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लगातार सबसे ज्यादा टेस्ट हारने वाली 5 टीमें, एक टीम गंवा चुकी है 21 मैच, जीत को वर्षों तरसती रहीं

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लगातार सबसे ज्यादा टेस्ट हारने वाली 5 टीमें, एक टीम गंवा चुकी है 21 मैच

Last Updated:September 11, 2026, 07:01 IST

5 team Most consecutive defeats in Test: टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में लगातार सबसे ज्यादा मैच हारने का शर्मनाक रिकॉर्ड बांग्लादेश के नाम दर्ज है, जिसने 2001 से 2004 के दौरान लगातार पराजय का सामना किया. इसके अलावा जिम्बाब्वे दो अलग-अलग दौरों में लगातार 11 और 10 मुकाबले हारा. शुरुआती दौर (1889-1899) में दक्षिण अफ्रीका भी लगातार 8 टेस्ट हार चुका है. सबसे ज्यादा टेस्ट हारने वाली 5 टीमें इस प्रकार हैं. लगातार सबसे ज्यादा टेस्ट हारने वाली 5 टीमें, एक टीम गंवा चुकी है 21 मैचZoom टेस्ट में सबसे ज्यादा लगातार हार झेलने वाली पांच टीमों की लिस्ट.

नई दिल्ली. टेस्ट क्रिकेट का इतिहास जितना गौरवशाली है, उतना ही यह अप्रत्याशित और क्रूर भी रहा है. इस खेल में जहां एक तरफ जीत के बड़े-बड़े कीर्तिमान रचे जाते हैं, वहीं दूसरी ओर लगातार हार का एक ऐसा सिलसिला भी शुरू हो जाता है जो किसी भी देश की क्रिकेट टीम के मनोबल को पूरी तरह तोड़कर रख देता है. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसी टीमें रही हैं जिन्हें लगातार हार का कड़वा घूंट पीना पड़ा, लेकिन कुछ दौर ऐसे आए जब हार का यह सिलसिला खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था.

टेस्ट क्रिकेट में लगातार सबसे ज्यादा मुकाबले हारने का शर्मनाक रिकॉर्ड बांग्लादेश के नाम दर्ज है. नवंबर 2001 से लेकर फरवरी 2004 के बीच बांग्लादेशी क्रिकेट टीम एक ऐसे काले दौर से गुजरी, जहां मैदान पर उतरने का मतलब सिर्फ और सिर्फ हार था. यह सिलसिला 15 नवंबर 2001 को चटगांव में ज़िम्बाब्वे के खिलाफ 8 विकेट की हार के साथ शुरू हुआ. इसके बाद बांग्लादेश को न्यूजीलैंड के दौरे पर हैमिल्टन और वेलिंगटन में लगातार दो बार पारी के अंतर से शिकस्त झेलनी पड़ी. हार की यह आग तब और भड़क गई जब पाकिस्तान ने ढाका और चटगांव में बांग्लादेश को पारी और 178 रन तथा पारी और 169 रन से रौंद दिया.

टेस्ट में सबसे ज्यादा लगातार हार झेलने वाली पांच टीमों की लिस्ट.

इसके बाद जुलाई 2002 में श्रीलंका दौरे पर कोलंबो के दोनों मैदानों (पीएसएस और एसएससी) पर मेज़बानों ने बांग्लादेश को बुरी तरह पीटा. अक्टूबर में दक्षिण अफ्रीका की धरती पर पोटचेफस्ट्रूम और कुगुम्पो सिटी में भी कहानी नहीं बदली और दोनों बार पारी से हार मिली. दिसंबर 2002 में वेस्टइंडीज़ ने ढाका में पारी और 310 रन की करारी शिकस्त दी, तो चटगांव में 7 विकेट से जीत हासिल की. साल 2003 में भी बांग्लादेश की किस्मत नहीं बदली. दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और इंग्लैंड जैसी टीमों ने बांग्लादेश को बैक-टू-बैक मैचों में मात दी. मुल्तान में पाकिस्तान के खिलाफ 1 विकेट से मिली बेहद करीबी हार ने तो प्रशंसकों का दिल ही तोड़ दिया. अंततः 19 फरवरी 2004 को हरारे में ज़िम्बाब्वे के हाथों 183 रन से हारने के बाद यह लगातार 21वीं पराजय साबित हुई, जिसने इतिहास का सबसे लंबा पराजय-सिलसिला रच दिया.

जिम्बाब्वे के लिए जब हार ही बन गई नियतिजिम्बाब्वे की टीम भी दो अलग-अलग दौर में हार के भयानक भंवर में फंसी. पहला दौर दिसंबर 2001 से जून 2003 के बीच आया, जब टीम को लगातार 11 टेस्ट मैचों में हार का सामना करना पड़ा. 27 दिसंबर 2001 को कोलंबो में श्रीलंका ने जिम्बाब्वे को पारी और 166 रन से हराया. इसके बाद कैंडी और गॉल में भी श्रीलंका का दबदबा कायम रहा. फरवरी 2002 में भारत दौरे पर नागपुर में पारी और 101 रन तथा दिल्ली में 4 विकेट से हार मिली. इसके बाद पाकिस्तान ने हरारे और बुलावायो में जिम्बाब्वे को मात दी, जबकि इंग्लैंड ने लॉर्ड्स और चेस्टर-ले-स्ट्रीट में पारी के अंतर से शिकस्त थमाई. अक्टूबर 2003 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वाका और सिडनी में मिली हार के साथ यह आंकड़ा 11 पर पहुंचा. इसके ठीक एक दशक बाद, अगस्त 2014 से अक्टूबर 2017 के बीच ज़िम्बाब्वे एक बार फिर लगातार 10 टेस्ट मुकाबले हार गया. अगस्त 2014 में हरारे में दक्षिण अफ्रीका के हाथों 9 विकेट की हार से शुरू हुआ यह सिलसिला बांग्लादेश, न्यूजीलैंड, श्रीलंका और वेस्टइंडीज़ के खिलाफ लगातार हारता हुआ अक्टूबर 2017 तक खिंचता चला गया.

बांग्लादेश का दूसरा काला दौरबांग्लादेश के लिए हार का सिलसिला केवल 2001-2004 तक सीमित नहीं रहा. मई 2007 से अक्टूबर 2008 के बीच टीम एक बार फिर लगातार 9 टेस्ट मुकाबले हार गई. इस दौर की शुरुआत मई 2007 में मीरपुर के मैदान पर भारत के हाथों पारी और 239 रन की करारी हार के साथ हुई. इसके बाद जून-जुलाई 2007 में श्रीलंका ने अपने घर में बांग्लादेश को तीन लगातार टेस्ट में पारी के अंतर से रौंदा. साल 2008 की शुरुआत में न्यूजीलैंड ने डुनेडिन और वेलिंगटन में बांग्लादेश को कोई मौका नहीं दिया. इसके बाद दक्षिण अफ्रीका ने मीरपुर और चटगाँव में अपनी श्रेष्ठता साबित की, और आखिरकार अक्टूबर 2008 में चटगाँव में न्यूजीलैंड के हाथों 3 विकेट की हार के साथ इस खराब दौर पर विराम लगा.

शुरुआती दौर में दक्षिण अफ्रीका की लाचारीआज क्रिकेट जगत की दिग्गज मानी जाने वाली दक्षिण अफ्रीकी टीम का शुरुआती टेस्ट इतिहास बेहद निराशाजनक रहा था. मार्च 1889 से अप्रैल 1899 के बीच यानी पूरे एक दशक के दौरान दक्षिण अफ्रीका ने लगातार 8 टेस्ट मुकाबले गंवाए थे. दिलचस्प बात यह है कि ये सभी आठों हार इंग्लैंड के खिलाफ ही आई थीं. 12 मार्च 1889 को गकेबरहा (पोर्ट एलिजाबेथ) में इंग्लैंड से 8 विकेट से हारने के बाद, केपटाउन में खेले गए अगले मैच में भी दक्षिण अफ्रीका को पारी और 202 रन की शर्मनाक शिकस्त मिली. 1892 और 1896 के बीच इंग्लैंड ने गकेबरहा, केपटाउन और जोहान्सबर्ग में लगातार दक्षिण अफ्रीका को परास्त किया. 1899 में जोहान्सबर्ग और केपटाउन में मिली दो और हार के साथ दक्षिण अफ्रीका का यह शुरुआती कड़वा सफर खत्म हुआ.

About the AuthorKamlesh Raiचीफ सब एडिटर

कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…

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New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

September 11, 2026, 07:01 IST

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