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BRICS Summit India Brazil President: जिनपिंग पुतिन दिल्ली पहुंचे, लेकिन ये खास मेहमान गायब, ब्रिक्स से क्यों दूर रहे ब्राजील के राष्ट्रपति?

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जिनपिंग-पुतिन पहुंचे, लेकिन ब्रिक्स से क्यों दूर रहे ब्राजील के राष्ट्रपति?

Last Updated:September 13, 2026, 14:41 IST

BRICS Summit Brazil: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और कई बड़े नेता दिल्ली पहुंचे, लेकिन ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा नदारद रहे. ब्रिक्स के संस्थापक नेताओं में शामिल लूला की जगह विदेश मंत्री माउरो विएरा भारत आए हैं. इसकी बड़ी वजह ब्राजील में 4 अक्टूबर को होने वाला राष्ट्रपति चुनाव है.जिनपिंग-पुतिन पहुंचे, लेकिन ब्रिक्स से क्यों दूर रहे ब्राजील के राष्ट्रपति?Zoomब्रिक्स समिट में ब्राजील के राष्ट्रपति नहीं शामिल हुए.

Brazil President Absent In BRICS: नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच पर दुनिया की निगाहें टिकी हैं. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहुंचे, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी भारत आए, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई बड़े नेता जुटे. लेकिन इस बड़े जमावड़े में एक खास चेहरा गायब है- ब्रिक्स के शुरुआती संस्थापक नेताओं में शामिल ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा. ब्राजील ने उनकी जगह विदेश मंत्री माउरो विएरा को भेजा है. आखिर ऐसा क्या हुआ कि लूला ने दिल्ली आने के बजाय ब्राजील में रहना चुना?

ब्रिक्स का संस्थापक, फिर भी दिल्ली से दूरी

लूला की गैरमौजूदगी इसलिए भी खास है क्योंकि वह ब्रिक्स के पुराने नेताओं में से एक हैं. 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में जब पहली ब्रिक बैठक हुई थी, तब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव, चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ और ब्राजील के लूला ही इस समूह की शुरुआती तस्वीर का हिस्सा थे. तब समूह में सिर्फ चार देश थे. आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. ब्रिक्स का दायरा बढ़ चुका है और सऊदी अरब, यूएई, ईरान, मिस्र और इथियोपिया जैसे देश भी इसके साथ जुड़े हैं. ऐसे में संस्थापक देशों में से एक के राष्ट्रपति का शिखर सम्मेलन से दूर रहना अपने आप में ध्यान खींचता है. लेकिन लूला के लिए इस वक्त दिल्ली से ज्यादा जरूरी ब्राजील की घरेलू राजनीति है.

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2009, जिसमें लूला शामिल थे. (फाइल/Reuters)

भारत नहीं, चुनावी मैदान चुना

ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण की वोटिंग 4 अक्टूबर को होनी है. यानी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब चुनावी मुकाबला अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है. लूला एक और कार्यकाल के लिए मैदान में हैं और उनके सामने दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं. ऐसे में लूला ने विदेश यात्रा के बजाय ब्राजील में अपने चुनाव प्रचार को प्राथमिकता दी. वह देश के दक्षिणी राज्यों में रैलियों और दूसरे चुनावी कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं. उनके लिए यह वक्त मतदाताओं के बीच ज्यादा से ज्यादा मौजूद रहने का है.

एक राष्ट्रपति के लिए विदेश यात्रा बनी पेचीदा

लूला की गैरमौजूदगी की वजह सिर्फ चुनाव प्रचार नहीं है. ब्राजील के चुनावी कानून में सरकारी संसाधनों और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम हैं. खासकर तब, जब देश का राष्ट्रपति खुद चुनाव लड़ रहा हो. राष्ट्रपति के तौर पर किसी आधिकारिक विदेश यात्रा का खर्च सामान्य सरकारी नियमों के तहत उठाया जा सकता है. लेकिन अगर किसी यात्रा को चुनावी मकसद से जुड़ा माना जाए, तो उसके खर्च और इस्तेमाल को लेकर अलग चुनावी हिसाब-किताब सामने आ सकता है. ऐसे में चुनाव से महज कुछ हफ्ते पहले भारत की लंबी विदेश यात्रा लूला के लिए राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर अतिरिक्त सवाल खड़े कर सकती थी.

चुनावी खर्च भी बड़ा मुद्दा

ब्राजील में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के चुनावी खर्च की सीमा तय है. 2026 के चुनाव में पहले दौर के लिए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों की खर्च सीमा करीब 88.9 करोड़ ब्राजीलियाई रियाल तय की गई है. अगर उम्मीदवार दूसरे दौर में पहुंचता है, तो करीब 44.4 करोड़ रियाल अतिरिक्त खर्च की सीमा उपलब्ध है. ऐसे में चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में होने वाला हर खर्च महत्वपूर्ण हो जाता है. अगर किसी विदेश यात्रा को चुनावी गतिविधि से जोड़ा जाता है, तो वह खर्च भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है. लूला ऐसे समय कोई अतिरिक्त विवाद नहीं चाहते होंगे, जब उन्हें सीधे अपने चुनावी प्रतिद्वंद्वी से मुकाबला करना है.

About the AuthorYogendra Mishra

Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…

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September 13, 2026, 14:41 IST

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