ममीरा सुरमा | Mamira Surma | Success Story | झुग्गी से विदेशों तक पहुंचा सुशीला सपेरा का ममीरा

Last Updated:September 15, 2026, 18:28 IST
Success Story Of Sikar Women Sushila Sapera : सीकर की सुशीला सपेरा की कहानी संघर्ष, हुनर और मेहनत की मिसाल है. कभी झुग्गी में रहने वाली सुशीला ने परिवार से सीखी पारंपरिक विधि को रोजगार का जरिया बनाया और जड़ी-बूटियों से तैयार होने वाले ‘ममीरा’ सुरमे को कारोबार में बदल दिया. खाटूश्याम जी-रींगस रोड पर उनका उद्यम चल रहा है, जहां तैयार सुरमा राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में भेजा जाता है. सुशीला के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया, कैलिफोर्निया, दुबई और कनाडा से भी इसकी मांग आती है. सोशल मीडिया पर करीब 16 लाख फॉलोअर्स ने उनके काम को नई पहचान दी है. आज सुशीला अपने परिवार के साथ टीम को भी रोजगार दे रही हैं.
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Success Story: कहते हैं हुनर किसी पहचान का मोहताज नहीं होता, बल्कि हुनर ही इंसान की पहचान बना देता है. सीकर की सुशीला सपेरा ने इस कहावत को सच कर दिखाया है. कभी झुग्गी में रहकर जीवन गुजारने वाली सुशीला आज अपने पारंपरिक हुनर के दम पर न सिर्फ राजस्थान बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों तक अपनी पहचान बना चुकी हैं. खाटूश्याम जी से रींगस रोड जाने वाली सड़क पर जांगिड़ सेवा सदन के सामने सुशीला सपेरा का उद्यम चलता है. यहां वे जड़ी-बूटियों से तैयार किया गया पारंपरिक सुरमा ‘ममीरा’ बनाती हैं.
चौमूं पुरोहितान निवासी सुशीला सपेरा ने बताया कि उन्होंने सुरमा तैयार करने की आयुर्वेदिक विधि अपने परिवार के सदस्य शौकीन नाथ दादाजी से सीखी. परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही इस पारंपरिक जानकारी को उन्होंने रोजगार का जरिया बनाया. जड़ी-बूटियों और पारंपरिक तरीके से तैयार किए जाने वाले सुरमा ममीरा की मांग अब लगातार बढ़ रही है. सुशीला के मुताबिक उनके यहां तैयार सुरमा राजस्थान से बाहर देश के कई राज्यों तक भेजा जाता है.
विदेशों तक पहुंचा ‘ममीरा’सुशीला का बनाया सुरमा अब सिर्फ स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं है. उनके अनुसार इसकी मांग ऑस्ट्रेलिया, कैलिफोर्निया, दुबई और कनाडा जैसे देशों से भी आ रही है. सोशल मीडिया ने उनके इस पारंपरिक काम को नई पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई. सुशीला के सोशल मीडिया पर करीब 16 लाख फॉलोअर्स हैं. सोशल मीडिया के जरिए लोग उनके उत्पाद के बारे में जानकारी लेते हैं और ऑर्डर भी करते हैं.
आंखों की रोशनी को लेकर बड़े दावेसुशीला सपेरा के अनुसार सुरमा ममीरा को आंखों से जुड़ी कई परेशानियों में उपयोगी माना जाता है. उनका दावा है कि इसे लगाने से आंखों में पानी आना, जाला, नजर की कमजोरी और नाखूना जैसी समस्याओं में लोगों को राहत मिली है. कुछ लोगों ने नियमित इस्तेमाल के बाद चश्मे की जरूरत कम होने का भी दावा किया है. बड़ी संख्या में लोग आज सुशीला के पास आते हैं और उनका ममीरा लेकर जाते हैं.
खुद आगे बढ़ीं, दूसरों को भी रोजगार दियासुशीला की कहानी सिर्फ एक पारंपरिक उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं है. उन्होंने अपने हुनर को छोटे कारोबार में बदलकर कई लोगों को रोजगार से जोड़ा है. उनका कहना है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी मुश्किल हों, अगर व्यक्ति अपने हुनर पर भरोसा रखे और लगातार मेहनत करे तो पहचान खुद बनती है. झुग्गी से शुरू हुआ उनका सफर आज देश-विदेश तक पहुंच चुका है. आज उनके साथ उनके परिवार के सदस्य के साथ पूरी टीम काम करती है.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Sikar,Sikar,Rajasthan
First Published :
September 15, 2026, 18:28 IST



