सूखा, बाढ़, आग और तूफान… दुनिया भर पर भारी पड़ेगा अगला साल, वैज्ञानिकों ने कर दी खतरनाक भविष्यवाणी

दुनिया एक बार फिर मौसम के ऐसे दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है, जहां प्रकृति का एक बड़ा बदलाव करोड़ों लोगों की जिंदगी पर असर डाल सकता है. वैज्ञानिकों की नजर इस समय प्रशांत महासागर पर टिकी है, जहां तेजी से मजबूत हो रहा एल नीनो आने वाले महीनों में इतिहास के सबसे शक्तिशाली एल नीनो बन सकता है. संयुक्त राष्ट्र और मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि इसका असर केवल तापमान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में सूखा, बाढ़, जंगल की आग, भीषण गर्मी और असामान्य चक्रवात जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं.
क्या बला है ये एल नीनो?
एल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान और हवाओं में होने वाले बदलाव से जुड़ी प्राकृतिक जलवायु घटना है. लेकिन इस बार वैज्ञानिकों को चिंता इसकी सामान्य मौजूदगी से नहीं, बल्कि इसकी तेजी और तीव्रता से है. आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में इसका सापेक्ष तापमान सूचकांक सामान्य से करीब 2.3 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया. खास बात यह है कि एल नीनो का चरम आमतौर पर नवंबर से जनवरी के बीच आता है, जबकि इस बार यह काफी पहले ही असाधारण रूप से मजबूत दिखाई देने लगा है.
वैज्ञानिकों के लिए अब एल नीनो की ताकत मापना भी पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है. इसकी वजह है जलवायु परिवर्तन. समुद्र पहले ही सामान्य से ज्यादा गर्म हो चुके हैं, इसलिए अब केवल समुद्र के तापमान में वृद्धि को देखकर एल नीनो की तीव्रता का आकलन करना पर्याप्त नहीं माना जाता. वैज्ञानिक ऐसे सापेक्ष सूचकांक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो यह बताता है कि पहले से गर्म होती दुनिया में मौजूदा तापमान वृद्धि कितनी असामान्य है.
अभी से दिखने लगे हैं असर
इस संभावित रिकॉर्डतोड़ एल नीनो के संकेत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देने लगे हैं. प्रशांत महासागर के आसपास के देशों में इसका असर सबसे अधिक पड़ने की आशंका है. इंडोनेशिया में बड़े पैमाने पर जंगलों में आग की घटनाएं सामने आई हैं और वैज्ञानिक इन्हें बढ़ती गर्मी तथा शुष्क परिस्थितियों से जोड़कर देख रहे हैं.
चक्रवातों के पैटर्न में भी असामान्य बदलाव देखा जा रहा है. प्रशांत महासागर में जापान के आसपास से लेकर हवाई क्षेत्र तक एक साथ कई सक्रिय उष्णकटिबंधीय चक्रवात मौजूद हैं. सामान्य परिस्थितियों में एक ही समय में इतनी व्यापक चक्रवाती गतिविधि असामान्य मानी जाती है. एल नीनो समुद्र के गर्म पानी को मध्य और पूर्वी प्रशांत की ओर धकेलता है, जिससे इन क्षेत्रों में चक्रवाती गतिविधियां तेज हो सकती हैं.
ऑस्ट्रेलिया में भी आने वाले महीनों में इसका असर अधिक स्पष्ट होने की आशंका है. वहां कुछ इलाकों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच चुका है और मौसम लगातार शुष्क होता जा रहा है. उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की खबरें सामने आई हैं.
2027 में टूट सकते हैं गर्मी के सारे रिकॉर्ड
सबसे बड़ी चिंता यह है कि एल नीनो का प्रभाव जलवायु परिवर्तन से अलग होकर नहीं, बल्कि उसके साथ मिलकर काम करता है. यानी पहले से गर्म हो रही दुनिया में एक बेहद शक्तिशाली एल नीनो वैश्विक तापमान को और ऊपर धकेल सकता है. वैज्ञानिकों को आशंका है कि इसका असर 2027 में वैश्विक तापमान के नए रिकॉर्ड के रूप में सामने आ सकता है.
एल नीनो आमतौर पर दुनिया के कई हिस्सों में बारिश के पैटर्न को बदल देता है. कहीं सामान्य से कम बारिश और सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है, तो कहीं अत्यधिक बारिश से बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. इसके साथ ही गर्म हवाएं, जंगलों में आग और समुद्री तूफानों की तीव्रता भी बढ़ सकती है.
भारत जैसे मानसून पर निर्भर देशों के लिए भी एल नीनो की गतिविधियां बेहद महत्वपूर्ण हैं. प्रशांत महासागर में होने वाला यह बदलाव हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण एशिया के बारिश और तापमान के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है.
कुल मिलाकर दुनिया के सामने चिंता सिर्फ एक सामान्य मौसमी घटना की नहीं है. वैज्ञानिकों की नजर ऐसे एल नीनो पर है, जो असाधारण रूप से जल्दी मजबूत हुआ है और अभी अपने चरम तक पहुंचना बाकी है. अगर आने वाले महीनों में इसकी तीव्रता अनुमान के मुताबिक बढ़ती रही, तो 2027 दुनिया के लिए सिर्फ एक नया साल नहीं, बल्कि मौसम के नए और खतरनाक रिकॉर्ड का साल भी साबित हो सकता है.



