Slip Disc Symptoms: पैर सुन्न पड़ना और पेशाब पर कंट्रोल न रहना मामूली नहीं, स्लिप डिस्क में ये संकेत हैं गंभीर

फरीदाबाद: बढ़ती भागदौड़ और लंबे समय तक बैठकर काम करने की वजह से कमर दर्द अब सिर्फ उम्रदराज लोगों की परेशानी नहीं रह गया है. कई बार यही तकलीफ आगे चलकर स्लिप डिस्क की समस्या का संकेत हो सकती है. पैर में दर्द, सुन्नपन या झनझनाहट होने पर लोग घबरा जाते हैं और सर्जरी को ही इलाज मान लेते हैं. लेकिन हर स्लिप डिस्क में ऑपरेशन जरूरी नहीं होता. कुछ मामलों में दवाइयों, कसरत और फिजियोथेरेपी से भी राहत मिल सकती है. वहीं पेशाब पर नियंत्रण न रहना या पैरों में कमजोरी जैसे कुछ लक्षण बेहद गंभीर हो सकते हैं. ऐसे में मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए. इलाज के बाद जिम और खेलकूद को लेकर भी कई लोगों के मन में सवाल रहते हैं. इन सभी बातों को लेकर अमृता अस्पताल फरीदाबाद के हड्डी, जोड़ प्रत्यारोपण और रीढ़ की सर्जरी विभाग के सलाहकार एवं सहायक प्रोफेसर डॉ. अर्चित गोयल ने जरूरी जानकारी दी है.
स्लिप डिस्क में डिस्क टूटकर नस पर दबाव बनाती है
डॉ. अर्चित गोयल बताते हैं कि हमारी रीढ़ की हड्डी कई छोटी-छोटी हड्डियों से बनी होती है. इन हड्डियों के बीच गद्दे की तरह एक डिस्क मौजूद रहती है. उम्र बढ़ने के साथ या दूसरे कारणों से इसमें घिसावट आ सकती है. कई बार डिस्क का कोई हिस्सा टूटकर पीछे की तरफ मौजूद नस पर दबाव बनाने लगता है. इसी स्थिति को आम बोलचाल में स्लिप डिस्क कहा जाता है. यह टुकड़ा छोटा भी हो सकता है और बड़ा भी.
70-80% स्लिप डिस्क मरीज बिना ऑपरेशन ठीक हो जाते हैं
डॉ. अर्चित गोयल बताते हैं कि हर मरीज को ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती. करीब 70 से 80 प्रतिशत मरीज बिना सर्जरी के ठीक हो जाते हैं. दवाइयों, कसरत और फिजियोथेरेपी से आराम नहीं मिलने पर कमर में इंजेक्शन का विकल्प अपनाया जा सकता है. इसके बाद भी राहत न मिलने वाले मरीजों में ऑपरेशन पर विचार किया जाता है. ऐसे मामलों की संख्या करीब 5 से 10 प्रतिशत तक ही रहती है.
पैर में दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन को नजरअंदाज न करें
डॉ. अर्चित गोयल बताते हैं कि नस पर दबाव पड़ने की वजह से पैर में दर्द महसूस हो सकता है. इसके साथ झनझनाहट, सुन्नपन और कमजोरी भी दिखाई दे सकती है. ये सभी लक्षण स्लिप डिस्क से जुड़े हो सकते हैं. अगर कमर या पैर में बहुत तेज दर्द है और दवाइयों से राहत नहीं मिल रही है तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. दर्द के साथ पैर सुन्न पड़ना या कमजोरी महसूस होना भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. चलने में परेशानी होने पर भी जांच जरूरी है.
पेशाब पर नियंत्रण खोना, इमरजेंसी का संकेत हो सकता
डॉ. अर्चित गोयल बताते हैं कि पेशाब से जुड़ी परेशानी को बिल्कुल हल्के में नहीं लेना चाहिए. अगर पेशाब करने के लिए जोर लगाना पड़ रहा है, पेशाब के रास्ते में सुन्नपन महसूस हो रहा है या पेशाब और मल पर नियंत्रण नहीं रह रहा है तो यह आपात स्थिति हो सकती है. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को बिना देरी किए अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए.
स्लिप डिस्क के बाद जिम छोड़ना जरूरी नहीं
डॉ. अर्चित गोयल बताते हैं कि स्लिप डिस्क होने के बाद हमेशा के लिए जिम छोड़ने की जरूरत नहीं होती. कुछ मरीजों को ठीक होने तक कुछ दिनों के लिए जिम से दूरी रखने की सलाह दी जाती है. स्थिति सामान्य होने के बाद व्यक्ति अपनी सामान्य जीवनशैली में लौट सकता है. हालांकि कुछ ऐसी गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है जिनमें जमीन पर तेज उछलना या ज्यादा झटका लगना शामिल हो. सही तरीके से अभ्यास करने पर खेलों से जुड़ी गतिविधियां भी की जा सकती हैं.
स्लिप डिस्क में ठंडा-खट्टा खाना बंद करने की जरूरत नहीं
डॉ. अर्चित गोयल बताते हैं कि स्लिप डिस्क को लेकर खानपान से जुड़े कई मिथ लोगों के बीच हैं. कुछ लोग मानते हैं कि ठंडी चीजें, खट्टी चीजें या दही खाने से परेशानी बढ़ सकती है. ऐसा कोई संबंध नहीं है. भोजन की वजह से स्लिप डिस्क नहीं होती और न ही किसी खास खाने को छोड़ने से इसका इलाज होता है. शरीर के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना जरूरी है. इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा सही मात्रा में शामिल होने चाहिए. क्या खा रहे हैं, किस समय खा रहे हैं या ठंडा और खट्टा खा रहे हैं, इसका स्लिप डिस्क से सीधा संबंध नहीं है.
ऐसे में कमर दर्द को लगातार नजरअंदाज करने के बजाय उसके कारण को समझना जरूरी है. पैर में दर्द, सुन्नपन या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है. खासकर पेशाब या मल पर नियंत्रण से जुड़ी परेशानी सामने आने पर देरी करना नुकसानदायक हो सकता है.



