Hyderabad News I शाही महल से प्रशासनिक कॉलेज तक, 120 साल में ऐसे बदली बेला विस्टा की किस्मत

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120 साल पुराने बेला विस्टा का सफर, शाही डांस हॉल से आधुनिक क्लासरूम तक
Last Updated:September 15, 2026, 12:57 IST
Hyderabad News: हैदराबाद के खैरताबाद में हरियाली के बीच खड़ा बेला विस्टा सिर्फ एक खूबसूरत इमारत नहीं, बल्कि 120 साल के शाही इतिहास का गवाह है. कभी निज़ाम के परिवार का आलीशान निवास रहे इस महल में शाही पार्टियां और महफिलें सजा करती थी. आज यही ऐतिहासिक इमारत देश-विदेश के प्रशासनिक अधिकारियों और कॉर्पोरेट लीडर्स के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में नई पहचान बना चुकी है.
हैदराबाद. खैरताबाद की व्यस्त सड़कों से गुजरते हुए शायद ही कोई अंदाजा लगा पाए कि हरियाली के बीच खड़ी एक शानदार इमारत अपने भीतर एक सदी से ज्यादा का इतिहास समेटे हुए है. कभी शाही ठाठ-बाट, भव्य नृत्यों और राजकुमारियों के कदमों से आबाद रहा यह ऐतिहासिक महल बेला विस्टा आज देश के भविष्य को गढ़ने वाले नीति-निर्माताओं का प्रशिक्षण केंद्र बन चुका है.
इतिहासकार शमीम खान के अनुसार, इंडो-यूरोपीय स्थापत्य कला का यह बेजोड़ नमूना 1905 में बनकर तैयार हुआ था. इसे हैदराबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मुसलेहुद्दीन मोहम्मद ने 9.5 एकड़ के विशाल परिसर में बनवाया था. उस दौर में इस इमारत की बालकनी से हुसैनसागर झील का खुला और बेहद खूबसूरत नजारा दिखाई देता था. बाद में 1917 में सातवें निज़ाम ने इसे 60,000 रुपये में खरीद लिया और 1922 में नवीनीकरण के बाद यह उनके सबसे बड़े बेटे राजकुमार आज़म जाह और राजकुमारी दुरु शहवार का आधिकारिक निवास बना.
इसे प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय का रूप दे दिया
राजकुमारी दुरु शहवार जब यहां रहने आई, तो यह महल आधुनिक विलासिता का प्रतीक बना. राजकुमारी के लिए एक बड़ा ओपन स्विमिंग पूल और दो टेनिस कोर्ट बनाए गए, जबकि पानी से डरने वाले राजकुमार के लिए छोटा बेबी पूल तैयार हुआ. दो फीट चौड़ी दीवारों और ऊंची छतों वाले हॉलों में लकड़ी के पारकेट फर्श बिछाए गए, जहां उस दौर में मशहूर विदेशी संगीत और भव्य शाही पार्टियां आयोजित होती थी. हालांकि बाहरी चमक के पीछे पारिवारिक तनाव गहराता गया. इतिहासकार बताते हैं कि राजकुमार की खर्चीली जीवनशैली, बढ़ते कर्ज और आपसी कलह से परेशान होकर राजकुमारी दुरु शहवार ने आखिरकार इस महल को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया और अपने बच्चों के साथ इंग्लैंड चली गई.
1948 में हैदराबाद के भारत में विलय के बाद 1956 में इसे प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय का रूप दे दिया गया. आज इस 120 साल पुरानी विरासत में देश-विदेश के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी और कॉर्पोरेट लीडर्स प्रशिक्षण लेते हैं. जिन हॉलों में कभी शाही डांस होते थे, वहां अब पॉलिसी और गवर्नेंस पर चर्चाएं होती हैं. INTACH हेरिटेज अवॉर्ड से सम्मानित यह संस्थान आज भी अपनी इन-हाउस आइसक्रीम, ताजी बेक की गई ब्रेड और संलग्न बार जैसी अनूठी शाही आतिथ्य परंपराओं को जिंदा रखे हुए है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Hyderabad,Telangana
First Published :
September 15, 2026, 12:57 IST



