क्या 30 सेकंड में कम हो सकता है टेंशन? कैसे 4 आदतें बन सकती हैं गेम-चेंजर

सुबह ऑफिस के लिए भागना, बच्चों को स्कूल भेजना, ट्रैफिक झेलना, दिनभर मीटिंग्स और रात में घर की जिम्मेदारियां. शायद हम सभी का पूरा दिन लगभग इसी तरह के तनाव के साथ गुजरता है. एक हालिया रिसर्च बताती है कि मानव शरीर ‘लंबे समय तक तनाव’ में रहने के लिए नहीं बना. हमारा शरीर हल्का तनाव महसूस करते ही एक्टिव मोड में आ जाता है. पहले जब इंसान शिकार करता था, तो किसी जानवर के आने की भनक से ही वो तुरंत एक्टिव हो जाता था. लेकिन इस नई और आधुनिक लाइफस्टाइल की परेशानी ये है कि अब हर पल तनाव हमारे आसपास ही रहता है. यह छोटी-छोटी बातों से जमा होता है और धीरे-धीरे हमारी नींद, मूड, रिश्तों और सेहत पर असर डालने लगता है. तो क्या जब भी तनाव कम करना होगा, उसके लिए अकेले में बैठकर मेडिटेशन ही करना होगा. या कोई ऐसी झटपट तकनीक है जो इस सट से आने वाले तनाव को पट से कम कर दे?
वैज्ञानिकों की मानें तो इसका जवाब है हां. कुछ ऐसी “माइक्रो-प्रैक्टिसेज” यानी बेहद छोटी आदते हैं जो सिर्फ 20-30 सेकंड में भी दिमाग को थोड़ा शांत कर सकती हैं. सुनने में यह बहुत छोटा समय लगता है, लेकिन न्यूरोसाइंस बताती है कि कई बार शरीर और दिमाग को दिशा बदलने के लिए कुछ सेकंड ही काफी होते हैं.
भारत में तनाव कितना बड़ा मुद्दा बन चुका है?
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NMHS) के अनुसार भारत के लगभग 10.6% वयस्क किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से प्रभावित हैं. वहीं लगभग 15% वयस्कों को जीवन के किसी चरण में मानसिक स्वास्थ्य सहायता की जरूरत पड़ती है. निमहांस (NIMHANS) के सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि देश में करोड़ों लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग इलाज या सहायता तक पहुंच ही नहीं पाते. यानी हर तनावग्रस्त व्यक्ति को तुरंत थेरेपिस्ट या डॉक्टर नहीं मिल सकता. ऐसे में हमारा डेली रुटीन और छोटी-छोटी आदतें ही इस स्ट्रैस को मैनेज करने में हमारी मदद कर सकता है.
पहली आदत: शॉर्ट ब्रीदिंग
दिल्ली के जनकपुरी में रहने वाली आईटी प्रोफेशनल शालिनी अवस्थी बताती हैं कि किसी प्रेजेंटेशन से पहले उनका दिल तेजी से धड़कने लगता है. ऐसे में उन्होंने एक आसान तरीका अपनाया. मीटिंग रूम में जाने से पहले वे सिर्फ तीन गहरी सांसें लेती हैं. उन्हें इससे सच में खुद को काम-डाउन करने में मदद मिलती है.
ये सुनने में आपको नॉर्मल सी आदत लग रही होगी, लेकिन इसके पीछे आपके शरीर से जुड़ा गहरा विज्ञान है. धीमी और गहरी सांसें शरीर के पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को एक्टिव करती हैं. यही सिस्टम शरीर को “आराम और रिकवरी” मोड में लाता है. शोध बताते हैं कि ऐसी ब्रीदिंग एक्सरसाइज तनाव, चिंता और मानसिक दबाव को कम करने में मदद कर सकती है.
इसके लिएआराम से बैठें.लगभग 10 सेकंड में एक गहरी सांस लें.सांस छोड़ने में थोड़ा अधिक समय लगाएं.ऐसा तीन बार करें.
दूसरी आदत: हंस लो, चाहे नकली ही सही
सुबह-सुबह किसी भी शहर के पार्क में आपको ऐसे लाफ्टर क्लब चलते नजर आ जाएंगे. यहां लोग शुरुआत तो नकली हंसी से करते हैं पर धीरे-धीरे ये असली ठहाकों में बदल जाती है. लाफ्टर योगा भी एक ऐसी ही छोटी सी आदत है जो आपके तनाव को तुरंत नीचे ला देगी. कई रिसर्च ये साबित कर चुकी हैं कि हंसी, डिप्रेशन और चिंता के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है.
तीसरी आदत: खुद को छूकर खुद को शांत करना
यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिक इसे “सेल्फ-सूथिंग टच” कहते हैं. आपको याद है फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ का रैंचो जो किसी भी टेंशन में अपने दिल पर हाथ रखकर कहता है, ‘ऑल इस वेल…’. ऐसा कहने से सबकुछ ठीक हो या न हो, पर आपके दिल को ये जरूरत लगता है कि ऑल इज वेल. असल में जब भी कोई गड़बड़ या टेंशन होती है, हम तुरंत सेल्फ-क्रिटिकल हो जाते हैं, खुद को कोसने लगते हैं अपनी कमी ढूंढने लगते हैं. पर कई रिसर्च बताती हैं कि खुद को तसल्ली देने वाला टच देना, तनाव से जुड़े हार्मोन कोर्टिसोल को कम करने में हेल्प करता है. यानी जब ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ की तरह जब कोई जादू की झप्पी देने वाला न मिले तो रैंचो की तरह अपने दिल को कहें ‘ऑल इज वेल’. यकीन मानिए वो मान जाता है.
चौथी आदत: कुर्सी से उठिए और स्ट्रैचिंग कीजिए
आप चाहे किसी मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहे हैं या फिर कॉलसेंटर में. कॉर्पोरेट कल्चर के साथ सबसे बुरी जो चीज आती है, वो है घंटों बैठने वाली नौकरी. लंबे समय तक लैपटॉप या डेस्कटॉप की स्क्रीन के आगे बैठना युवाओं के काम के कल्चर का हिस्सा बन गया है, जो तनाव का एक बड़ा कारण है. लाखों लोग दिन के 8-10 घंटे लैपटॉप के सामने बैठकर काम करते हैं. जब शरीर लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहता है तो तनाव सिर्फ दिमाग में नहीं, मांसपेशियों में भी जमा होने लगता है. शरीर के इस तनाव को रिलीज करने का सबसे अच्छा तरीका है स्ट्रैचिंग. इसके लिए हर बार सिर्फ जिम जाने की जरूरत नहीं है. आप अपनी कुर्सी से उठकर शरीर को थोड़ा खींचें और फिर देखें. आपको तुरंत राहत मिलेगी. वैज्ञानिक बताते हैं कि गहरी सांसों के साथ किया गया हल्का स्ट्रेच मानसिक तनाव और थकान कम करने में मदद कर सकता है.
ये जितनी भी आदतें हैं, इन्हें करने में आपको 1 मिनट से भी कम समय लगता है. 1 मिनट क्या अगर आप सिर्फ 30 सैकंड भी ऐसा करते हैं, तो आपको सचमुच आराम मिलता है. हां, ये भी सही है कि ऐसी आदतें गंभीर डिप्रेशन, पैनिक डिसऑर्डर या मेंटल हेल्थ से जुड़ी बीमारियों से निजाद नहीं दिला सकतीं. लेकिन आपके हर दिन के तनाव और टेंशन के लिए ये माइक्रो-हैबिट्स काम आती हैं. यानी अगली बार जब बॉस के साथ मीटिंग हो या फिर डेडलाइन का टेंशन हो, बस 30 सेकंड निकालकर ये 4 आदतें करके देखिएगा. आपको रिलैक्स जरूर मिलेगा.



