डॉक्टर को ऐसे ही नहीं कहते हैं भगवान, न तार न चीरा! दिल्ली के डॉ. विनीता ने 65 साल के दिल के मरीज को ऐसे बचाया

Last Updated:September 15, 2026, 07:28 IST
Leadless Pacemaker Heart surgery: इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में डॉ. विनीता अरोड़ा ने 65 वर्षीय मरीज के दिल में लीड लेस पेसमेकर सफलतापूर्वक कर दिया. उनके सिर्फ 15 मिनट की प्रक्रिया के बाद मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है.
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नई दिल्ली: देहरादून और दिल्ली के सभी बड़े अस्पतालों में जांच और इलाज कराकर थक चुके 65 साल के एक दिल का मरीज बहुत परेशान था. वह दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल पहुंचा. यहां उसे पता चला कि उनको दिल में पेसमेकर डलवाना पड़ेगा, लेकिन तीसरी सर्जरी करना काफी कठिन था, क्योंकि मरीज के दिल के राइट साइड (दाहिनी तरफ) के में भी मैटेलिक वाल्व डाला गया था. ऐसे में मैटेलिक वाल्व को क्रॉस कर पाना डॉक्टर के लिए काफी कठिन था और इसमें जान का जोखिम भी था.
डॉक्टर ने काफी मंथन किया. उसके बाद डॉक्टर विनीता अरोड़ा जो कि अपोलो हॉस्पिटल इंद्रप्रस्थ में ही क्लिनिकल लीड – कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी हैं. उन्होंने इस मामले को अपने हाथों में लिया और उसके बाद शुरू हुआ मरीज के दिल में लीड लेस पेसमेकर डालने का काम. यह कोई साधारण पेसमेकर नहीं था, बल्कि यह लीड लेस पेसमेकर था. जो मात्र 15 मिनट में डालकर मरीज को उसी दिन अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया. आपको जानकर हैरानी होगी कि वह मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है. वह गोल्फ और क्रिकेट खेल रहा है. पूरी तरह से भाग दौड़ भी कर पा रहा है. कैसे यह चमत्कार हुआ यही जानने के लिए जब डॉ. विनीत अरोड़ा से लोकल 18 की टीम ने खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से बदल चुकी है.
जानें क्यों डाला जाता है पेसमेकर
सबसे पहले डॉ. विनीता अरोड़ा ने बताया कि पेसमेकर किसी भी मरीज के दिल में तब डाला जाता है, जब उसकी दिल की धड़कन कमजोर हो जाती है या धीमी हो जाती है. पेसमेकर में जो बैटरी लगी होती है. वह एक तरफ से करंट जनरेट करती है या कह सकते हैं कि यह दिल का एक तरफ से इनवर्टर का काम करती है. जो दिल की धड़कन को गति देता है. इसीलिए पेसमेकर लगाना जरूरी होता है.
पहला पेसमेकर जो मरीज को लगाया गया था, वह 1958 में लगाया गया था, लेकिन उसमें उसका साइज काफी बड़ा था. उसमें लीड होती थी और वह लीड कई बार इन्फेक्शन का कारण बन जाती थी. जिस वजह से मरीज को काफी दर्द का सामना करना पड़ता था. उसके कई रिएक्शन होते थे. कई बार स्क्रीन के रिएक्शन भी हो जाते थे. इसी वजह से 1970 में लीड लेस पेसमेकर लाया गया और उसी को फिर से मॉडिफाई करके साल 2016 में एक नया पेसमेकर आया जो कैप्सूल के साइज का है. यह सबसे इन्नोवेटिव और सबसे ज्यादा फायदेमंद पेसमेकर है, जिसे लगाने में सिर्फ 15 मिनट लगते हैं.
लीड लेस पेसमेकर है महंगा लेकिन है 20 साल वारंटी
डॉ. विनीता अरोड़ा ने यह भी बताया कि उस मरीज का दो बार सर्जिकल तौर पर दिल को खोला जा चुका था. दिल की दो बार सर्जरी हो चुकी थी. ऐसे मामलों में तीसरी बार दिल को खोलना यानी छाती को खोलकर उसमें किसी भी तरह का ऑपरेशन करना काफी मुश्किल था. इसीलिए लीड लेस पेसमेकर डालने का फैसला लिया गया. जिसमें कोई तार नहीं होते हैं. कोई लीड नहीं होती है और सिर्फ 15 मिनट में यह मरीज के दिल के अंदर चला जाता और अपना काम करना शुरू कर देता है.
लीड लेस पेसमेकर की कीमत की बात करें तो यह कम से कम 15 से 16 लाख रुपए का होता है, लेकिन यह 15 से 20 साल चलता भी है. इसमें कोई इंफेक्शन नहीं होता है. कोई दर्द नहीं होता है. मरीज को उसी दिन डिस्चार्ज कर दिया जाता है, इसलिए अब ज्यादातर सरकारी हॉस्पिटल हो या फिर प्राइवेट सभी में पेसमेकर के तौर पर लीड लेस पेसमेकर का ही इस्तेमाल किया जा रहा है.
About the AuthorBrijendra Pratap Singh
बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत, दैनिक भास्कर के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से Hindi..com<…
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September 15, 2026, 07:23 IST



