200 बच्चों के लिए टीन शेड, अब 7 हजार वर्ग फीट छत की वॉटरप्रूफिंग, चौमूं के प्रधानाचार्य की पहल की हो रही सराहना

Last Updated:September 05, 2026, 12:51 IST
Principal Vijendra Singh Kaviya Initiative: जयपुर ग्रामीण के चौमूं क्षेत्र के बगवाड़ा स्थित महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया ने निजी खर्चे से करीब 7 हजार वर्ग फीट छत की वॉटरप्रूफिंग कराई. बारिश के दौरान छत से पानी टपकने और दीवारों में सीलन की समस्या से विद्यार्थी और स्टाफ परेशान थे. करीब 15 दिनों तक काम करवाकर भवन की छत को बारिश से सुरक्षित किया गया. प्रधानाचार्य ने इससे पहले भी भारी बारिश के दौरान असुरक्षित कमरों के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए निजी खर्चे से प्रार्थना स्थल पर टीन शेड बनवाया था. इससे करीब 200 बच्चों की पढ़ाई जारी रह सकी. उनके प्रयासों से दो भामाशाहों ने विद्यालय में नए कक्षा-कक्ष भी बनवाए. स्कूल परिसर में बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर हरियाली बढ़ाने का काम भी किया गया है.
जयपुर ग्रामीण के चौमूं क्षेत्र स्थित महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बगवाड़ा में बारिश के दिनों में टपकती छत और सीलन भरी दीवारें विद्यार्थियों और स्टाफ के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी. हर बारिश के दौरान पुराने भवन की स्थिति को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती थी. ऐसे में विद्यालय के प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया ने जिम्मेदारी उठाते हुए निजी स्तर पर समाधान का निर्णय लिया.
प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए करीब 7 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में फैली विद्यालय भवन की छत का वॉटरप्रूफिंग कार्य अपने निजी खर्चे से कराया. इसके लिए पिछले करीब 15 दिनों से लगातार काम कराया गया. बारिश के कारण होने वाली सीलन और छत से पानी टपकने की समस्या को दूर करने के लिए मरम्मत के साथ वॉटरप्रूफिंग का कार्य कराया गया, जिससे अब विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई करने में सुविधा मिलेगी.
प्रधानाचार्य की यह पहल पहली बार नहीं है. इससे पहले गत वर्ष भारी बारिश के दौरान विद्यालय के कई कमरों को विभाग की ओर से असुरक्षित मानते हुए उनमें बच्चों को बैठाने से मना कर दिया गया था. उस समय भी प्रधानाचार्य ने परिस्थितियों को चुनौती के रूप में लिया और अपने निजी खर्चे पर विद्यालय के प्रार्थना स्थल पर टीन शेड का निर्माण कराया. इस व्यवस्था से करीब 200 बच्चों की पढ़ाई बारिश के दौरान भी प्रभावित नहीं हुई.
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विद्यालय के विकास में प्रधानाचार्य ने केवल निजी स्तर पर खर्च करने तक ही अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी, बल्कि समाज और भामाशाहों को भी विद्यालय से जोड़ने का प्रयास किया. उनके प्रयासों से दो भामाशाह आगे आए और विद्यालय परिसर में दो नए कक्षा-कक्षों का निर्माण कराया. इसके अलावा स्टाफ सदस्यों और स्थानीय स्तर पर मिले जनसहयोग से विद्यालय के लिए आवश्यक विभिन्न सामग्री जुटाई गई. इससे स्कूल में विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिली.
विद्यालय भवन और विद्यार्थियों की सुविधाओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. पूरे विद्यालय परिसर में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है. इन पौधों की देखभाल के कारण परिसर अब हरियाली से भर गया है. हरा-भरा और स्वच्छ वातावरण विद्यालय की सुंदरता बढ़ाने के साथ विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब रहने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहा है.
प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया का कहना है कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे और यहां कार्यरत स्टाफ सुरक्षित माहौल के हकदार हैं. भवन की समस्या लंबे समय तक बनी रहने से विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती थी. इसी को देखते हुए उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार निजी स्तर पर कार्य कराने का निर्णय लिया. उनका प्रयास है कि सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यालय में पढ़ाई के लिए बेहतर और सुरक्षित वातावरण तैयार किया जाए.
प्रधानाचार्य की इस पहल की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है. विद्यालय में भवन सुधार, नए कक्षा-कक्ष, पर्यावरण संरक्षण और अन्य सुविधाओं के लिए किए गए प्रयासों से स्कूल का स्वरूप लगातार बेहतर हो रहा है. प्रधानाचार्य ने विद्यालय के विकास में सहयोग देने वाले भामाशाहों, स्टाफ सदस्यों और जनसहयोग करने वाले लोगों का आभार जताया. उनका मानना है कि सामूहिक सहयोग और जिम्मेदारी की भावना से सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का बेहतर माहौल तैयार किया जा सकता है.
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September 05, 2026, 12:51 IST



