कन्हैयालाल चौधरी की प्लानिंग रंग लाई, मालपुरा में कांग्रेस को निर्दलीय से भी कम सीटें तो टोडारायसिंह में BJP की जीत

टोंक से नगरीय निकाय चुनाव के रिजल्ट में बीजेपी के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. मालपुरा-टोडारायसिंह विधानसभा क्षेत्र की चार निकायों में बीजेपी ने दमदार प्रदर्शन किया है. इस रिजल्ट के बाद कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी का सियासी प्रभाव एक बार फिर नजर आया है. सबसे बड़ी जीत टोडारायसिंह में मिली, जहां बीजेपी ने 35 में से 28 सीटों पर कब्जा जमाया. कांग्रेस यहां सिर्फ 7 सीटों पर सिमट गई.
मालपुरा में कांग्रेस को निर्दलीय से भी कम सीट
मालपुरा में भी बीजेपी ने बढ़त बनाई. यहां कुल 40 सीटों में से बीजेपी ने 22 सीटें जीतीं. कांग्रेस को 6 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 12 सीटें मिलीं. डिग्गी में बीजेपी ने 25 में से 14 सीटों पर जीत दर्ज की. कांग्रेस को 10 सीटें मिलीं, जबकि एक सीट निर्दलीय के खाते में गई.
लांबाहरिसिंह में भी बीजेपी आगे रही. यहां पार्टी ने 20 में से 11 सीटों पर जीत हासिल की. कांग्रेस को 6 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 3 सीटें मिलीं.
चार निकायों का रिजल्ट
मालपुरा: बीजेपी 22, कांग्रेस 6, निर्दलीय 12
डिग्गी: बीजेपी 14, कांग्रेस 10, निर्दलीय 1
लांबाहरिसिंह: बीजेपी 11, कांग्रेस 6, निर्दलीय 3
टोडारायसिंह: बीजेपी 28, कांग्रेस 7
इन नतीजों में खास तौर पर टोडारायसिंह में बीजेपी की बड़ी जीत चर्चा में है. चारों निकायों में पार्टी ने कांग्रेस के मुकाबले मजबूत प्रदर्शन किया है. इससे मालपुरा-टोडारायसिंह क्षेत्र में बीजेपी की स्थिति मजबूत होने का संकेत मिलता है.
राजस्थान नगरीय चुनावों में बीजेपी की जीत, कांग्रेस का भी दिखा दम
झालावाड़ और पाली जैसे हाई-प्रोफाइल जिलों में कांग्रेस ने बीजेपी को पटखनी दी है, वहीं उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा में बीजेपी ने अपनी मजबूत पकड़ साबित की है. भरतपुर और अजमेर जैसे बड़े शहरों में निर्दलीय प्रत्याशी किंगमेकर बनकर उभरे हैं.
निकाय चुनाव के मुख्य आंकड़े और परिणाम
कुल निकाय चुनाव: 309 (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका)
कुल वार्ड: 10,167
मतदान चरण: दो चरण (9 सितंबर और 11 सितंबर 2026)
किस निगम में कौन जीता
उदयपुर नगर निगम: बीजेपी ने लगातार 7वीं बार शानदार जीत दर्ज कर अपना दबदबा बरकरार रखा.
कोटा नगर निगम: कुल 100 वार्डों में से करीब 60 सीटों पर जीत के साथ बीजेपी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया. कांग्रेस 20 सीटों पर सिमट गई.
बीकानेर नगर निगम: कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर बीजेपी के 10 साल पुराने बोर्ड को उखाड़ फेंका.
भीलवाड़ा नगर निगम: कांग्रेस की रणनीतिक चूक (नामांकन न भर पाने) के चलते कई वार्डों में बीजेपी उम्मीदवार निर्विरोध जीते, जिससे बीजेपी का बोर्ड बनना तय हो गया.
झालावाड़ में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का गढ़ हिला
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले झालावाड़ जिले में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया है. झालावाड़ नगर परिषद के साथ-साथ खानपुर, भवानी मंडी और डग में कांग्रेस ने शानदार बढ़त बनाई है. हालांकि, झालरापाटन, मनोहर थाना और अकलेरा में बीजेपी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है.
पाली में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को झटका
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में कांग्रेस ने बीजेपी के समीकरण बिगाड़ दिए. पाली में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे बीजेपी सरकार के खिलाफ जनता का जनादेश बताया है.
टोंक में सचिन पायलट और जलदाय मंत्री की साख बची
टोंक जिले की एकमात्र नगर परिषद टोंक में कांग्रेस विधायक सचिन पायलट का जलवा कायम रहा, जहां कांग्रेस ने 59 में से 32 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया. वहीं जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी के प्रभाव वाले क्षेत्र मालपुरा, टोडा रायसिंह, डिग्गी और लांबा हरसिंह में बीजेपी का बोर्ड बनना तय हुआ है.
भरतपुर और अजमेर: निर्दलीय बने ‘किंगमेकर’
भरतपुर नगर निगम (सीएम का गृह क्षेत्र): मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर के 65 वार्डों में जनता ने निर्दलीयों पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया है. सड़कों की खस्ताहाल हालत और स्थानीय मुद्दों से नाराज जनता ने 36 वार्डों में निर्दलीयों को जिताया. यहां बीजेपी को 20 और कांग्रेस को सिर्फ 7 सीटें मिलीं.
अजमेर नगर निगम: 80 वार्डों में से कांग्रेस को 37 और बीजेपी को 32 सीटें मिली हैं. 11 निर्दलीयों की जीत के बाद अब दोनों ही दलों की नजरें निर्दलीय पार्षदों पर टिकी हैं.
बारां और केकड़ी: बारां में आम आदमी पार्टी (AAP) ने चौंकाने वाली एंट्री की है, जबकि केकड़ी में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) किंगमेकर की भूमिका में आ गई है.
नतीजों के सियासी मायने और बीजेपी के लिए सबक
राजस्थान के इन निकाय चुनाव परिणामों ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए भविष्य का खाका तैयार कर दिया है. एक तरफ जहां कोटा और उदयपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में बीजेपी का संगठन मजबूत नजर आया, वहीं भरतपुर, पाली और झालावाड़ के नतीजों ने पार्टी को आत्मचिंतन करने पर मजबूर कर दिया है. आगामी पंचायत चुनावों से पहले सड़कों की खराब स्थिति और स्थानीय जनसमस्याओं को नजरअंदाज करना बीजेपी के लिए भारी पड़ता दिख रहा है.



