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Agriculture Tips: खेती में खर्च घटाएगी यह तकनीक, पानी की 50% तक होगी बचत, खरपतवार भी नहीं करेंगे परेशान

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खेती में खर्च घटाएगी यह तकनीक, पानी की 50% तक होगी बचत, खरपतवार भी होंगे कम

Last Updated:September 17, 2026, 12:24 IST

Mulching Techniques Benefits: मल्चिंग तकनीक किसानों के लिए कम लागत में फसल उत्पादन बढ़ाने और सिंचाई खर्च घटाने का उपयोगी तरीका बन रही है. इस तकनीक में पौधों के आसपास की मिट्टी को पुआल, सूखी पत्तियों या प्लास्टिक शीट से ढका जाता है. इससे मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और सिंचाई के पानी की करीब 30 से 50 प्रतिशत तक बचत हो सकती है. मल्चिंग खरपतवार की वृद्धि रोकने के साथ निराई-गुड़ाई और मजदूरी का खर्च भी कम करती है. इसके अलावा मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहने से पौधों की जड़ों को गर्मी, सर्दी और पाले से राहत मिलती है. बारिश के दौरान मिट्टी के कटाव को रोकने में भी यह तकनीक मददगार है. टमाटर, मिर्च, खरबूज और तरबूज जैसी फसलों में मल्चिंग का इस्तेमाल खास तौर पर फायदेमंद माना जाता है.

आज के आधुनिक खेती के दौर में किसान अब ऐसी तकनीकों को अपना रहे हैं, जिनसे कम लागत में फसल का उत्पादन बढ़ाया जा सके. इसी कड़ी में मल्चिंग तकनीक किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है. इस तकनीक में फसल के पौधों के आसपास की मिट्टी को पुआल, सूखी पत्तियों या प्लास्टिक शीट से ढक दिया जाता है. इससे पौधों की जड़ों को कई तरह के होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है.

मल्चिंग का सबसे बड़ा फायदा पानी की बचत के रूप में सामने आता है. मिट्टी ढकी होने के कारण नमी जल्दी सूखती नहीं है और लंबे समय तक बनी रहती है. इससे फसल को बार-बार पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती. खेती में सिंचाई के पानी की करीब 30 से 50 प्रतिशत तक बचत हो सकती है, जिससे किसानों का पानी और सिंचाई पर होने वाला खर्च दोनों कम होते हैं.

मल्चिंग शीट खेत में खरपतवार को पनपने से भी रोकती है. शीट के कारण सूर्य की रोशनी मिट्टी तक नहीं पहुंच पाती, जिससे अनावश्यक घास-फूस कम उगता है. इससे किसानों को बार-बार निराई-गुड़ाई नहीं करनी पड़ती और मजदूरी पर होने वाला खर्च भी घट जाता है. साथ ही मिट्टी से जुड़े कुछ कीट और फंगस से फसल को बचाने में भी मल्चिंग मददगार होती है.

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इस तकनीक का असर मिट्टी की सेहत पर भी देखने को मिलता है. मल्चिंग से मिट्टी का तापमान काफी हद तक नियंत्रित रहता है. सर्दी के मौसम में पाले और गर्मी में तेज लू से पौधों की जड़ों को राहत मिलती है. मिट्टी की ऊपरी परत भी ज्यादा कठोर नहीं होती, जिससे जड़ों का विकास बेहतर तरीके से होता है. बारिश के दौरान मिट्टी के कटाव को रोकने में भी मल्चिंग उपयोगी रहती है.

सब्जी वर्ग की फसलों में मल्चिंग का इस्तेमाल खास तौर पर फायदेमंद माना जाता है. टमाटर, मिर्च, खरबूज और तरबूज जैसी फसलों में इसका इस्तेमाल करने से पानी, मजदूरी और खरपतवार नियंत्रण पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है. फसल की अच्छी बढ़वार होने से उत्पादन और गुणवत्ता में भी सुधार की संभावना रहती है.

किसानों के लिए मल्चिंग तकनीक खेती में खर्च घटाने और उत्पादन को बेहतर बनाने का एक उपयोगी तरीका बन रही है. खासकर जहां पानी की कमी रहती है, वहां मिट्टी में नमी बनाए रखने में यह तकनीक काफी मदद कर सकती है. हालांकि मल्चिंग के लिए सही सामग्री, फसल और मौसम के हिसाब से इसका इस्तेमाल करना जरूरी है, ताकि किसानों को इसका पूरा लाभ मिल सके.

First Published :

September 17, 2026, 12:24 IST

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