National

हाथों का हुनर देख रह जाएंगे हैरान, करौली के लाल पत्थर से बनती है ऐसी तोप, देशभर में बढ़ी डिमांड

Last Updated:September 15, 2026, 18:57 IST

Karauli Lal Patthar: करौली के युवा कलाकार गजानंद सैनी लाल पत्थर पर नक्काशी कर प्राचीन राजशाही दौर की तोप तैयार करते हैं. कभी युद्ध के मैदान में बारूद के गोले बरसाने वाली तोपें आज उनके हाथों से निकलकर देश के कई राजमहलों, हवेलियों और आलीशान इमारतों की शोभा बढ़ा रही हैं.

पूर्वी राजस्थान का करौली अपने लाल पत्थर के लिए देशभर में अलग पहचान रखता है. इसी लाल पत्थर को यहां का एक युवा कलाकार अपने हाथों के हुनर से ऐसा रूप दे रहा है, जिसे देखकर हर कोई आकर्षित हो जाता है. करौली के युवा कलाकार गजानंद सैनी लाल पत्थर पर नक्काशी कर प्राचीन राजशाही दौर की तोप तैयार करते हैं.

कभी युद्ध के मैदान में बारूद के गोले बरसाने वाली तोपें आज उनके हाथों से निकलकर राजमहलों, हवेलियों और आलीशान इमारतों की शोभा बढ़ा रही हैं. गजानंद पिछले कई वर्षों से लाल पत्थर पर नक्काशी का काम कर रहे हैं. उन्होंने यह कला अपने पूर्वजों से सीखी और समय के साथ अपने हुनर को और निखारा है.

सामान्य तौर पर जहां कारीगर लाल पत्थर से जाली, मूर्तियां और सजावटी सामान तैयार करते हैं, वहीं गजानंद ने इसी पत्थर को प्राचीन हथियार तोप का आकार देने की कला विकसित की है.यही उनकी अलग पहचान बन गई है. गजानंद बताते हैं कि प्राचीन समय में तोपें कई धातुओं से तैयार की जाती थीं. आज वह उसी ऐतिहासिक तोप की आकृति को करौली के स्थानीय और देशभर में विख्यात लाल पत्थर पर उकेरते हैं.

Add as Preferred Source on Google

इसके लिए पत्थर की कटाई और आकार देने में मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि बारीक डिजाइन और नक्काशी का महत्वपूर्ण काम हाथ से किया जाता है.गजानंद के मुताबिक उनके द्वारा तैयार की गई लाल पत्थर की तोपों की मांग राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित देश के कई हिस्सों में रहती है.

करौली के राजमहल सहित राजस्थान के कई राजमहलों और ऐतिहासिक इमारतों में भी उनके हाथों से तैयार की गई लाल पत्थर की तोपें सजाई गई हैं. गजानंद बताते हैं कि लाल पत्थर की एक विशाल तोप का जोड़ा तैयार करने में करीब 30 दिन का समय लग जाता है. एक विशाल तोप की कीमत करीब 60 हजार रुपए, जबकि एक जोड़ी की कीमत करीब 1.20 लाख रुपए तक रहती है.

गजानंद का कहना है कि पहले राजशाही दौर में बारूद के गोले दागने के लिए तोपों का इस्तेमाल किया जाता था. उस दौर की तोपें धातुओं से तैयार होती थीं. आज वही तोप उनके लिए युद्ध का हथियार नहीं, बल्कि कला का नमूना है. लाल पत्थर से तैयार यह तोप राजमहलों और इमारतों में सजावट के साथ लोगों के आकर्षण का केंद्र बन रही है. कई जगह लोग इसके साथ फोटोशूट भी करवाते हैं.

करौली की धरती से निकलने वाले लाल पत्थर को अपनी कला से नया रूप देकर गजानंद न केवल पुश्तैनी नक्काशी की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, बल्कि इसी हुनर को अपनी आजीविका का साधन बनाकर करौली की पहचान को भी देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचा रहे हैं. गजानंद पत्थर की तोप के अलावा मंदिरों के नक्काशीदार जाली – झरोखे सहित दर्जनों तरह के खास आइटम भी तैयार करते हैं.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|First Published :

September 15, 2026, 18:57 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj