर्य ने ऐसा ही कमाल कर दिखाया है. स्वयं सहायता समूह से जुड़कर जड़ी-बूटियों की समझ विकसित करने वाली कुसुम आज घर पर ही पथरी नाशक आयुर्वेदिक जूस तैयार कर रही हैं, जिसकी मांग अब गोंडा से निकलकर दिल्ली, मुंबई, कानपुर और पंजाब तक पहुंच चुकी है.

गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के वजीरगंज ब्लॉक के रायपुर गांव की रहने वाली कुसुम मौर्य घर पर जड़ी-बूटियों से आयुर्वेदिक जूस तैयार कर रही हैं. उनका बनाया गया पथरी नाशक जूस अब गोंडा ही नहीं, बल्कि दिल्ली, कानपुर, मुंबई और पंजाब तक भेजा जा रहा है.

स्वयं सहायता समूह से मिली नई पहचानकुसुम मौर्य ने बताया कि पहले वह केवल गृहिणी थीं. बाद में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने औषधीय पौधों पर काम शुरू किया. आज वह कई तरह के आयुर्वेदिक उत्पाद बनाती हैं, जिनमें पथरी नाशक जूस सबसे अधिक पसंद किया जाता है.

घर के बगीचे से कच्चा माल और निर्माण विधिकुसुम के अनुसार यह जूस कई प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियों को तय मात्रा में मिलाकर बनाया जाता है. उनके घर और बगीचे में ही कई औषधीय पौधे लगे हुए हैं, जिनसे कच्चा माल मिलता है. सभी जड़ी-बूटियों को साफ करके मिश्रण तैयार किया जाता है, फिर उससे जूस बनाया जाता है.

विशेषज्ञ परामर्श और सावधानी जरूरीपथरी के इलाज या राहत से जुड़े दावों के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं. ऐसे उत्पाद का उपयोग करने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है. कुसुम बताती हैं कि उनके पास आने वाले लोगों की रिपोर्ट देखने के बाद ही जूस दिया जाता है. इसे सुबह और शाम उपयोग करने की सलाह दी जाती है. उनका कहना है कि हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है, इसलिए बिना सलाह के किसी भी औषधीय उत्पाद का सेवन नहीं करना चाहिए.

परिवार का सहयोग और महिलाओं को रोजगारइस काम में उनके परिवार का पूरा सहयोग है, खासकर उनके पति हर कदम पर साथ देते हैं. कुसुम के साथ गांव की करीब 10 से 12 महिलाएं भी काम कर रही हैं, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है.

500 से 600 रुपये आती है एक बोतल की लागतकुसुम मौर्य ने बताया कि एक बोतल तैयार करने में करीब 500 से 600 रुपये की लागत आती है, जबकि बाजार में इसकी कीमत लगभग 1,000 रुपये है. हर महीने करीब 100 बोतल की बिक्री होती है. उनका लक्ष्य भविष्य में उत्पादन बढ़ाकर अधिक लोगों तक अपने आयुर्वेदिक उत्पाद पहुंचाना है.

About the AuthorRahul Goel

Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at Hindi, managing State and Local18 content operations a…

और पढ़ेंLocation :

Gonda,Uttar Pradesh

First Published :

September 09, 2026, 17:24 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj